माखन चोर के मुस्लिम भक्त : फातिमा बनी राधा और सादिक बने श्रीकृष्ण, सज्जा ने मोहा मन; आज होगा लीला मंचन
Varanasi News: वाराणसी में संचालित निशुल्क पाठशाला में मुस्लिम बच्चे श्रीकृष्ण लीला का आकर्षक मंचन करते है। खास यह कि बच्चों को भागवत गीता पूरी तरह याद है। वे मंचन के दौरान इसका उपयोग भी करते हैं।
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हिंदुओं को तो यकीं है मुसलमां है नजीर, मुसलमानों को शक है कहीं हिंदू तो नहीं... शायर नजीर बनारसी का यह शेर काशी पर एकदम मुफीद बैठता है। यहां बनारसी साड़ी के ताने-बाने की तरह हिंदू और मुसलमान आपस में जुड़े हुए हैं।
यही कारण है कि फातिमा फूले नहीं समां रही है राधा बनकर और सादिक को माखन चोर बनने से भी कोई गुरेज नहीं। सुंदरपुर में संचालित निशुल्क पाठशाला में पढ़ने वाले मुस्लिम बच्चे जन्माष्टमी महोत्सव में कृष्ण से जुड़े प्रसंगों पर प्रस्तुति देंगे।
झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले ये बच्चे इस जन्माष्टमी पर भगवान के स्वरूप में नजर आएंगे। प्रतिभा सिंह यशोदा बनकर इन बच्चों को तैयार कर रही हैं। निशुल्क पाठशाला में शिक्षा ग्रहण करने वाले इन मुस्लिम बच्चों को गीता कंठस्थ है और वह इनका अर्थ भी समझाते हैं। सादिक भगवान कृष्ण के किरदार में स्वयं को ढाल रहा है तो राधा की भूमिका का अभ्यास फातिमा दिलोजान से कर रही है।
जन्माष्टमी के दिन होने वाले आयोजन में यह बच्चे अभिनय करेंगे। उर्मिला देवी मेमोरियल सोसाइटी की निदेशिका प्रतिभा सिंह ने बताया कि मुस्लिम समुदाय के बच्चे भगवान कृष्ण से जुड़े प्रसंग करने के लिए बेताब हैं। पाठशाला में पढ़ रहे इन मासूमों के हाथों में कभी कटोरा था। भीख मांगना इनकी नियति थी, लेकिन अब जिंदगी बदल गई है। ऐसे करीब सौ बच्चे हैं, जिनकी जिंदगी शिक्षा की लौ से रोशन हो रही है।
तीन दिन के लिए माहेश्वरी भवन में विराजे श्रीहरि के विग्रह
साढ़े तीन किलोमीटर की शोभायात्रा के दौरान रास्ते भर कृष्ण भक्तों की टोली। हरे कृष्ण के महामंत्र का जाप करते हुए बच्चे, बड़े और बुजुर्ग चल रहे थे। भगवान के श्रीविग्रह लड्डू गोपाल के साथ निकली शोभायात्रा के साथ ही हरे कृष्ण हरे राम संकीर्तन सोसायटी का तीन दिवसीय श्रीकृष्ण जन्मोत्सव आरंभ हो गया।
हरे कृष्ण हरे राम संकीर्तन सोसाइटी की ओर से अन्नपूर्णा नगर काॅलोनी (विद्यापीठ के सामने) से भगवान श्रीकृष्ण एवं श्री लड्डू गोपाल की शोभा यात्रा मुख्य संरक्षक श्री किशोरी किशोर प्रभुजी के नेतृत्व में आरंभ हुई। शोभायात्रा के अंत में श्रीश्री राधा गोविन्द देव जी, श्रीजगन्नाथ देव, श्री बलदेव जी एवं सुभद्रा महारानी के श्री विग्रहों को तीन दिन के लिए माहेश्वरी भवन महमूरगंज में स्थापित कर दिया गया।