आपदा को अवसर में बदला ... काशी में संगीतकारों ने रच दिए चार नए राग
कोरोना संक्रमण ने जहां विनाश के रास्ते खोले वहीं काशी ने उसमें सृजन की राह तलाश ली। मुश्किल दौर में जहां लोग तनाव के साथ ही जिंदगी की जद्दोजहद कर रहे थे वहीं काशी के संगीतकार नए प्रयोग में जुटे रहे। आपदा को अवसर में बदलते हुए उन्होंने नए रागों को रचकर संगीत जगत को चार नए रागों का तोहफा दिया।
आने वाले समय में सजेगी महफिल
चार नए रागों में राग शिवमंजरी, गंगा रंजनी और अटल कल्याण की रचना सितारवादक पं. शिवनाथ मिश्र ने व राग शबनमी का सृजन उपशास्त्रीय गायिका सुचरित गुप्ता ने किया है। अनलॉक में यह राग दुनिया के सामने हैं। आने वाले समय में संगीत की महफिलों में इन्हें सुनने का मौका मिलेगा। इससे पहले भारतरत्न पं. रविशंकर ने अपने जीवन काल में सात नए रागों का सृजन किया था।
पं. शिवनाथ मिश्र का कहना है कि लॉकडाउन में तमाम प्रतिबंधों के साथ सभी आयोजन निरस्त थे। ऐसे में लंबे समय और एकांत का सदुपयोग नए रागों के सृजन में किया।
अटलजी को समर्पित
राग अटल कल्याण को उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित किया है। अटल जी की जयंती 25 दिसंबर को इस राग का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन होगा। इस राग को अभिव्यक्ति देने के लिए उन्होंने बंदिश सप्त सुरों में हम गाएं यशगान सदा... अटल अमर अक्षय होवें सम्मान सदा की रचना की है। यह राग पुरिया कल्याण के बेहद करीब है।
दूसरी शिवमंजरी राग चारूकेशी के समकक्ष है। इस राग के लिए उन्होंने भगवान शंकर पर आधारित बंदिश हे करुणाकर, हे महेश्वर कृपा करो...रची है जबकि गंगा रंजनी पर आधारित बंदिश मातु गंगा त्रिभुवन तारिनी, पाप हरो हम सब जनमानस को...। इन रागों में पंचम ताल का प्रयोग नहीं है जबकि शेष शुद्ध स्वर का समावेश है।
उपशास्त्रीय गायिका सुचरिता दास गुप्ता ने बताया कि खाली समय में सुबह का राग शबनमी रचा गया है। भैरव थाट राग के समकक्ष राग शबनमी में बनारस की गंगा जमुनी तहजीब के स्वर हैं। यह राग उन्होंने अपनी धर्मपुत्री डॉ. शबनम खातून को समर्पित किया है।
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