कोर्ट का फैसला: किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की कैद, बनारस से अगवा कर ले गया था गोवा
विशेष लोक अभियोजक के मुताबिक वादी के रिश्तेदार की पुत्री नौ अक्तूबर 2018 की रात वाराणसी के मंडुवाडीह से लापता हो गई थी। किशोरी ने बयान दिया कि धमकी देकर अभियुक्त उसे ट्रेन से गोवा ले गया था।
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विशेष न्यायाधीश पॉक्सो राजीव कुमार की अदालत ने किशोरी को अपहृत कर गोवा ले जाकर दुराचार के मामले में अभियुक्त पंकज केशरी को दोषी पाते हुए 20 वर्ष की कड़ी कैद और 17 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। विशेष लोक अभियोजक संतोष सिंह के मुताबिक वादी के साढू की पुत्री 28 सितंबर 2018 को वाराणसी के मंडुवाडीह स्थित वादी के घर आई थी।
वह नौ अक्तूबर की रात 11 बजे घर से लापता हो गई। किशोरी ने बयान दिया कि धमकी देकर अभियुक्त उसे ट्रेन से गोवा ले गया था। वहां एक होटल के कमरे में शादी की बात कहते हुए दुष्कर्म किया। जब मौसा सहित अन्य परिजन पुलिस के साथ गोवा पहुंची तब आरोपी वहीं छोड़कर भाग गया और पुलिस मंडुवाडीह थाने लेकर आई। कोर्ट ने आठ गवाहों के बयान के बाद अभियुक्त को दोषी पाया और सजा सुनाई। पंकज केशरी को दोषी पाते हुए 20 साल की सजा और 17 हजार जुर्माने से दंडित किया
बच्ची के साथ दुष्कर्म के प्रयास में आरोपी को पांच साल की कैद
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी की कोर्ट ने बच्ची से दुष्कर्म के प्रयास मामले में आरोपी अरविंद को पांच साल की कड़ी कैद व सात हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने में से 6 हजार पीड़िता को बतौर क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है।
विशेष लोक अभियोजक मधुकर उपाध्याय के मुताबिक बच्ची अपने मामा की शादी में शामिल होने बड़ागांव थाना क्षेत्र स्थित घर आयी थी। चार जुलाई 2015 की रात में आरोपी अरविंद ने दुष्कर्म का प्रयास किया। शोर मचने पर आरोपी पकड़ा गया।
दर्ज प्राथमिकी में कहा गया कि इस बीच बस्ती के दूसरी तरफ से आये लोगों ने जानकारी दी कि एक और चार वर्षीय बच्ची के संग दुष्कर्म किया गया और वह बेहोश हालत में पड़ी मिली है। आरोपी अरविंद की पिटाई के बाद पुलिस को सौंप दिया गया था।
बीएचयू प्रोफेसर के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी
बीएचयू समाज शास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. अरविंद कुमार जोशी के खिलाफ दर्ज एससी एसटी के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी की अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किया है। अदालत ने यह आदेश तलब किए जाने के बावजूद हाजिर नहीं होने पर जारी किया।
यूनिवर्सिटी के ही असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनोज वर्मा ने 28 जनवरी 2019 को दर्ज कराई गई प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि जब वह क्लास ले रहे थे तब विभागाध्यक्ष के कमरे में पहले से बैठे अज्ञात 10-15 छात्रों ने जतिसूचक शब्दों के बीच हमलाकर कर दिया। उन्होंने घटना डॉ. जोशी की साजिश में किये जाने का आरोप लगाया। मामले की विवेचना क्षेत्राधिकारी सत्येन्द्र तिवारी ने की और डॉ. जोशी समेत पांच के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया और 10 के खिलाफ विवेचना जारी रही।
इस बीच प्रकरण में हाइकोर्ट ने 20 जनवरी 20 को स्थगन आदेश दिया था। इस बीच छह माह बाद स्थगन आदेश के स्वत: समाप्त माने जाने संबंधी हाइकोर्ट के आदेश के बाद अदालत ने आरोपी जोशी को सम्मन के जरिये तलब किया, नहीं आने पर कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी करते हुए सुनवाई की तिथि 6 अक्तूूबर की तिथि नियत कर दी।