फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mini Nepal resides in PM Modi parliamentary constituency varanasi example of relationship between india nepal pashupatinath temple

पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में बसता है मिनी नेपाल, दोनों देशों के रिश्तों की मिसाल है नेपाली लकड़ियों से बना मंदिर

Sun, 19 Jul 2020 04:17 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 19 Jul 2020 04:17 PM IST
विज्ञापन
Mini Nepal resides in PM Modi parliamentary constituency varanasi example of relationship between india nepal pashupatinath temple
ललिता घाट पर बना पशुपतिनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

भारत और नेपाल के बीच सीमा को लेकर तनाव चल रहा है। दोनों देशों की दोस्ती में अब दरार दिख रही है। हालांकि नेपाल और भारत के रिश्ते काफी सालों से मजबूत रहे हैं, और नागरिकों से काफी अच्छा रिश्ता रहा है। इसका उदाहरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में देखने को मिलता है। शिव की नगरी काशी में ललिता घाट पर एक मिनी नेपाल बसता है।

विज्ञापन

विश्वनाथ कॉरिडोर के पहले पाथवे के प्रवेश द्वार जलासेन घाट के बगल में स्थित भगवान पशुपति का मंदिर नेपाल के लोगों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर का प्रतिरूप इस मंदिर में प्रवेश के बाद काशी में ही नेपाल का एहसास होगा। काशी में स्थित पशुपतिनाथ का ये मंदिर नेपाली मंदिर के नाम से भी मशहूर है। मंदिर के संरक्षण का काम भी नेपाल सरकार ही करती है।
विज्ञापन



काशी जहां मां गंगा के तट पर बसी है तो वहीं काठमांडू शहर बागमती नदी के किनारे विकसित हुआ। काशी में स्थित पशुपतिनाथ के मंदिर की नक्काशी और नेपाल के मंदिर की नक्काशी भी बिल्कुल हूबहू है। इसके अलावा दोनों मंदिरों की भव्यता भी एक जैसी ही है। काशी और नेपाल के पशुपतिनाथ के मंदिर में पूजापाठ भी नेपाली समुदाय के लोग ही करते हैं, वो भी बिल्कुल एक जैसी परंपरा के अनुसार।

विज्ञापन
विज्ञापन

Mini Nepal resides in PM Modi parliamentary constituency varanasi example of relationship between india nepal pashupatinath temple
पशुपतिनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

ललिता घाट स्थित यह मंदिर काशी के अन्य शिव मंदिरों से बिल्कुल अलग है। मंदिर का निर्माण काशी के अन्य शिवालयों की तरह पत्थर से नहीं बल्कि नेपाली लकड़ी के प्रयोग से हुआ है। नेपाली लकड़ी से निर्मित यह मंदिर लोगों को खूब आकर्षित करता है। मंदिर के भीतर गर्भगृह में पशुपतिनाथ के रूप में शिवलिंग स्थापित हैं। माना जाता है कि काशी के इस पशुपतिनाथ के दर्शन से वही फल प्राप्त होता है जो नेपाल के पशुपतिनाथ के दर्शन से होता है।

मंदिर का निर्माण नेपाल के राजा राणा बहादुर शाह ने करवाया था
पशुपतिनाथ मंदिर का निर्माण नेपाल के राजा राणा बहादुर साहा ने करवाया था। वाराणसी में मंदिर निर्माण के उद्देश्य से वो काशी आए और प्रवास किया। वर्ष 1800 से 1804 तक नेपाल के राजा राणा बहादुर शाह ने काशी में प्रवास किया। प्रवास के दौरान पूजा पाठ के लिए उन्होंने काशी में शिव मंदिर बनवाने का निर्णय लिया, वो भी नेपाल के वास्तु और शिल्प के अनुसार।

गंगा किनारे घाट की भूमि इस मंदिर के निर्माण के लिए चुनी और इसका निर्माण शुरू कराया। इसी दौरान 1806 में उनकी मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद उनके बेटे राजा राजेन्द्र वीर विक्रम साहा ने इस मंदिर का निर्माण 1843 में पूरा कराया। बीच में कई वर्षों तक इस मंदिर का निर्माण रुका था। यही वजह रही कि इस मंदिर के पूरा होने में चालीस साल का समय लगा।

