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वो स्थान, जहां महर्षि वाल्मीकि को मिली थी रामायण लिखने की प्रेरणा, वनवास के समय प्रभु श्री राम रुके थे यहीं

Tue, 28 Apr 2020 01:09 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़ Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 28 Apr 2020 01:09 PM IST
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Maharshi Valmiki got inspiration to write Ramayana in tamsa river azamgarh shree ram
शहर के रामगढ़ स्थित बड़ा गणेश मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

आजमगढ़ जिले में तमसा नदी के किनारे जहां मंदिरों की श्रृंखला थी, वहां रति क्रीड़ा में लीन क्रोंच पक्षियों का बहेलिया द्वारा शिकार को देख महर्षि वाल्मीकि ने ऐसा काव्य लिखा कि स्वयं भगवान ब्रह्मा ने उन्हें रामायण लिखने की प्रेरणा दे दी। इसे प्रेरणा से संबल पाकर महर्षि वाल्मीकि ने रामायण जैसा काव्य लिख डाला है।

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प्रभु श्रीराम ने वनवास के दौरान एक रात इसी स्थान पर गुजारी थी। यहां से वो भारद्वाज ऋषि के आश्रम प्रयागराज पहुंचे। उनके आदेश के बाद चित्रकूट के लिए रवाना हुए। इन तथ्यों का जिक्र वाल्मीकि की रामायण में भी मिलता है और माना जाता है कि तमसा किनारे का ये स्थान जिले के शहर के बीच रामघाट स्थित बड़ा मंदिर हैं।
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शहर के बीचोंबीच स्थित बड़ा गणेश मंदिर में लोगों की असीम आस्था है। मंदिर में विराजमान भगवान गणेश की दक्षिणमुखी प्रतिमा के बारे में मान्यता है कि इसे दर्शन मात्र से मुरादें पूरी होती हैं। ये भी मान्यता है कि मंदिर की स्थापना वनवास काल में प्रभु श्रीराम के हाथों से ही हुई थी।

कई पीढ़ियों से मंदिर की सेवा करने वाले परिवार से जुड़े मंदिर के महंत राजेश मिश्रा ने बताया कि तमसा नदी का उदमगम अकबरपुर के ताल से है और ये बलिया में गंगा में विलीन हो जाती है। वाल्मिकि रामायण से प्रथम खंड के बाल सर्ग के पेज-32 पर इसका जिक्र मिलता है। इसमें बताया गया है कि महर्षि वाल्मीकि अपने शिष्य के साथ तमसा नदी के किनारे ऐसे स्थान पर (जहां मंदिरों की श्रृंखला थी) संध्या वंदन किया था।

इस दौरान एक बहेलिए ने रति क्रीड़ा में लीन क्रोंच पक्षी का वध कर दिया था। महर्षि वाल्मीकि ने इस पर एक काव्य लिखा था। इस काव्य को देख भगवान ब्रह्मा ने महर्षि की प्रसंशा की और उन्होंने रामायण लिखने की प्रेरणा दी। इसके बाद उन्होंने वाल्मिकि रामायण लिखी।

महंत राजेश मिश्रा ने बताया कि ये भी कहा जाता है कि प्रभु श्रीराम ने वनवास के दौरान अपनी एक रात यहां गुजारी थी। इसके बाद सभी को सोता छोड़ वो अगले दिन प्रयागराज स्थित महर्षि भारद्वाज के आश्रम पहुंचे। वहां उनसे आज्ञा लेकर चित्रकूट पहुंचे और वहां वनवास के 11 साल गुजारे।

वाल्मीकि रामायाण में तमसा किनारे जिस मंदिरों की श्रंखला का जिक्र है, उसे रामघाट स्थित बड़ा गणेश मंदिर को माना जाता है। शहर के तीन ओर से बहने वाली तमसा नदी के किनारे आज भी ये मंदिर और घाट स्थित हैं। ये भी कहा जाता है कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम जहां, जहां रुके थे, उन्हें उनके नाम से जाना जाता है।

इसलिए इसका भी नाम रामघाट है। तमसा नदी पहले मंदिर के किनारे से होकर बहती थी। इसके बारे में भी साक्ष्य है। बताया जाता है कि शहर में आने वाली बाढ़ के मद्देनजर अंग्रेजी शासन काल में नदी की धारा को मोड़ा गया था। इसके बाद से नदी शहर के किनारे-किनारे बहती है। नदी का रास्ता बदलने के बाद इस भूमि पर अब कई निर्माण खड़े हो गए हैं।

प्रत्येक बुधवार को होता है भंडारा
मंहत राजेश मिश्रा का कहना है कि जब तक अन्नपूर्णा सिद्धी न की जाए, तब कर भक्ति अधूरी रहती है। इसलिए मंदिर में प्रत्येक बुधवार को जनसहयोग से भंडारा किया जाता है। इसमें हजारों से लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं।

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