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फर्जी कॉल सेंटर चला रहे जौनपुर और भदोही के सरगना समेत 36 गिरफ्तार, ऐसे देते थे झांसा

Sat, 15 Dec 2018 04:02 PM IST
utpal utpal न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी/लखनऊ
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी/लखनऊ Published by: utpal utpal Updated Sat, 15 Dec 2018 04:02 PM IST
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lucknow stf busted  fake call center and caught mastermind
फेक कॉल सेंटर चलाने वाले अपराधी - फोटो : अमर उजाला
लखनऊ एसटीएफ ने ऑनलाइन शॉपिंग व इंश्योरेंस के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सरगना समेत 36 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें से 33 लोग कॉल सेंटर के कर्मचारी थे, जिन्हें मुचलके पर रिहा कर दिया गया। जबकि गिरोह के सरगना भदोही निवासी अखिलेश, जौनपुर निवासी कमलेश और दिल्ली निवासी दिलीप कुमार को शुक्रवार को वाराणसी के लंका थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। उन्हें जेल भेज दिया गया।
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नोएडा के सेक्टर 10 में संचालित कॉल सेंटर से फ्लिपकार्ट, मिंत्रा, पेटीएम, स्नैपडील, शॉपक्लूज, होमशॉप 18, एचडीएफसी एरगो, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ  इंश्योरेंस, कोटक महिंद्रा व जनरल इंश्योरेंस से संबंधित एक लाख से ज्यादा पॉइंट डाटा बरामद किया गया। यह गिरोह हर दिन लोगों से डेढ़ से दो लाख रुपये की ठगी कर रहा था। एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि इसकी जांच एएसपी विशाल विक्रम सिंह को सौंपी गई। 
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बीएचयू के छात्र ने की थी शिकायत

एसटीएफ ने यह कार्रवाई वाराणसी के लंका थाने में 12 अक्तूबर को बीएचयू के दंत संकाय के छात्र प्रतापगढ़ निवासी श्रद्धेय सिंह द्वारा दर्ज मुकदमे के आधार पर की। श्रद्धेय ने लकी ड्रा के नाम पर 48,200 रुपये ठगे जाने की शिकायत की थी। उनके पास आई काल पर शॉपिंग करने के बदले लैपटॉप और पांच लाख रुपये का लकी ड्रा जीतने का लालच दिया गया था। अलग-अलग किस्तों में 48,200 रुपये लेने के बाद और पैसा मांगा जाने लगा तो उन्हें शंका हुई। 

नामचीन कंपनियों से डाटा चुराते थे

पूछताछ में बताया कि उन्होंने विभिन्न कंपनियों के नाम फर्जी खाते खोले हैं और नामचीन कंपनियों से डाटा चुराकर लोगों को कॉल कर धोखाधड़ी करते थे। लोगों को इंश्योरेंस के नाम पर अधिक बोनस व ऑनलाइन मोबाइल फोन खरीदने पर 50 से 70 फीसदी छूट देने और लकी ड्रा में लैपटॉप, गाड़ी व रुपये जीतने का लालच देते थे। इतना ही नहीं, लोगों को अपने जाल में फंसाने के बाद डेविट व क्रेडिट कार्ड व उसके पासवर्ड की जानकारी लेकर अपने अकाउंट व ई-वॉलेट में पैसे जमा करा लेते थे। 

यह गिरोह अवैध रूप से अब तक कई कॉल सेंटरों का संचालन कर चुका है। जांच की जा रही है कि नामचीन कंपनियों का डाटा चोरी की गई या उन कंपनियों में कार्यरत किसी कर्मचारी के माध्यम से हासिल किया गया। फर्जी बैंक अकाउंट किस तरह से खोले गए। क्या इसमें बैंक कर्मियों की मिलीभगत है। इसके अतिरिक्त इंश्योरेंस एवं ई-कॉमर्स कंपनी के इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी पॉलिसी/ऑडिट की भी जांच की जाएगी।
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