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आपबीती: पैर कट गया, फिर भी दबे दो घायलों को निकाला, दो बहनों की शादी बाकी है; नवजात बेटे का खर्च सिर पर

Sat, 05 Oct 2024 06:19 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 05 Oct 2024 06:19 PM IST
सार

Varanasi Accident : दर्दनाक हादसे के बाद ट्रक की टक्कर से ट्रैक्टर और मिक्सर के परखचे उड़ गए थे। ट्रैक्टर के आगे के दोनों पहिये बाहर निकल गए थे। बाइक भी नाले में पड़ी थी। हाईवे की सेफ्टी रेलिंग भी करीब 10 मीटर तक टूटी थी। रोड लाइट का पोल भी टूट गया था। सड़क पर वाहन के घिसटने के निशान नजर आ रहे थे।

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Mirzapur Accident leg cut off two injured people rescued marriage of two sisters pending
घायल सभाजीत और गांव की गमगीन महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हादसे में सभाजीत के दायें पैर के घुटने से ठीक नीचे का हिस्सा कटकर अलग हो गया। लेकिन, फिर भी उसने घायलों की मदद की। सभाजीत ने बताया कि मेरे पास दो लोग जो घायल थे, वो दबे हुए थे। उनको घसीटकर किनारे लाया। 

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मेरा खून सड़क पर गिरता रहा, तो भी घायलों को खींचा। उन्हें बचाया। वे जिंदा हैं। कुल पांच लोग जिंदा हालत में अस्पताल पहुंचे। बाकियों की ट्रैक्टर और मशीन में दबकर मौत हो चुकी थी। ठेकेदार भी मर चुका था।
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सभाजीत अभी बीएचयू स्थित ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हैं। उनका दायां पैर घुटने के पास कटकर निकल चुका है। बेड पर लेटे थे तो पट्टी से खून रिस रहा था। वार्ड में मौजूद सभाजीत के मामा का लड़का कह रहा था कि डॉक्टर बहुत देर में आ रहे हैं। अब शाम को 4 बजे आएंगे।
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तभी सभाजीत कहता है कि घर पर मैं अकेला कमाने वाला था। दो बहनों की शादी हो चुकी है। दो बहनें अभी शादी करने को हैं। उसका पैसा कैसे जुटाऊंगा। एक महीने पहले बेटा हुआ था। घर पर खुशी का माहौल था, उसकी देखभाल कैसे होगी। पत्नी, दो बहन, माता-पिता और दो बेटा कुल सात लोग मेरी कमाई पर निर्भर थे। रोज 500 रुपये कमा लेता था। इसी से घर चल जाता था। अब पैर नहीं बचा तो फिर कैसे खर्च चलाएंगे। न काम करने लायक रहे और न चलने फिरने लायक। सरकार हमको 10 हजार महीना की कोई नौकरी दे देती, पैर नहीं है तो भी काम करूंगा। जीवन गुजर-बसर कर लूंगा।

गांव में हैं 20 मशीनें
सभाजीत ने बताया, बीती रात औराई में चार कमरे के मकान की ढलाई का काम खत्म करके कुल 16 लोग वापस मिर्जामुराद की ओर आ रहे थे। हमारे गांव में ढलाई की 15-20 मशीनें हैं। उसी में से एक मशीन लेकर औराई गए थे।

वहीं, वापस ट्रैक्टर से खींचकर ला रहे थे। कटका गांव के पास ट्रैक्टर रुकी। लिफ्ट यानी ढलाई के मालिक अभी तक नहीं आए थे। पैसे उन्हीं के पास होते हैं। पांच मिनट तक लिफ्ट मालिक का इंतजार किया गया। तभी, पीछे से आई ट्रक ने ट्रैक्टर पर जोरदार टक्कर मार दी।

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