फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Namishya Samiti will miss girija devi

वह अंगुली छूट गई जिसे पकड़कर गीत संगीत को आगे बढ़ाना था 

Thu, 26 Oct 2017 12:03 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Thu, 26 Oct 2017 12:03 AM IST
विज्ञापन
Namishya Samiti will miss girija devi
गिरीजा देवी
संस्कृति और संगीत के अटूट बंधन के बीच एक सेतुबंध की तरह थीं अप्पा। ठुमरी को भारतीय शास्त्रीय संगीत के कलेवर से निकालकर विश्व पटल पर पहुंचाने वाली गिरिजा देवी की कमी तो खलेगी ही।
विज्ञापन


परंपरा और धरोहरों की सशक्त हस्ताक्षर रहीं अप्पा की कमी अब नैमिषेय समिति को भी महसूस होगी। अब अप्पा के जाने के बाद समिति से वह अंगुली छूट गई जिसे पकड़कर गीत संगीत को आगे बढ़ाना था, पर अप्पा ने संगीत के लिए जो योगदान दिया उस रोशनी में समिति की राह जरूर आसान होगी।
विज्ञापन


भारत की संस्कृति और सभ्यता को सहेजने और संरक्षित करने के लिए काशी को केंद्र में रखकर बीते साल दिसंबर में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में ‘नैमिषेय समिति’ के गठन का प्रस्ताव रखा गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


संस्कृति महोत्सव के दौरान प्रस्तावित इस समिति की मुख्य मार्गदर्शक सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर को बनाए जाने की बात कही गई तो मार्गदर्शक के तौर पर पद्मविभूषण गिरिजा देवी के नाम पर मुहर लगी थी।

काशी केंद्र हो और बात संस्कृति व सभ्यता हो सहेजने की, उसे रचने बसने की हो तो फिर अप्पा को कहां भुला जा सकता था, सो उन्हें इसका मार्गदर्शक बनाया गया।

18 दिसंबर को बीएचयू स्वतंत्रता भवन में ‘संस्कृति और सभ्यता में नैमिषारण्य’ विषयक इस संगोष्ठी में डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी, सोनल मानसिंह, प्रो. सच्चिदानंद जोशी समेत देश भर से आए साहित्यकार, कलाकार, फिल्मकारों ने मार्गदर्शक के तौर पर गिरिजा देवी के नाम पर मुहर लगाई थी।

बीएचयू के प्रो. सदाशिव द्विवेदी कहते हैं कि अब गिरिजा देवी जी के न रहने से इसमें शून्यता आ जाएगी। नैमिषारण्य परंपरा को विराट रूप में ‘संस्कृति नैमिषेय’ के रूप में 2018 में आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।

इस आयोजन में भी उनकी कमी शिद्दत से महसूस होगी। दुखते मन से हमें अब अप्पा का चले जाना स्वीकारना होगा पर नैमिषेय समिति अपने लक्ष्यों की प्राप्ति हो, यही अप्पा के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 

 

मैं शब्दों से नहीं बल्कि संगीत से ही अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से समझा पाती हूं

Namishya Samiti will miss girija devi
गिरिजा देवी - फोटो : FILE PHOTO
दिसंबर 2016 में संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित तीसरे राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव के उद्घाटन में बतौर विशिष्ट अतिथि गिरिजा देवी ने शिरकत की थी। थीं तो वो विशिष्ट अतिथि लेकिन उन्होंने बहुत ही कम और संक्षिप्त शब्दों में अपना भाषण दिया था।

कहा था, ‘मैं शब्दों से नहीं बल्कि संगीत से ही अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से समझा पाती हूं। उस वक्त देश भर के नामचीन कलाकारों, हस्तियों ने इस महोत्सव में अपनी प्रस्तुतियां दी थीं।

इस महोत्सव के उद्घाटन दीप उन्होंने ही जलाए थे और पहले दिन प्रस्तुति भी उन्हीं की थी और यही प्रस्तुति काशी हिंदू विश्वविद्यालय में उनकी अंतिम यादगार बनकर रह गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस महोत्सव के साक्षी बने थे। अपने संबोधन के बाद मंच से उतरकर दर्शक दीर्घा में सबसे आगे बैठीं गिरिजा देवी से उन्होंने सबसे पहले आशीर्वचन लिया था। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed