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मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि पर रंगमंच के नए अवतार ने दर्शकों को दी संजीवनी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 09 Oct 2017 02:09 PM IST
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रंगलीला संस्था, आगरा के कलाकारों ने नाटकीय अंदाज में किया कथावाचन
- फोटो : अमर उजाला
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कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि पर रविवार को उनकी तीन कहानियों का पाठ नए रंग विन्यास में हर किसी को लुभा गया। आगरा, ब्रज की लोक रंग कलाओं के पुनरुद्धार को समर्पित संस्था ‘रंगलीला’ के कलाकारों की कथावाचन की शैली ने दर्शकों को बांधे रखा।
कलाकारों के नाटकीय अंदाज, भाव संप्रेषणीयता ने लोगों को कायल बना लिया। इस दौरान ‘ईदगाह’ में जहां हामिद की संवेदना दिखी, वहीं ‘ठाकुर का कुंआ’ में जोखू की तड़प और ‘पूस की रात’ में हल्कू की पीड़ा झलकी। बीएचयू के भोजपुरी अध्ययन केंद्र और प्रेमचंद के गांव लमही में लोक एवं जनजाति कला संस्कृति संस्था के तत्वावधान में यह प्रस्तुति की गई।
बचपन में दादी, काकी के मुंह से राजा-रानी के अलावा रामायण, महाभारत से जुड़ी कहानियां बच्चों के लिए प्रेरक हुआ करती थीं। अब बदले दौर में इस परंपरा का जब लोप होने लगा है, तब ‘रंगलीला’ की कथावाचन की यह नई शुरुआत रंगमंच के नए अध्याय के श्रीगणेश के रूप में सामने आई है।
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संस्था के कलाकार सृष्टि गुप्ता, सोनम वर्मा और प्रथम यादव ने तीन कहानियों ईदगाह, ठाकुर का कुआं और पूस की रात के नाट्य रूपांतरित वाचन में अपनी प्रभावी प्रस्तुतियों से लोगों को अंत तक बांधे रखा।
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कलाकारों के नाटकीय अंदाज, भाव संप्रेषणीयता ने लोगों को कायल बना लिया। इस दौरान ‘ईदगाह’ में जहां हामिद की संवेदना दिखी, वहीं ‘ठाकुर का कुंआ’ में जोखू की तड़प और ‘पूस की रात’ में हल्कू की पीड़ा झलकी। बीएचयू के भोजपुरी अध्ययन केंद्र और प्रेमचंद के गांव लमही में लोक एवं जनजाति कला संस्कृति संस्था के तत्वावधान में यह प्रस्तुति की गई।
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बचपन में दादी, काकी के मुंह से राजा-रानी के अलावा रामायण, महाभारत से जुड़ी कहानियां बच्चों के लिए प्रेरक हुआ करती थीं। अब बदले दौर में इस परंपरा का जब लोप होने लगा है, तब ‘रंगलीला’ की कथावाचन की यह नई शुरुआत रंगमंच के नए अध्याय के श्रीगणेश के रूप में सामने आई है।
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संस्था के कलाकार सृष्टि गुप्ता, सोनम वर्मा और प्रथम यादव ने तीन कहानियों ईदगाह, ठाकुर का कुआं और पूस की रात के नाट्य रूपांतरित वाचन में अपनी प्रभावी प्रस्तुतियों से लोगों को अंत तक बांधे रखा।
प्रेमचंद की पठनीयता और रोचकता में लगातार हो रही वृद्धि
आगरा के कलाकारों ने नाटकीय अंदाज में किया कथावाचन
- फोटो : अमर उजाला
कथावाचन की परिकल्पना, निर्माण एवं निर्देशन अनिल शुक्ल ने किया। सहायक निर्देशन राकेश यादव, दीपक सागर, काजल गुप्ता, अमित त्यागी, मेघा अग्रवाल ने और मंच परिकल्पना सुरेंद्र यादव की थी। कला अशोक कुमार और शृंगार मालविका यादव का था।
कथा वाचन के बाद हुई परिचर्चा में बीएचयू कला संकाय प्रमुख प्रो. कुमार पंकज ने कहा कि प्रेमचंद की पठनीयता और रोचकता में लगातार वृद्धि हो रही है, जो उनके महत्व को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि गोदान में होरी हर रोज मरता है क्योंकि वह किसान से मजदूर बनने का दंश झेल रहा था।
यही स्थिति पूस की रात में हलकू की है। आज जिस तरह किसानों के आत्महत्या की खबरें लगातार आ रही हैं, उससे प्रेमचंद की दूर दृष्टि का पता चलता है। रंगलीला के संयोजक अनिल शुक्ल ने कथावाचन की परिकल्पना, निर्माण और निर्देशन के बारे में चर्चा की।
बताया कि कथावाचन का कार्यक्रम देश के विभिन्न शहर में किया जा रहा है। उधर शाम पांच बजे मुंशी प्रेमचंद स्मारक लमही में सांस्कृतिक विभाग के तत्वावधान में मुंशी प्रेमचंद की तीन कहानियों का रंगलीला की ओर से कथावाचन किया गया। इस दौरान सैकड़ों लोगों की भीड़ थी।
कथा वाचन के बाद हुई परिचर्चा में बीएचयू कला संकाय प्रमुख प्रो. कुमार पंकज ने कहा कि प्रेमचंद की पठनीयता और रोचकता में लगातार वृद्धि हो रही है, जो उनके महत्व को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि गोदान में होरी हर रोज मरता है क्योंकि वह किसान से मजदूर बनने का दंश झेल रहा था।
यही स्थिति पूस की रात में हलकू की है। आज जिस तरह किसानों के आत्महत्या की खबरें लगातार आ रही हैं, उससे प्रेमचंद की दूर दृष्टि का पता चलता है। रंगलीला के संयोजक अनिल शुक्ल ने कथावाचन की परिकल्पना, निर्माण और निर्देशन के बारे में चर्चा की।
बताया कि कथावाचन का कार्यक्रम देश के विभिन्न शहर में किया जा रहा है। उधर शाम पांच बजे मुंशी प्रेमचंद स्मारक लमही में सांस्कृतिक विभाग के तत्वावधान में मुंशी प्रेमचंद की तीन कहानियों का रंगलीला की ओर से कथावाचन किया गया। इस दौरान सैकड़ों लोगों की भीड़ थी।