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स्वयंसेवक रखें सेवा का भाव, टिकट के बारे में सोचना भी बेकारः संघ प्रमुख
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 19 Feb 2018 11:50 AM IST
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संघ प्रमुख
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पूरे विश्व को जीने की कला देना संघ का स्वभाव है। संघ के सेवक केवल सेवा भाव रखें। उनको इसके बदले कोई सम्मान, पुष्प या आभार प्राप्त नहीं होगा। चुनाव के लिए टिकट के बारे में तो सोचना ही बेकार है। यह बातें सर संघ चालक मोहन भागवत ने रविवार को वाराणसी में आयोजित संघ समागम में कही। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में तकरीबन 25 हजार स्वयंसेवकों ने संघ प्रमुख के सामने संघ शक्ति का प्रदर्शन किया।
इसके बाद संघ प्रमुख ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि संघ का मुख्य उद्देश्य समाज को संगठित करना है। इसका मतलब भीड़ इकट्ठा करना नहीं, बल्कि एक ध्येय के लिए सभी का एकत्रित होना है। यह शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि एक लक्ष्य प्राप्ति के लिए संगठित का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि तीन अनिवार्य बाते हैं संगठन में, बगैर स्वार्थ, भय और मजबूरी के लोगों को जोड़ना।
आह्वान किया कि आइये ऐसे भारत का निर्माण करें जिसका सर्वत्र जय-जयकार हो। वहीं उन्होंने ये भी कहा कि हमारा मिशन भूभाग नहीं बल्कि हृदय जीतना है। मोहन भागवत ने कहा कि पिछले 200 वर्षों में जितने महापुरुष भारत में हुए उतने पुरी दुनिया में नहीं हुए। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि गांधी जीवन के बारे में विश्वास रखने में लोगों को कठिनाई होगी कि ऐसा व्यक्ति भी इस जगत में था।
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संघ प्रमुख ने कहा कि भारत भाग्य उदय के प्रयास में भी भारत भारत ही रहे इसकी आवश्यकता है। हमने किसी देश की संस्कृति सभ्यता को नष्ट नहीं किया, उनको ज्ञान, विज्ञान, गणित दिया। इससे पहले संस्कृत विश्वविद्यालय के मैदान में संघ का बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम संघ समागम रविवार को अपने नियत समय पर शुरू हो गया।
कार्यक्रम शुरू होने से पहले मुस्लिम महिलाओं ने संघ के गणवेषधारी स्वयंसेवकों पर पुष्पवर्षा कर के उनका स्वागत किया। भारत माता की जयघोष के बीच हजारों की संख्या में संघ कार्यकर्ता संस्कृत विश्वविद्यालय के मैदान में पहुंचे।
इसके बाद संघ प्रमुख ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि संघ का मुख्य उद्देश्य समाज को संगठित करना है। इसका मतलब भीड़ इकट्ठा करना नहीं, बल्कि एक ध्येय के लिए सभी का एकत्रित होना है। यह शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि एक लक्ष्य प्राप्ति के लिए संगठित का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि तीन अनिवार्य बाते हैं संगठन में, बगैर स्वार्थ, भय और मजबूरी के लोगों को जोड़ना।
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आह्वान किया कि आइये ऐसे भारत का निर्माण करें जिसका सर्वत्र जय-जयकार हो। वहीं उन्होंने ये भी कहा कि हमारा मिशन भूभाग नहीं बल्कि हृदय जीतना है। मोहन भागवत ने कहा कि पिछले 200 वर्षों में जितने महापुरुष भारत में हुए उतने पुरी दुनिया में नहीं हुए। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि गांधी जीवन के बारे में विश्वास रखने में लोगों को कठिनाई होगी कि ऐसा व्यक्ति भी इस जगत में था।