नेपाल से मंगाई गई थीं लकड़ियां
मंदिर का निर्माण नेपाल से आए कारीगरों ने किया था। मंदिर निर्माण में प्रयोग की गई लकड़ियों को भी राजा ने नेपाल से ही मंगवाया था। कारीगरों ने मंदिर में लगाई गई लकड़ियों पर बेहतरीन नक्काशी को उभारा। मंदिर के चारों तरफ लकड़ी का दरवाजा होने के साथ भित्ती से लेकर छत तक सबकुछ लकड़ी से बनाया गया है। इन लकड़ियों पर विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां उभारी गई हैं। जो देखने में बेहद आकर्षित करती हैं। नेपाल के मंदिरों की तर्ज पर ही इस मंदिर के बाहर भी एक बड़ा सा घंटा भी है। वहीं दक्षिण द्वार के बाहर पत्थर का नंदी बैल भी है। पशुपतिनाथ का यह मंदिर सुबह काशी के अन्य मंदिरों  के समय ही खुलता और बंद होता है।

दिलचस्प है कहानी
वाराणसी में स्थित नेपाली मंदिर की कहानी बहुत ही दिलचस्प है और ये आपको सीधे 19वीं सदी के काल में ले जाती है। जैसा कि आपको नाम से ही पता चला रहा है, यह नेपाली मंदिर नेपाली वास्तुशैली में बना हुआ है। दिलचस्प बात है कि यह वाराणसी के सबसे पुराने शिव मंदिरों में से एक है। जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना, इस नेपाली मंदिर के प्रमुख देवता शिव भगवान हैं।

बहुत पहले नेपाल के राजा राणा बहादुर साहा ने वाराणसी में निर्वासन ले लिया। उन्होंने ही निश्चय किया कि वह नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थापित पशुपतिनाथ मंदिर की ही तरह हूबहू एक शिव मंदिर यहां भी बनवाएंगे। हालांकि उनके निर्वासन के दौरान मंदिर का निर्माण कार्य शुरू तो हो गया, पर इसे पूरा होने में पूरे 30 सालों का समय लगा। मंदिर के निर्माण कार्य के दौरान ही राजा राणा बहादुर शाह नेपाल को लौट गए जहां उनकी, उनके सौतेले भाई शेर बहादुर शाह द्वारा चाकू मार कर हत्या कर दी गई। उनकी मृत्यु के बाद मंदिर को उनके पुत्र राजेंद्र बिक्रम साहा ने समय सीमा के 20 साल बाद बनवा कर पूरा किया।

काठवाला है मंदिर 
जैसा कि यह मंदिर लकड़ी का बना हुआ है इसलिए इसे काठवाला मंदिर भी कहते हैं, काठ मतलब लकड़ी। यह मंदिर टैराकोटा, लकड़ी और पत्थर के इस्तेमाल से नेपाली वास्तुशैली में बनाया गया है। यह रचना नेपाली कारीगरों की उत्कृष्ट शिल्प कौशल को बखूबी दर्शाती है। इसलिए यह वाराणसी के कुछ खास मंदिरों में से एक है। इस कांठवाले मंदिर को छोटा खजुराहो भी कहा जाता है। इसे ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस लकड़ी के मंदिर में जो मूर्तियां खुदी हुई हैं वे खजुराहो मंदिर की तरह ही हैं। हालांकि यह रचना लकड़ी की बनी हुई है, पर फिर भी यह दीमक मुक्त है। यह मंदिर स्थानीय कारीगरों और राजगीरों की निपुणता को दर्शाता हुआ आज भी समय की कसौटी पर पूरी तरह खरा उतरा है। नेपाली मंदिर वाराणसी के ललिता घाट के पास ही स्थित है। ललिता घाट में शिव मंदिर के साथ-साथ ललिता गौरी मंदिर भी स्थापित है।

मंदिर के मुख्य पुजारी का कहना है कि नेपाल के नागरिकों के लिए काशी मुख्य धर्म स्थल है। नेपाली धर्म ग्रंथों में भी काशी को मुक्ति स्थल बताया गया है। यही कारण है कि सालों से यहां ये महिलाएं अपनी मौत का इंतजार कर रही हैं। वहीं भारत और नेपाल के बीच चल रहे तनाव के लेकर पुजारी का कहना था कि की हमारा संबंध मजबूत है। ये सारे तनाव एक टेबल पर खत्म हो जाएंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed