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Namami Gange: गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करने की वर्षगांठ पर उतारी आरती, बांटे तुलसी के 201 पौधे

Fri, 04 Nov 2022 10:46 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Fri, 04 Nov 2022 10:46 AM IST
सार

संयोजक राजेश शुक्ला ने कहा कि मां गंगा केवल नदी ही नहीं, एक संस्कृति हैं,आस्था की प्रतीक और आजीविका का स्रोत भी हैं। मां गंगा की आरती उतारकर हमने गंगा की अविरलता, निर्मलता,स्वच्छता के साथ काशीवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की है।

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Namami Gange Aarti performed on the anniversary of declaring Ganga a national river distributed 201 Tulsi
गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करने की वर्षगांठ पर उतारी आरती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करने की वर्षगांठ पर नमामि गंगे व 137 सी ई टी एफ बटालियन गंगा टास्क फोर्स ने पंचगंगा घाट पर मां गंगा की आरती उतारी। 4 नवंबर राष्ट्रीय नदी घोषित होने की तिथि पर गंगा किनारे की सफाई करके मां गंगा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। 

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पर्यावरण संरक्षण व गंगा स्वच्छता का संदेश देते हुए तुलसी विवाह देवोत्थान एकादशी के अवसर पर तुलसी के 201 पौधों का वितरण किया। पंचगंगा घाट पर बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं ने तुलसी के पौधे लेकर पुण्यलाभ लिया। पर्यावरण संरक्षण एवं गंगा स्वच्छता हेतु सभी संकल्पित हुए। नमामि गंगे के सदस्यों और गंगा टास्क फोर्स के जवानों ने गंगा तट पर श्रद्धालुओं द्वारा की गई गंदगी को एकत्र किया तथा लोगों को गंदगी न करने के लिए प्रेरित किया । इस दौरान श्री हरि भगवान विष्णु का तुलसी जी से विवाह संपन्न कराकर आरती उतारी गई। 

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Namami Gange Aarti performed on the anniversary of declaring Ganga a national river distributed 201 Tulsi
देवस्थान एकादशी पर तुलसी के पौधे बांट कर पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश - फोटो : अमर उजाला
संयोजक राजेश शुक्ला ने कहा कि मां गंगा केवल नदी ही नहीं, एक संस्कृति हैं,आस्था की प्रतीक और आजीविका का स्रोत भी हैं। मां गंगा की आरती उतारकर हमने गंगा की अविरलता, निर्मलता,स्वच्छता के साथ काशीवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की है। कहा कि देवोत्थान एकादशी का पर्व हमें धर्म के साथ कर्म का अवसर प्रदान करता है।  भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने का यह पर्व एक प्रकार से अपने कर्तव्यों व दायित्वों के प्रति जागने और जगाने का पर्व है | भगवान के  जागने से सृष्टि में सकारात्मक शक्तियों का संचार होने लगता है। तुलसी पूजन की परंपरा भी वैज्ञानिक एवं पर्यावरण संरक्षण के पक्ष को ही पुष्ट करती है। कफ जनित रोगों के शमन में तुलसी रामबाण जैसा असर रखती है।  इस मौसम विशेष में तुलसी का सेवन सर्वाधिक लाभकारी माना गया है। आयोजन में प्रमुख रूप से काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला, गंगा टास्क फोर्स से कर्नल हेमंत गंभीर, सूबेदार शिवेंद व जवानों सहित महानगर संयोजक शिवदत्त द्विवेदी, महानगर सहसंयोजक बीना गुप्ता, महानगर प्रभारी पुष्पलता वर्मा, हिमांशु गुप्ता एवं सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुगण शामिल रहे। 
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