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अन्न-धन की देवी मां अन्नपूर्णेश्वरी के दरबार में बंटा खजाना, भक्तों ने सुख-सौभाग्य के लिए मांगी मन्नत

Fri, 13 Nov 2020 09:37 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Fri, 13 Nov 2020 09:37 AM IST
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Maa Annapurna giving blessing of treasures there devotees on Dhanteras in varanasi
मां अन्नपूर्णा और काशी विश्वनाथ का मनोहारी स्वरूप - फोटो : अमर उजाला

अन्न-धन की देवी मां अन्नपूर्णेश्वरी के दरबार में धनतेरस पर भक्तों ने सुख सौभाग्य की गुहार लगाई। माता के दरबार से अन्न-धन का खजाना बंटा तो पूरा मंदिर परिसर मां के जयकारे से गूंजता रहा। मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन कर भक्त निहाल हुए और माता से श्रीवृद्धि के साथ ही कोरोना के खात्मे की भी कामना की।

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काशी विश्वनाथ के आंगन में विराजमान मां अन्नपूर्णा का दरबार गुरुवार को मंगला आरती के बाद सुबह छह बजे से भक्तों के लिए खोल दिया गया। मां अन्नपूर्णा के स्वर्णिम स्वरूप के दर्शन करते हुए भक्तों ने अन्न धन का खजाना भी प्रसाद में पाया।
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डॉ. रामनारायण द्विवेदी के आचार्यत्व में अर्चक सत्यनारायण मिश्र ने पूजन किया। मंदिर के महंत रामेश्वरपुरी ने माता की भव्य आरती उतारी। इस दौरान 21 डमरू दल की ध्वनि से माता का दरबार गूंज उठा। पूजा के यजमान भाजपा के सुनील ओझा रहे।
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तीन दिनों यानी अन्नकूट तक भोर में चार बजे से रात ग्यारह बजे तक माता के दर्शन होंगे। माता के दर्शन के लिए भक्त देर रात से ही कतारबद्ध हो गए थे। एक लाइन गोदौलिया तो दूसरी लाइन चौक थाने को छू रही थी। जैसे-जैसे दर्शन का समय नजदीक आ रहा था पूरा परिक्षेत्र मां के जयकारे से गुलजार हो रहा था। दो बजे तक करीब 18 हजार लोग दर्शन कर चुके थे।

वर्ष में सिर्फ चार दिन होता है दर्शन
मान्यता है कि काशी नगरी के पालन-पोषण के लिए देवाधिदेव ने मां अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी। मंदिर के गर्भगृह में मां अन्नपूर्णा की ममतामयी छवि युक्त ठोस स्वर्ण प्रतिमा कमलासन पर विराजमान और रजत शिल्प में ढले भगवान शिव की झोली में अन्नदान की मुद्रा में हैं।

Maa Annapurna giving blessing of treasures there devotees on Dhanteras in varanasi
भक्तों को खजाना वितरित करते महंत रामेश्वर पुरी - फोटो : अमर उजाला

दायीं ओर मां लक्ष्मी और बायीं तरफ भूदेवी का स्वर्ण विग्रह है। इस दरबार के दर्शन वर्ष में सिर्फ चार दिन धनतेरस से अन्नकूट तक ही होते हैं। इसमें पहले दिन धान का लावा, बतासा के साथ मां के खजाने का सिक्का प्रसाद स्वरूप वितरित किए जाने की पुरानी परंपरा है।

कोरोना संक्रमण के कारण कम रही भक्तों की संख्या
कोरोना संक्रमण के कारण मां अन्नपूर्णा के दरबार में इस बार भक्तों की संख्या बेहद कम रही। दोपहर 12 बजे के बाद बैरिकेडिंग पूरी तरह से खाली हो गई थी। स्थानीय और आसपास के जिलों के ही भक्त इस बार माता के दर्शन के लिए आए थे। हालांकि बुधवार की शाम से ही भक्त कतार में लग गए थे, लेकिन 11 बजे तक बांसफाटक, चौक क्षेत्र में लगाई गई बैरिकेडिंग पूरी तरह से खाली हो गई। बस इक्का-दुक्का भक्त ही दर्शन करने पहुंच रहे थे।

बैरिकेडिंग में भूले सोशल डिस्टेंसिंग
माता के दर्शन के लिए भक्त उत्साह में बैरिकेडिंग में शारीरिक दूरी का पालन करना भूल गए। सुरक्षा कर्मियों और वालंटियर के समझाने के बाद भक्तों ने दूरी बनाई। वहीं, मंदिर में शारीरिक दूरी और थर्मल स्कैनिंग के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा था।

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