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मां उठाती थी इस्तेमाल किए मास्क, बच्चों ने बना डाला इलेक्ट्रिक कूड़ेदान
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कोरोना काल में मास्क इस्तेमाल करने के बाद लोग इसे इधर उधर फेंक देते हैं। इससे संक्रमण बढ़ने का खतरा रहता है। वहीं, 12 साल के दो बच्चों ने अपनी मां को संक्रमण से बचाने के लिए स्मार्ट डस्टबिन बनाया है। जो चंद मिनटों में मास्क को नष्ट कर देगा। आयुष और रेशमा जिस स्कूल में पढ़ाई करते हैं, उसी निजी स्कूल में उनकी मां दाई का काम करती हैं। मां को स्कूल में प्रयोग हो चुके मास्क को उठाता देख बच्चों ने इलेक्ट्रिक डस्टबिन बनाने की योजना पर काम किया। दोनों बच्चों ने छह दिन में 3500 रुपये की लागत से कूड़ेदान बना दिया। स्कूल की संस्थापक सुबिना चोपड़ा ने बताया कि स्कूल में एपीजे अब्दुल कलाम स्टार्टअप लैब है। जहां बच्चे विज्ञान के क्षेत्र में नए-नए आविष्कार करते हैं। कोरोना काल में बच्चों ने श्याम चौरसिया के निर्देशन में स्पेशल कोविड-19 मास्क किलिंग डस्टबिन बनाया है। इस इलेक्ट्रिक डस्टबिन में मास्क डालकर नष्ट किया जा सकता है।
क्या है खासियत
डस्टबिन मेटल की चादर से बना है। इसकी ऊंचाई करीब तीन फुट है। ऊपरी हिस्से में ढक्कन में सेंसर लगा है, जो किसी व्यक्ति के डस्टबिन के नजदीक आने पर ऑटोमेटिक ओपन हो जाता है। मास्क को अंदर डालते ही सेंसर 20 सेकेंड के लिए डस्टबिन में लगे हीटर को ऑन कर देता है। वहीं, 200 मास्क एकत्र होने पर भी हीटर ऑन हो जाता है। जो मास्क को नष्ट कर देता है।
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क्या है खासियत
डस्टबिन मेटल की चादर से बना है। इसकी ऊंचाई करीब तीन फुट है। ऊपरी हिस्से में ढक्कन में सेंसर लगा है, जो किसी व्यक्ति के डस्टबिन के नजदीक आने पर ऑटोमेटिक ओपन हो जाता है। मास्क को अंदर डालते ही सेंसर 20 सेकेंड के लिए डस्टबिन में लगे हीटर को ऑन कर देता है। वहीं, 200 मास्क एकत्र होने पर भी हीटर ऑन हो जाता है। जो मास्क को नष्ट कर देता है।
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