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Guru Purnima: बनारस में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब, मुस्लिम महिलाओं ने मनाई गुरु पूर्णिमा; इस महंत की उतारी आरती

Sun, 21 Jul 2024 12:27 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 21 Jul 2024 12:27 PM IST
सार

Varanasi News: काशी के मठ-मंदिरों में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विभिन्न आयोजन हुए। पातालपुरी मठ में हुए इस आयोजन की काफी चर्चा है।

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Muslim women celebrated Guru Purnima festival in varanasi performed aarti of Mahant Balakdas
महंत बालकदास का पूजन करतीं मुस्लिम महिला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रामानन्दी सम्प्रदाय ने हमेशा से छुआछूत और भेदभाव को खत्म करने का अभियान चलाया। आदिगुरु रामानन्द ने मुस्लिम और दलित को गुरुमंत्र देकर रामभक्ति में नई क्रांति का सुत्रपात किया। रामानन्द के प्रसिद्ध शिष्य नरहरि दास ने पातालपुरी मठ की स्थापना की।
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उसी पीठ पर विराजमान पीठाधीश्वर महंत बालक दास जी महाराज ने मठ का दरवाजा सभी के लिए खोल दिया। रामभक्ति के लिए धर्म और जाति की कोई बाध्यता नहीं है। तभी तो महंत बालक दास की आरती मुस्लिम महिला फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नाज़नीन अंसारी के नेतृत्व में मुस्लिम महिलाओं ने उतारी।
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गुरु पद का सम्मान किया, रामनामी दुपट्टा ओढ़ाया। मुस्लिम महिलाओं की शीर्ष नेता नाज़नीन अंसारी के साथ मुस्लिम महिलाओं ने महंत बालक दास से रामनाम का मंत्र लिया। धर्म के नाम पर हिंसा करने वालों के लिए यह बेहतर सबक है। 
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गुरु की महत्ता का बखान वेदों में भी है
प्रसिद्ध दलित विचारक ज्ञान प्रकाश ने पूरे विधि-विधान से मंत्रोच्चारण के साथ रामपंथ के धर्माध्यक्ष महंत बालक दास से रामपंथ में दीक्षा ली। रामपंथ में दीक्षित होने के बाद ज्ञान प्रकाश को रामाचार्य का पद प्रदान किया। गुरु का स्थान सभी सम्बन्धों से ऊपर होता है। गुरु की महत्ता का बखान वेदों में भी है। 

रामपंथ के पंथचार्य डॉ. राजीव ने कहा कि जहां सारे भेद खत्म हो जाएं वहीं राम हैं। रामनाम का मंत्र लेने वाला कभी भी और कहीं भी भेद नहीं कर सकता। पातालपुरी मठ ने नया इतिहास रचा है। दलित और मुस्लिम समाज ने अपने गुरु बालक दास को सम्मान देकर एकता और भाईचारा का संदेश दिया।

महंत बालक दास ने कहा कि रामपंथ में बिना किसी भेदभाव के रामनाम की दीक्षा देंगे। भगवान राम के शरण में जो भी आएगा सब हमारे हैं। जो भी रामभक्ति से जुड़ना चाहते हैं वो सब आये। हमें सब स्वीकार है। हिन्दू धर्म में सबकी स्वीकारोक्ति है।

इस अवसर पर डॉ. अर्चना भारतवंशी, नाज़नीन अंसारी, डॉ. नजमा परवीन, खुर्शीदा बेगम, शबनम, शबाना, कुलसुम, राबिया बानो, हुसना बानो, रुखसार, तसकिया जमाल, मो. शहाबुद्दीन, मो. अफरोज, शमशाद अली, रोजा भारतवंशी, आभा भारतवंशी, अफसर अंसारी, राजकुमार सिंह गौतम, अंकित, सचिन, डॉ. धनंजय यादव, इली, खुशी, उजाला, दक्षिता आदि लोगों ने भाग लिया।

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