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संघ प्रमुख ने कहा कि भारत भाग्य उदय के प्रयास में भी भारत भारत ही रहे इसकी आवश्यकता है। हमने किसी देश की संस्कृति सभ्यता को नष्ट नहीं किया, उनको ज्ञान, विज्ञान, गणित दिया। इससे पहले संस्कृत विश्वविद्यालय के मैदान में संघ का बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम संघ समागम रविवार को अपने नियत समय पर शुरू हो गया।
कार्यक्रम शुरू होने से पहले मुस्लिम महिलाओं ने संघ के गणवेषधारी स्वयंसेवकों पर पुष्पवर्षा कर के उनका स्वागत किया। भारत माता की जयघोष के बीच हजारों की संख्या में संघ कार्यकर्ता संस्कृत विश्वविद्यालय के मैदान में पहुंचे।
पहले था संघ का विरोध लेकिन अब लोगों का बढ़ा भरोसा
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में संघ समागम
- फोटो : अमर उजाला
प्रार्थना और परेड के बाद संघ प्रमुख ने स्वयंसेवकों को सबोंधित किया। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र निर्माण में आगे बढ़ने को कहा। कहा कि संघ की शाखाओं का और विस्तार होगा। गांव गांव में संघ की शाखा लगेगी। भारत के गौरव को पुनः स्थापित करने के लिए बिना किसी भेद,धर्म,पंथ और जाति के आगे बढ़ना होगा।
सारे विश्व को जीने की कला देना संघ का स्वभाव है। मत भिन्न हो लेकिन समाज में फूट ना हो। भारत एक स्वभाव,सत्य का नाम है। हिन्दुस्तान हिन्दुओं का राष्ट्र है। हिंदुत्व ही भारत की पहचान है। उन्होंने कहा कि पहले संघ का काफी विरोध था लेकिन अब लोगों विश्वास बढ़ा है। कुछ लोग जो विरोध करते हैं वो भी हमारे ही हैं। इस नाते अब हमें काफी सजग रहना होगा।
उन्होंने कहा कि संघ के विचार और स्वरूप को समझना होगा। संघ प्रमुख ने कहा कि पड़ोस देश चीन से नोकझोंक जारी है लेकिन वहां की जनता का भारतीयों का सम्मान करती है। संघ प्रमुख ने कि हमे समाज को संगठित करना है। इसके लिए वातावरण पैदा करना होगा। यह तभी संभव है जब सामूहिकता हो। सम्पूर्ण हिन्दू समाज हमारा है।
भारत कोई एक जमीन टुकड़ा नहीं जिसे छोटा या बड़ा किया जा सके। यह एक ऐसा देश है जो सदियों से सौहार्द व संस्कृति का संदेश देता रहा है। हम आदर करते है लेकिन हमारी संस्कृति को कमजोरी न समझा जाए।
सारे विश्व को जीने की कला देना संघ का स्वभाव है। मत भिन्न हो लेकिन समाज में फूट ना हो। भारत एक स्वभाव,सत्य का नाम है। हिन्दुस्तान हिन्दुओं का राष्ट्र है। हिंदुत्व ही भारत की पहचान है। उन्होंने कहा कि पहले संघ का काफी विरोध था लेकिन अब लोगों विश्वास बढ़ा है। कुछ लोग जो विरोध करते हैं वो भी हमारे ही हैं। इस नाते अब हमें काफी सजग रहना होगा।
उन्होंने कहा कि संघ के विचार और स्वरूप को समझना होगा। संघ प्रमुख ने कहा कि पड़ोस देश चीन से नोकझोंक जारी है लेकिन वहां की जनता का भारतीयों का सम्मान करती है। संघ प्रमुख ने कि हमे समाज को संगठित करना है। इसके लिए वातावरण पैदा करना होगा। यह तभी संभव है जब सामूहिकता हो। सम्पूर्ण हिन्दू समाज हमारा है।
भारत कोई एक जमीन टुकड़ा नहीं जिसे छोटा या बड़ा किया जा सके। यह एक ऐसा देश है जो सदियों से सौहार्द व संस्कृति का संदेश देता रहा है। हम आदर करते है लेकिन हमारी संस्कृति को कमजोरी न समझा जाए।