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शरारती शराबी बंदर 'कलुआ' को उम्रकैद, महिलाओं को रिझाता और बंदरिया करती थी निगरानी

Wed, 17 Jun 2020 04:57 AM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Wed, 17 Jun 2020 04:57 AM IST
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Mischievous monkey of Mirzapur sentenced for life imprisonment
पिंजड़े में बंद 'कलुआ' बंदर। - फोटो : अमर उजाला।

इंसानों को उम्रकैद और अन्य सजा दिए जाने की बात तो आपने सुनी होगी, पर आपको जानकार हैरानी होगी कि मिर्जापुर के एक बंदर को कानपुर के प्राणी उद्यान में उम्र भर रखा जाएगा। तीन वर्ष पूर्व मिर्जापुर जिले में आतंक का पर्याय बने बंदर की आदत में कोई सुधार न आने पर प्राणी उद्यान के विशेषज्ञों ने उसे ताउम्र पिंजरे में कैद रखने का फैसला लिया है।

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तीन वर्ष पूर्व मिर्जापुर जिले के शहर और कटरा कोतवाली क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों में बंदर आतंक का पर्याय बन गया था। वह सैकड़ों लोगों को काट चुका था। दिसंबर में उसका आतंक चरम पर पहुंच गया था। वह महिलाओं व  छोटी बच्चियों के चेहरे को काट कर भाग जाता था।
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कानपुर से वन विभाग की टीम ने एक जनवरी 2017 को बंदर को बंदूक से बेहोशी का इंजेक्शन लगाकर पकड़ा था। बंदर को पकड़ कर ले गई कानपुर प्राणी उद्यान की टीम ने अस्पताल परिसर में पिंजड़े में बंद रखा। मुंह व शरीर काला होने के कारण उसका नाम कलुआ रखा गया।

प्राणी उद्यान के अस्पताल में काफी समय तक उसे आइसोलेशन में रखा गया। पिंजड़े में कैद बंदर की हर हरकत और गतिविधियों पर डॉक्टर और विशेषज्ञ नजर रखे थे। लेकिन तीन वर्ष तक उसके व्यवहार में कोई नरमी या सुधार देखने को नहीं मिला। इसके चलते प्राणी उद्यान के डाक्टर और विशेषज्ञ ने उसे ताउम्र पिंजड़े में ही कैद रखने का फैसला लिया।

शराब पीता था बंदर, तांत्रिक ने था पाला
प्राणी उद्यान कानपुर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ मोहम्मद नासिर ने बताया कि बंदर के पकड़े जाने पर छानबीन में पता चला कि वह मांस खाने, शराब पीने का आदी था। उसे तांत्रिक ने पाला था। तांत्रिक उसे शराब देता था। तांत्रिक की मौत के बाद बंदर आजाद हुआ तो लोगों को जख्मी करने लगा। वह ज्यादातर बच्चियों और महिलाओं को काटता था।

बंदरिया करती थी निगरानी
कानपुर चिड़ियाघर से आये विशेषज्ञों की टीम ने दो दिन की मशक्कत के बाद किसी तरह बंदर को पिंजरे में कैद करने में कामयाबी हासिल की थी। पशु चिकित्सा अधिकारी मोहम्मद नासिर ने बताया कि कलुआ बंदर ने दूसरे गैंग पर हमला कर एक बंदरिया को अपना शागिर्द बना लिया था।

बंदरिया उसकी चौकीदारी करती थी। पहले दिन जब उसे पकड़ने की कोशिश की गई तो बंदरिया ने आवाज लगाकर उसे चौकन्ना कर दिया था। पहले दिन बंदर ने टीम को खूब छकाया। दूसरे दिन दो इंजेक्शन लगने के बाद वह बेहोश हुआ। इसके बाद टीम उसे पकड़कर पिंजरे में डालकर कानपुर चिड़ियाघर ले गई थी।

दहशत से बच्चे नहीं निकल रहे थे बाहर
दिसंबर 2017 में बंदर ने 30 से अधिक बच्चों को काटा था। बंदर सिर्फ छोटे बच्चों को निशाना बना रहा था। वह उनके चेहरे को काटकर जख्मी कर रहा था। हालत ये हो गई थी कि लोग बच्चों को घर से बाहर निकलने नहीं दे रहे थे। वह सड़क पर भीड़ होने के बावजूद सात वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं के चेहरे को जख्मी कर भाग जाता था। उसके हमले की शिकार बनीं अधिकांश बालिकाओं को प्लास्टिक सर्जरी करानी पड़ी।

पुरुषों पर था गुस्साता, महिलाओं को रिझाता
मिर्जापुर का कलुआ बंदर प्राणी उद्यान में बंद था। लोग उसे देखने आते थे। पशु चिकित्सा अधिकारी मोहम्मद नासिर ने बताया कि पुरुष के पास आने पर वह गुस्साता था, पर महिलाओं को दूर से ही इशारे कर पास बुलाता। महिलाएं जब पिंजड़े के पास आ जाती तो उन्हें काटने के लिए दौड़ता।
 

बंदर मांसाहारी व शराब पीता था। उसे शाकाहारी भोजन ही दिया जाता है। फिर भी तीन वर्ष में उसके अंदर बदलाव नहीं आया। उसके दांत बहुत धारदार है। दूसरे बंदर के साथ रखने पर ये उन्हें भी काट सकता है। इसलिए इसे छोड़ा नहीं जाएगा। पिंजरे में ही कैद रहेगा। - मोहम्मद नासिर, पशु चिकित्साधिकारी, प्राणी उद्यान कानपुर

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