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Mahavir Jayanti: काशी में 12 साल के कठोर तप के बाद तीर्थंकर बने महावीर स्वामी, 30 साल की उम्र में छोड़ा था घर
Sun, 21 Apr 2024 03:57 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Sun, 21 Apr 2024 03:57 PM IST
सार
भगवान महावीर ने 30 साल की उम्र में अपना घर-परिवार त्याग दिया और जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ से दीक्षा ली। 12 साल की कठोर तपस्या के बाद उन्हें 573 ईसा पूर्व में तीर्थकर का दर्जा मिला।
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आरसी जैन, राकेश जैन, विनोद जैन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चार जैन तीर्थंकरों की जन्मस्थली काशी में जैन समाज की ओर से महावीर जयंती मनाई जा रही है। वर्धमान को महावीर स्वामी बनाने में काशी का योगदान सबसे महत्वपूर्ण है। काशी में जन्मे 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ ने ही महावीर स्वामी को दीक्षा दी थी। 12 साल उन्होंने कठोर तपस्या की थी। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम से भी उनका नाता रहा है।
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श्री दिगंबर जैन समाज के उपाध्यक्ष राकेश जैन ने बताया कि भगवान महावीर ने 30 साल की उम्र में अपना घर-परिवार त्याग दिया और जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ से दीक्षा ली। 12 साल की कठोर तपस्या के बाद उन्हें 573 ईसा पूर्व में तीर्थकर का दर्जा मिला।
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उनका संबंध भगवान श्रीराम से भी रहा है। श्रीराम और महावीर स्वामी दोनों ही सूर्यवंशी थे। महावीर स्वामी का जन्म इक्ष्वाकु राजवंश में राजा सिद्धार्थ और महारानी त्रिशला के यहां हुआ था। चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को महावीर स्वामी का जन्म हुआ था। जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर की जयंती पर 21 अप्रैल को जैन समाज के लोग पूजा और अनुष्ठान करेंगे।
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क्या कहते हैं जानकार
जैन धर्म की मान्यता है कि 12 साल के कठोर मौन तप-जप के बाद भगवान महावीर ने अपनी इंद्रियों पर पूरी तरह विजय प्राप्त कर ली थी। निडर, सहनशील और अहिंसक होने के कारण उनका नाम महावीर पड़ा। -आरसी जैन
बिहारी लाल दिगंबर जैन मंदिर मैदागिन से शोभायात्रा निकलेगी और ग्वालदास साहू लेन स्थित पंचायती जैन मंदिर पहुंचेगी। विश्व शांति के लिए मंदिर में पूजन अभिषेक का कार्यक्रम संपन्न होगा। - राकेश जैन
जैन समाज इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। भगवान महावीर का संदेश जियो और जीने दो को आत्मसात करते हुए महावीर जयंती के दिन 11 सौ पंछियों को मुक्त कराया जाएगा। - विनोद जैन