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जीत के बाद बोले मिस एंड मिस्टर काशी, ऐसे सच हुआ सपना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 31 Oct 2018 04:09 PM IST
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मिस एंड मिस्टर काशी के विजेता
- फोटो : अमर उजाला
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शहर के हर कोने में लगने वाली होर्डिंग्स में चमकते, मुस्कुराते, अदाओं से लबरेज, बरबस अपनी ओर निगाह मोड़ने को मजबूर करते हसीन चेहरों को हर कोई देखता है और चाहता है कि उसके पास भी वह चमक हो।
यकीनन उनकी तरह बनने का सपना बहुत से युवा देखते हैं और उसे हासिल करने की कोशिश करते हैं। इन्हीं सपनों को पूरा करने की ताकत और जुनून कम ही लोगों में होती है। काशी के दो युवाओं ने भी ऐसा ही सपना देखा और उसे अपने जोश व जुनून के सहारे ही मुकाम तक पहुंचाकर दिखाया।
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यकीनन उनकी तरह बनने का सपना बहुत से युवा देखते हैं और उसे हासिल करने की कोशिश करते हैं। इन्हीं सपनों को पूरा करने की ताकत और जुनून कम ही लोगों में होती है। काशी के दो युवाओं ने भी ऐसा ही सपना देखा और उसे अपने जोश व जुनून के सहारे ही मुकाम तक पहुंचाकर दिखाया।
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मॉडलिंग के पैशन ने दिलाया मुकाम
मिस काशी अायुषी
- फोटो : अमर उजाला
मिस काशी का खिताब जीतने वाली 20 वर्षीय आयुषी की आंखों में भी ढेरों सपने हैं। उन सपनों को पूरा करने के लिए वो शिद्दत से मेहनत भी करती हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मॉडल नहीं, सुपर मॉडल बनना चाहती हैं।
काशी विद्यापीठ से बीकॉम की पढ़ाई कर चुकीं माधोपुर कोट गांव की एक चुलबुली लड़की ने बचपन से ही एक सुपर मॉडल बनने का सपना आंखों में बुन लिया था। पिता अनिल कुमार सिंह व मां नीलम सिंह का साथ मिला तो हौसला बढ़ा और अपने सपने को पूरा करने की ओर एक कदम बढ़ाया।
आयुषी कहती हैं कि मॉडलिंग मेरा पैशन है, लेकिन इसे पूरा करने में मेरी मां का प्रोत्साहन और मेरी आठ से नौ घंटों की कड़ी भी मेहनत भी शामिल है। शुरूआत में आयुषी को घरवालों से नकारात्मकता भी झेलनी पड़ी पर उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। आयुषी मौका मिलने पर फिल्मों में काम करना चाहती है।
काशी विद्यापीठ से बीकॉम की पढ़ाई कर चुकीं माधोपुर कोट गांव की एक चुलबुली लड़की ने बचपन से ही एक सुपर मॉडल बनने का सपना आंखों में बुन लिया था। पिता अनिल कुमार सिंह व मां नीलम सिंह का साथ मिला तो हौसला बढ़ा और अपने सपने को पूरा करने की ओर एक कदम बढ़ाया।
आयुषी कहती हैं कि मॉडलिंग मेरा पैशन है, लेकिन इसे पूरा करने में मेरी मां का प्रोत्साहन और मेरी आठ से नौ घंटों की कड़ी भी मेहनत भी शामिल है। शुरूआत में आयुषी को घरवालों से नकारात्मकता भी झेलनी पड़ी पर उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। आयुषी मौका मिलने पर फिल्मों में काम करना चाहती है।
उड़ान अभी बाकी है
मिस्टर काशी नितिन ठाकुर
- फोटो : अमर उजाला
खोल दे पंख मेरे अभी और उड़ान बाकी है, जमीं नहीं है मंजिल मेरी, अभी पूरा आसमान बाकी है, लहरों की खामोशी को समंदर की बेबसी मत समझ ऐ नादां, जितनी गहराई अंदर है, बाहर उतना तूफान बाकी है...। इन्हीं पंक्तियों को चरितार्थ करते हैं पांडेयपुर के 21 वर्षीय नितिन ठाकुर।
इन्होंने मॉडलिंग व फैशन की दुनिया में अपना नाम करने के लिए नितिन 10 से 12 घंटे का परिश्रम करते थे। साधारण से परिवार में पिता बृजेश व मां चंद्रकला ने घर के सबसे छोटे व लाडले बेटे को उच्चाधिकारी बनाने का ख्वाब देखा करती थीं लेकिन बचपन से ही नितिन की रुचि मॉडलिंग में थी।
बीकॉम की पढ़ाई करने के साथ नितिन जिम में भी अपना काफी समय देते हैं। नितिन का सपना एक सुपर मॉडल बनने का है जिससे उनके पिता ज्यादा खुश तो नहीं थे, लेकिन इस प्रतियोगिता को जीतने के बाद वो अपने बेटे से बहुत खुश हैं। इसके पहले भी नितिन वीआईएफडी प्रतियोगिता के भी विजेता रह चुके हैं।
इन्होंने मॉडलिंग व फैशन की दुनिया में अपना नाम करने के लिए नितिन 10 से 12 घंटे का परिश्रम करते थे। साधारण से परिवार में पिता बृजेश व मां चंद्रकला ने घर के सबसे छोटे व लाडले बेटे को उच्चाधिकारी बनाने का ख्वाब देखा करती थीं लेकिन बचपन से ही नितिन की रुचि मॉडलिंग में थी।
बीकॉम की पढ़ाई करने के साथ नितिन जिम में भी अपना काफी समय देते हैं। नितिन का सपना एक सुपर मॉडल बनने का है जिससे उनके पिता ज्यादा खुश तो नहीं थे, लेकिन इस प्रतियोगिता को जीतने के बाद वो अपने बेटे से बहुत खुश हैं। इसके पहले भी नितिन वीआईएफडी प्रतियोगिता के भी विजेता रह चुके हैं।