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Interview: भारी उद्योग मंत्री बोले- बैटरी उत्पादन में भारत खत्म करेगा चीन का एकाधिकार, वाहनों की कीमतें घटेंगी

Mon, 01 Aug 2022 10:19 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 01 Aug 2022 10:19 AM IST
सार

केंद्रीय मंत्री डा. महेंद्र नाथ पांडेय ने भारी उद्योग मंत्रालय के प्रयासों पर रविवार को अमर उजाला कार्यालय में खुलकर बात की। 

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Minister for Heavy Industries mahendra nath pandey Interview amar ujala samvad China monopoly
अमर उजाला कार्यालय में भारी उद्योग मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बैटरी लिथियम आयन सेल में चीन का एकाधिकार है और दुनिया भर के लिए करीब 85 फीसदी उत्पादन वह अकेले करता है। भारी उद्योग मंत्रालय की पीएलआई स्कीम के तहत 50 गीगावॉट उत्पादन के लिए 18 हजार एक सौ करोड़ रुपये का निवेश हुआ है।

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पांच कंपनियां अलग-अलग क्षमता के आधार पर 2024 तक उत्पादन शुरू कर देंगी। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ लक्जरी गाड़ियों की कीमत भी घटेगी। केंद्रीय मंत्री डा. महेंद्र नाथ पांडेय ने भारी उद्योग मंत्रालय के प्रयासों पर रविवार को अमर उजाला कार्यालय में खुलकर बात की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश
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सवाल- बैटरी लिथियम आयन सेल की आपूर्ति कैसे होगी? देश में उत्पादन की क्या संभावनाएं हैं?
जवाब- भेल हैदराबाद ने कोयले से लिथियम बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में यह अहम काम है। इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत डीजल व पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले 30 से 40 फीसदी ज्यादा है। भारत में 128 गीगावाट बैटरी लिथियम आयन सेल के उत्पादन के लिए कंपनियां तैयार हैं। पीएलआई स्कीम में इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी के साथ ही इसके कंपोनेंट बनाने पर भी राहत है। हमारी उम्मीद के तीन गुना 75 हजार करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है। इससे अच्छे स्तर के साढ़े सात लाख रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

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सवाल- इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग की क्या व्यवस्था बनाई जा रही है? फास्ट चार्जिंग का काम कितना कारगर हुआ है?
जवाब- देश में सरकारी व निजी कंपनियों की ओर से पांच हजार चार्जिंग प्वाइंट बनाए गए हैं। कुछ सड़कों को चार्जिंग रोड बनाने की तैयारी है, इसमें दिल्ली जयपुर, मुंबई पुणे, दिल्ली अहमदाबाद सहित अन्य हाईवे चिन्हित हैं। इसके साथ ही 22 हजार पेट्रोल पंप पर कई मंत्रालय की संयुक्त पहल पर चार्जिंग प्वाइंट बनाए जा रहे हैं। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया फास्ट चार्जिंग के विकल्प तलाशे हैं।

सवाल- भेल की कोई नई योजना, जिससे रोजगार सृजन हो सके?
जवाब- भेल पहले थर्मल क्षेत्र से जुड़ा था, मगर वह वैकल्पिक चीजों पर आगे बढ़ रहा है। भेल में वंदे भारत ट्रेन के पार्ट्स, सैन्य शस्त्र, लोको इंजन बनाए जा रहे हैं। इसमें रोजगार की अपार संभावना है। हमारे मंत्रालय की खंडवा के नेपानगर में पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (पीएसयू) को इसी अगस्त में शुरू कराया जा रहा है। पुरानी सरकारों ने पीएसयू को माडर्न करने पर ध्यान नहीं दिया। जिन पीएसयू में संभावना हैं उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है और जो काम नहीं कर रहे हैं उनके खिलाफ कदम उठाया जा रहा है।

सवाल- इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को प्रोत्साहन देने के लिए फेम स्कीम चलाई जा रही है? इसका कितना असर है?
जवाब- मेट्रो सिटी में 100 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन की योजना है। अब तक देश में 42 लाख से ज्यादा दोपहिया वाहन सड़क पर हैं। आत्मनिर्भर भारत के तहत लक्जरी कारों के कंपोनेंट तैयार किए जाएंगे। इससे लक्जरी कारों की कीमत कम होगी। 

सवाल- पूर्वांचल में पलायन रोकने के लिए क्या प्रयास हो रहे हैं? इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए कोई योजना है?
जवाब- पलायन को रोकने के लिए कौशल विकास और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय की ओर से काम किया जा रहा है। बनारस की भेल इकाई में बेयरिंग के काम को आधुनिक करने की पहल हुई है। यहां बड़ी से बड़ी बेयरिंग बनाई जाएगी। भेल ने बुंदेलखंड एक्सप्रेस में जुड़ने का प्रस्ताव भी दिया है। 
 

केंद्रीय एजेंसियां स्वतंत्र, संवैधानिक अधिकारों के साथ कर रही हैं काम 

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में काला धन मिलने और विपक्ष के आरोपों के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी ईडी की पीठ थपथपाई है। बंगाल, महाराष्ट्र में जनता की शिकायतों के आधार पर ईडी ने जांच की। केंद्रीय एजेंसियां पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष तौर पर संवैधानिक अधिकारों के साथ काम कर रही हैं।

नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी पर ईडी की कार्यवाही पहले से चल रही है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर कांग्रेस सांसद अधीर रंजन की टिप्पणी को निंदनीय व अशोभनीय करार देते हुए कहा कि गरीब, सादगी और महिला को सर्वोच्च पद पर आना कांग्रेस पचा नहीं पा रही है। जानबूझकर उन्होंने ऐसा कृत्य किया, इसकी जिनती भर्त्सना की जाए वह कम है।
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