जब काशी आए थे मनमोहन... : सपरिवार देखी थी गंगा आरती, अजय राय बोले- 10 साल में बदल दी थी देश की सूरत; जानें खास
Varanasi News : पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह 2008 में काशी भी आए थे। अपने पूरे परिवार के साथ उन्होंने बाबा धाम में दर्शन-पूजन किया था। इसके पहले वे विख्यात गंगा आरती का हिस्सा भी बने थे। शुक्रवार को कांग्रेस सहित तमाम राजनीतिक लोगों ने मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि दी।
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पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह बतौर प्रधानमंत्री बनारस आए थे। 2008 में बनारस दौरे पर आए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने सपरिवार बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए थे। साथ ही गंगा आरती में शामिल हुए थे।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह सौम्यता, सरलता और सहजता की मिसाल थे। उनके जाने से राजनीतिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने दस साल में देश की सूरत बदल दी थी। आर्थिक मंदी के दौर में भी भारत मजबूती के साथ खड़ा रहा, यह उनकी ही सोच और नीतियों का परिणाम था। दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि, परिवारजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं।
महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री व भारत में आर्थिक सुधारों के पुरोधा डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की खबर से मन व्यथित है। उनका जाना बहुत ही दुखद है। डॉ. मनमोहन सिंह का स्नेह हमें भी प्राप्त हुआ था, जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। सन 2008 में उस वक्त जब वह सपरिवार काशी आए थे, उस समय हम युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष थे। उनका स्नेह गंगा आरती के दौरान प्राप्त हुआ था।
बीएचयू से 2008 में डॉ. मनमोहन सिंह को मिली थी मानद उपाधि
बीएचयू के 90वें दीक्षांत समारोह में 15 मार्च 2008 को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी गई थी। इस समारोह में उनके साथ उनकी पत्नी गुरशरण कौर भी मौजूद थीं। बतौर मुख्य अतिथि समारोह में शामिल होने आए डॉ. मनमोहन सिंह एक दिन पहले 14 मार्च को काशी आ गए थे। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया था। उन्होंने बुनकरों से भी मुलाकात की थी।
बीएचयू के एंफीथियेटर मैदान में 15 मार्च 2008 को 90वें दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के तत्कालीन चांसलर डॉ. कर्ण सिंह और कुलपति प्रो. पंजाब सिंह भी मंच पर उनके साथ मौजूद थे। समारोह में डॉ. मनमोहन सिंह ने विश्वविद्यालय की परंपरा को महामना का विजन बताया था। यह भी कहा था कि विश्वविद्यालय ऐसा है, जहां एक ही परिसर में सारे विषयों की पढ़ाई होती है। पहला प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज भी बीएचयू में बना।
बीएचयू छात्र परिषद के पूर्व महासचिव और डीएवी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विकास सिंह ने बताया कि जब मनमोहन सिंह ने हिंदी में अपना संबोधन शुरू किया तो हर कोई स्तब्ध रह गया था। करीब 45 मिनट तक धाराप्रवाह हिंदी बोलते रहे।
दीक्षांत समारोह से पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 14 मार्च को बुनकरों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। साथ ही काशी में बुनकरी से जुड़ी जानकारी हासिल की थी।