फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Maa Kushmanda Shringar flute players together played mountain tunes listeners became fans of flute and singing

मां कुष्मांडा शृंगार: एक साथ 15 बांसुरी वादकों ने मां को सुनाई पहाड़ी धुन, बांसुरी और गायन के मुरीद हुए श्रोता

Sat, 23 Aug 2025 05:52 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 23 Aug 2025 05:52 AM IST
सार

काशी के मां कुष्मांडा मंदिर परिसर में आयोजित संगीत समारोह में कलाकारों अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति दे रहे हैं। भक्त के रूप में श्रोताओं की उपस्थिति कलाकारों को मनोबल बढ़ा रही है।

विज्ञापन
Maa Kushmanda Shringar flute players together played mountain tunes listeners became fans of flute and singing
मां कुष्मांडा मंदिर में गायन प्रस्तुत करतीं कलाकार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Varanasi News: मां कुष्मांडा शृंगार एवं संगीत समारोह के तीसरे दिन कलाकार मां की स्वराधना कर रहे थे, तो वहीं आसमान से इंद्रदेव भी बारिश की फुहार से मां का अभिषेक कर रहे थे। बारिश के बीच कलाकारों की प्रस्तुतियां होती रही तो दर्शक भी एक चित्त हो टस से मस नहीं हुए। शुक्रवार को तीसरी निशा बेहद खास रही। 

विज्ञापन


दिल्ली से आये विख्यात बांसुरी वादक पं. राजेन्द्र प्रसन्ना ने एक साथ 15 बांसुरी वादकों के साथ मां को पहाड़ी धुन सुनाई तो समूचा प्रांगण हर-हर महादेव के उदघोष से गूंज उठा। बांसुरी के सुरों का सम्मोहन ऐसा था कि बरसात के बीच श्रोता भी दम साधे हुए सुरों से खुद को एकाकार कर रहे थे।
विज्ञापन


शुक्रवार को तीसरी निशा की पहली प्रस्तुति मां कूष्मांडा के समक्ष कोलकाता से आई शोमा मण्डल के ओडिसी नृत्य की रही। उन्होंने दुर्गा वंदन और देवी कृति से मां को भावांजलि अर्पित की। दूसरी प्रस्तुति वाराणसी के पं. माता प्रसाद मिश्रा एवं रविशंकर मिश्रा के कथक नृत्य की रही। 

विज्ञापन
विज्ञापन

कलाकारों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुति

उन्होंने घुंघरुओं की झंकार से बारिश की बूंदों और घोड़े की चाल तथा तबले के साथ घुंघरू की जुगलबन्दी से सबको मोहित कर दिया। उन्होंने सबसे पहले शिव वंदना की फिर पारंपरिक कथक उठान, आमद, टुकड़ा परन आदि प्रस्तुत किया। 

इसके बाद 18 मात्रा में लक्ष्मी ताल की प्राचीन बंदिश पर कथक प्रस्तुत किया तो समूचा मंदिर प्रांगण ही तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अंत में देवी स्तुति से समापन किया। उनके साथ तबले पर उदयशंकर एवं राजकुमार मिश्रा, सारंगी पर अंकित मिश्रा एवं हारमोनियम सह गायन पर शक्ति मिश्रा रहे।

तीसरी प्रस्तुति दिल्ली से आई विदुषी लावण्या सुंदरम के गायन की रही। उन्होंने सबसे पहले राग बागेश्री में विलंबित मध्य लय एक ताल में और द्रुत तीन ताल में निबद्ध बड़ा ख्याल 'कौन गत भईल पिया न पूछे एकहु बार' और छोटा ख्याल 'सजनवा हरि गुण गाओ' सुनाया। 

मंत्रमुग्ध हुए श्रोतागण

इसके बाद 'धाय धाय गर लाओ' की बंदिश सुनाया। अंत मे मराठी अभंग 'आईका नारायणा' सुनाकर समापन किया। उनके साथ तबले पर पं. कुबेरनाथ मिश्र एवं हारमोनियम पर पंकज शर्मा संगत पर रहे। चौथी प्रस्तुति दिल्ली से आये प्रख्यात बांसुरी वादक राजेन्द्र प्रसन्ना एवं राजेश प्रसन्ना की रही। 

उन्होंने राग झिंझौटी में बड़ा ख्याल विलंबित एक ताल की बंदिश सुनाई, उसके बाद द्रुत तीन ताल में बंदिश सुनाई। अंत मे 15 बांसुरी वादकों ने एक साथ मां को पहाड़ी धुन सुनाया तो हर कोई मंत्रमुग्ध होकर रह गया। तबले पर अभिषेक मिश्र ने संगत की। पांचवी प्रस्तुति प्रो.संगीता पण्डित के शास्त्रीय गायन की रही। उन्होंने सबसे पहले बनारस घराने की प्रसिद्ध राग दुर्गा में निबद्ध बंदिश 'जय दुर्गे मातु भवानी' सुनाया। 

इसके बाद राग मारवाह में बंदिश 'जगत जननी जगदम्ब भवानी' और अंत मे मां काली के भजन से समापन किया। उनके साथ तबले पर अभिनव नारायण आचार्य, हारमोनियम पर पंकज शर्मा एवं सह गायन शमयीता पांजा ने साथ दिया। कलाकारों का स्वागत महंत राजनाथ दुबे एवं संयोजक पं. विश्वजीत दुबे ने किया। संचालन सोनू झा ने किया।

जवा हार से सजी मां कूष्मांडा, हुआ राजर्षि शृंगार
महोत्सव के तीसरे दिन भगवती मां कूष्मांडा का सोने के जवा हार (गुड़हल की कली) से दिव्य राजर्षि शृगार हुआ। पंचामृत स्नान के बाद मां को चटख लाल बनारसी साड़ी से सुसज्जित कर कोलकाता से आये गुलाब, कतुआ, बेला, रजनीगन्धा से सजाया गया। सायंकाल छह बजे शृगार के बाद मंदिर का पट श्रद्धालुओं के लिए खोल गया।

मां की दिव्य स्वर्णमयी छवि का दर्शन करने श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। भक्तों में प्रसाद स्वरूप पांच कुंतल मेवे का हलवा वितरित किया गया। श्रृंगार पं. कौशलपति द्विवेदी एवं आरती पं. किशन दूबे ने उतारी। संजय दुबे, विकास दुबे एवं किशन दुबे ने सहयोग किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed