एक छोटी सी लापरवाही की तो जानलेवा हो सकता है गैस सिलिंडर, बरतें ये सावधानियां
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मऊ जिले के वलीदपुर कस्बे में सोमवार सुबह घरेलू गैस सिलिंडर में आग लगने के कारण हुई तबाही बड़ा सबक दे गई है। लापरवाही से कितना बड़ा नुकसान हो सकता है, यह घटना इसका प्रमाण है। बनारस में भी गैस सिलिंडर में लीकेज सहित अन्य कारणों के चलते आग लगने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। लिहाजा इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए और गैस सिलिंडर का प्रयोग करने के दौरान सजगता बरतनी चाहिए। मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनिमेष सिंह का कहना है कि गैस सिलिंडर को लेकर सदैव सतर्क रहें।
इसलिए हुआ ज्यादा नुकसान
मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनिमेष सिंह ने बताया कि एलपीजी सिलिंडर में मीथेन और ब्यूटेन गैस का 40 व 60 प्रतिशत के मानक से मिश्रण होता है। यह गैसें कंप्रेस्ड फार्म में होती हैं। मीथेन गैस ज्यादा घातक, विस्फोटक और मारक क्षमता रखती है। इसी गैस के दबाव से ज्वालामुखी फटता है।
मऊ में हुए हादसे के संबंध में प्रथम दृष्टया यह समझ में आया है कि रात भर गैस रिसाव के चलते मीथेन गैस का कमरे की प्राकृतिक गैसों से मिश्रण हुआ और कमरा विस्फोटक गोला बन गया। जब कमरे में बिजली का स्विच ऑन किया गया होगा या माचिस तीली या लाइटर जलाया गया होगा तो गैस ने आग पकड़ ली। इससे तेज धमाके के साथ बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। कुल मिलाकर गैस क्लाउड की वजह से इतना बड़ा हादसा हुआ।
पुराने सिलिंडर को पेंट कर ग्राहकों को बताते हैं नया
सुंदरपुर, मैदागिन, दारानगर, नगवा, कबीर नगर और साकेत नगर क्षेत्र में आपूर्ति करने आए ट्रॉली चालकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गैस सिलिंडर बेहद बेतरतीब तरीके से ट्रकों से गैस एजेंसियों के गोदामों में उतारे जाते हैं। साथ ही पुराने हो चुके गैस सिलिंडर पेंट कर और नई तिथि अंकित कर ग्राहकों को दे दिए जाते हैं। हालांकि ट्रॉली चालकों की इस बात से एजेंसी संचालक इत्तफाक नहीं रखते हैं।
उनका कहना है कि गुणवत्ता का खयाल रखते हुए ही ग्राहकों को सिलिंडर दिए जाते हैं। गैस कंपनियों की ओर से ग्राहकों का बीमा भी रहता है। मौत की दशा में छह लाख रुपये प्रति व्यक्ति मुआवजा और घायल होने की स्थिति में कंपनी के सर्वे के अनुसार क्षतिपूर्ति दी जाती है। बता दें कि जिले में बीते सवा नौ महीने में गैस सिलिंडर में रिसाव के कारण 39 जगह आग लगी। इसके चलते लाखों रुपये का नुकसान हुआ।
अवैध रिफिलिंग बन सकती है बड़े हादसे का कारण
शहर की कुछ पॉश कॉलोनियों को छोड़ दें तो ऐसा कोई मुहल्ला नहीं है जहां अवैध तरीके से बड़े गैस सिलिंडर से पांच किलोग्राम के छोटे सिलिंडर में अवैध तरीके से रिफलिंग न होती हो। इसके बावजूद पुलिस, पूर्ति विभाग और प्रशासनिक अधिकारी आंखें मूंदे रहते हैं। यह अनदेखी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। कई स्कूली वाहनों में भी एलपीजी गैस सिलिंडरों का इस्तेमाल होता है जो बच्चों की जान के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
हेल्पलाइन नंबर 1906 पर करें कॉल
गैस सिलिंडर में किसी भी समय रिसाव की समस्या हो तो 1906 नंबर पर कॉल करें। साथ ही टोल फ्री नंबर 18002333555 पर कॉल कर सकते हैं।
इति सिंह (शिरडी साईं गैस एजेंसी) ने बताया कि सतर्कता ही सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है। सिलिंडर की आपूर्ति के समय ट्रॉली चालक से गैस लीकेज चेक करा लें। इसमें लापरवाही कतई न बरतें। कोई भी दिक्कत हो तो तत्काल सेवा प्रदाता एजेंसी से संपर्क करें।
वाराणसी एलपीजी वितरक संघ के प्रवक्ता मनीष चौबे ने बताया कि गैस सिलिंडर के उपयोग के दौरान थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। सभी ग्राहक गैस सिलिंडर का इस्तेमाल करते समय लीकेज आदि को लेकर सावधानी बरतें। कोई भी समस्या आए तो उसे खुद से न सुलझाएं।
उपयोग से पहले यह बरतें सावधानी
- सिलिंडर हमेशा हवादार जगह पर सीधी स्थिति में रखें।
- गैस चूल्हा हमेशा सिलिंडर से ऊपर प्लेटफार्म पर रखें।
- सिलिंडर कैबिनेट में या फर्श स्तर से नीचे गड्ढे में न रखें।
- गैस चूल्हे के पास खिड़कियों पर पर्दे न हों, सिलिंडर गर्मी के स्रोतों से दूर रखें।
- जहां सिलिंडर हो वहां मिट्टी का तेल या स्टोव आदि न रखा हो।
- रसोईं घर के अंदर रबर मैट, जूट जैसे ज्वलनशील पदार्थ न रखें।
गैस रिसाव हो ये उठाएं कदम
- घबराएं नहीं और रेग्युलेटर व बर्नर नॉब को तत्काल बंद कर दें।
- बिजली के स्विच या अन्य उपकरणों को चालू न करें, मुख्य विद्युत आपूर्ति को बंद कर दें।
- वेंटिलेशन के लिए सभी दरवाजे और खिड़कियां खोल दें।
- दीपक और अगरबत्ती आदि तत्काल बुझा दें।
- सिलिंडर की नायलॉन धागे से जुड़ी सुरक्षा टोपी तत्काल वॉल्व पर लगा दें।
- अपने वितरक या आपातकालीन सेवा सेल को मदद के लिए तत्काल फोन करें।
गैस सिलिंडर जब उपयोग में हो
बर्तन को जलते बर्नर पर न छोड़ें। बर्तन पर चढ़ी सामग्री में उफान आ सकता है, जिससे लौ बुझ सकती हैं और यह गैस रिसाव का कारण बन सकता है। रसोई घर के अंदर फ्रिज जैसे बिजली चालित उपकरण न रखें, रिसाव की अवस्था में उनमें होने वाला बिजली का उतार-चढ़ाव आग लगने का कारण बन सकता है
- यदि आपको गैस की गंध आ रही है
- सुनिश्चित करें कि बर्नर नॉब्स बंद है।
- माचिस की तीली न जलाएं।
- रेग्युलेटर नॉब को घड़ी के घुमाव की ओर घुमाकर बंद कर दें।
- सभी दरवाजे और खिड़कियां खुली रखें।
- अगर गैस की गंध बनी रहती है तो गैस वितरक या आपातकालीन सेवा को फोन करें।
- बिजली के स्विच ऑन न करें और रेग्युलेटर को निकाल दें। सुरक्षा टोपी को वाल्व पर लगाएं।
- सुरक्षित और हवादार जगह पर सिलिंडर को रखें।
सुरक्षा के सुझाव
गैस लीक की जांच करने के लिए जलती माचिस की तीली का प्रयोग न करें। आसान तरीका यह है कि कुछ सेकेंड के लिए सिलिंडर वाल्व पर अंगूठा रखें। रिसाव के मामले में आप रिसने वाली गैस का दबाव महसूस कर लेंगे।
- खाना पकाते समय सूती एप्रन का ही उपयोग करें।
- बर्तन पकड़ने के लिए केवल बर्तन होल्डर का प्रयोग करें।
- बिस्तर पर जाने से पहले रेग्युलेटर बंद कर दें।
- बच्चों को सिलिंडर की जगह पर न खेलने दें
- सिलिंडर लगाने के बाद हर दो साल में जांच कराएं।
- सुरक्षा नली की नियमित रूप से जांच करें और दरारें दिखाई दें तो वितरक से संपर्क कर उसे बदल दें।
- देख लें कि सिलिंडर पर कंपनी की सील और सुरक्षा कैप सही है या नहीं।
(नोट : मुख्य अग्निशमन अधिकारी, वाराणसी द्वारा बताए गए सुझाव)