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काशी विद्यापीठ: छूटी हुई प्रैक्टिकल परीक्षा के लिए 500 रुपये देना होगा शुल्क, विद्यार्थियों को मिली राहत
Fri, 02 Feb 2024 02:32 PM IST
प्रगति चंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: प्रगति चंद
Updated Fri, 02 Feb 2024 02:32 PM IST
सार
छूटी हुई प्रैक्टिकल परीक्षाओं के लिए प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों को अब सिर्फ पांच सौ रुपये ही शुल्क देने होंगे। वहीं अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए एक विषय के लिए दो हजार और पांच से अधिक के लिए पांच हजार देने होंगे। यह निर्णय महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की परीक्षा समिति की बैठक में हुआ।
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ
- फोटो : file photo
विस्तार
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने स्नातक और स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं को बड़ी राहत दी है। छूटी हुई प्रैक्टिकल परीक्षाओं के लिए प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों को अब सिर्फ पांच सौ रुपये ही शुल्क देने होंगे। पहले विद्यार्थियों को प्रति विषय दो हजार रुपये का शुल्क देना पड़ता था। छात्रों के हित में विश्वविद्यालय की परीक्षा समिति ने यह निर्णय लिया है।
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बृहस्पतिवार को कुलपति प्रो. एके त्यागी की अध्यक्षता में हुई बैठक में छात्रहित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। प्रो. त्यागी ने बताया कि छात्र-छात्राओं के प्रैक्टिकल परीक्षा में अनुपस्थित होने पर दोबारा परीक्षा के लिए दो हजार रुपये शुल्क देने पड़ते थे। कई छात्र ऐसे थे जिनके आठ से दस प्रैक्टिकल की परीक्षाएं छूट गई थीं।
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छात्रों के अनुरोध पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह निर्णय लिया है कि स्नातक प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों के लिए प्रैक्टिकल परीक्षा में अनुपस्थित रहने पर सामान्य शुल्क देकर ही दोबारा परीक्षा कराई जाएगी। वहीं, अंतिम वर्ष के छात्रों को दो हजार रुपये शुल्क देने होंगे। पांच से अधिक विषय के प्रैक्टिकल में अनुपस्थित होने पर अधिकतम पांच हजार रुपये ही शुल्क देना होगा।
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शोध प्रोजेक्ट में होगा आंतरिक मूल्यांकन
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं की सेमेस्टर परीक्षाओं के शोध प्रोजेक्ट में अब आंतरिक मूल्यांकन किया जाएगा। वर्तमान सत्र से पीजी के प्रथम और स्नातक के प्रथम और द्वितीय वर्ष में यह व्यवस्था लागू होगी। वहीं अंतिम वर्ष के लिए वाह्य मूल्यांकन होगा और बाहर से परीक्षक आएंगे।