चंद्रग्रहण: धाम-कालभैरव 2.32 घंटे, 10 घंटे बंद रहा संकट मोचन मंदिर; शयन आरती तक लाइन लगी रही
Chandragrahan: चंद्रग्रहण के दाैरान काशी के सभी मठ-मंदिरों के कपाट बंद हो गए थे।थे। ग्रहण हटने के बाद लोगों ने गंगा स्नान किया। इसके बाद मंदिरों में दर्शन-पूजन किए। इस दाैरान सुरक्षा व्यवस्था तगड़ी रही।
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चंद्रग्रहण मंगलवार को शाम 5:59 बजे से लगा और 48 मिनट तक दिखा। इस दौरान शहर के सभी मंदिर बंद रहे। सबसे कम श्री काशी विश्वनाथ और कालभैरव मंदिर 2:32 घंटे बंद था। जबकि संकट मोचन मंदिर करीब 10 घंटे बंद रहा।
ग्रहण के बाद इन मंदिरों के पट खुलते ही दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। शयन आरती तक लाइन लगी रही। संकट मोचन में मंगलवार होने के कारण रात में करीब 12 बजे तक दर्शन का सिलसिला चला। यह ग्रहण महाभारत कालीन था।
साल के पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगा था। इसके 13 दिन बाद मंगलवार को चंद्रग्रहण लगा। ऐसा संयोग महाभारत काल के बाद आया है। उस समय भी फाल्गुन माह में सूर्यग्रहण के बाद अग्नि पंचक योग में चंद्रग्रहण लगा था। जो दुनिया के लिए अमंगलकारी है। भारत में चंद्रग्रहण शाम 5:59 बजे से 6:47 बजे तक दिखा। ग्रहण के नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू हो गया।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का गर्भगृह ग्रहण के 1:30 घंटे यानी 4:29 बजे पहले बंद हो गया। ग्रहण खत्म होने के करीब आधे घंटे बाद 7:15 बजे दर्शन के लिए पट खुला। इसके बाद शयन आरती तक दर्शन के लिए भीड़ थी। कालभैरव मंदिर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के समय पर ही बंद और खुला। 51 शक्तिपीठों में एक विशालाक्षी मंदिर दोपहर 3:30 बजे, मां अन्नपूर्णा, संकठा मंदिर दोपहर दो बजे बंद हुआ। वहीं, संकट मोचन मंदिर ग्रहण के नौ घंटे पहले सुबह नौ बजे के बाद बंद हो गया। यहां सात बजे के बाद दर्शन शुरू हुआ।
7:30 घंटे बंद रहा मार्कंडेय महादेव मंदिर का कपाट
चंद्रग्रहण लगने के कारण मारकंडेय महादेव कैथी में भी दर्शन बंद रहा। दोपहर 12 बजे से शाम 7:30 बजे तक मार्कंडेय महादेव मंदिर के कपाट बंद रहे। पुजारी गौरव गिरी ने बताया कि शाम सात बजे के बाद मंदिर की साफ सफाई हुई। पूजन और अभिषेक के बाद कपाट खोला गया। शयन आरती तक दर्शन हुए। इसके अलावा शहर के अन्य मंदिरों के कपाट भी चंद्रग्रहण के दाैरान बंद रहे।