ज्ञानवापी: सभी आराजी पर भगवान आदि विश्वेश्वर का हक, सात अगस्त को होगी सुनवाई; वाद मित्र ने दी थी ये अर्जी
Varanasi News: अपर जिला जज (नवम) विनोद कुमार सिंह की अदालत में ज्ञानवापी परिसर स्थित वजूखाना में गंदगी और शिवलिंग जैसी आकृति की आकृति पर दिए गए बयान के मामले में दाखिल निगरानी अर्जी पर भी सुनवाई हुई। विपक्षीगण का जवाब निगरानीकर्ता की ओर से दिया गया, जिसे जारी रखते हुए सुनवाई की तिथि नियत कर दी गई।
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सिविल जज सीनियर डिवीजन / फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रशांत सिंह की अदालत में ज्ञानवापी से जुड़े वर्ष 1991 के प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के प्रकरण में संपूर्ण आराजी पर एएसआई से सर्व कराने की अर्जी पर सुनवाई शुरू हो गई। वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने बहस शुरू की। कोर्ट ने इस मामले में बहस जारी रखते हुए सुनवाई की अगली तिथि सात अगस्त नियत की है।
वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने गत फरवरी माह में ज्ञानवापी परिसर की संपूर्ण आराजी का एएसआई से सर्वे कराने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी।
अर्जी पर सुनवाई के समय वाद मित्र ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 दिसंबर 2023 को इस मामले में मुस्लिम पक्ष की ओर से दाखिल याचिका में आदेश सुनाया था। कहा था कि मां शृंगार गौरी वाद में किए गए एएसआई सर्वे की रिपोर्ट को इस वाद में दाखिल करे।
वाद मित्र इस रिपोर्ट से अलग एएसआई से जो सर्वे कराना चाहते हैं, उसके लिए अलग से आवेदन दे सकते हैं। उसी आदेश के क्रम में व्यापक रूप से एएसआई से रडार तकनीक से सर्वे कराने का अनुरोध किया गया है। आराजी नंबर 9130 का सर्वे किया गया है।
काशी विश्वेश्वर के आराजी नंबर 9131 व 9132 की क्या स्थिति है, इसकी भी एएसआई रिपोर्ट दे। उक्त आराजी में भगवान विश्वेश्वर का बड़ा मंदिर, बड़ी चहारदीवारी और बहुत सारे मंदिर हैं। उन सभी के मालिक स्वयंभू काशी विश्वेश्वर हैं।
सभी के मालिक स्वयंभू काशी विश्वेश्वर
वर्तमान में जो न्यास परिषद है वह सिर्फ मैनेजमेंट देखता है, वास्तविक मालिकाना हक लॉर्ड काशी विश्वेश्वर का ही इन सभी आराजी पर है। एएसआई ने जो सर्वे किया है, वहां कई स्थान पर ब्लॉकेज हैं।
मुख्य गुंबद के नीचे तहखाना है, वह तीन तरफ से बंद है और बहुत सा मलबा पड़ा है। ऐसे में पूर्व में सिविल जज सीनियर डिवीजन / फास्ट ट्रैक कोर्ट के पीठासीन अधिकारी द्वारा दिए गए आदेश के मुताबिक सर्वे किया जाए।
उसके तहत मुख्य गुंबद से हटकर उसे कोई नुकसान पहुंचाए बगैर 4/4 की सुरंग बनाकर नीचे के तहखाने का रडार तकनीक से सर्वे किया जाए। चबूतरा के नीचे तहखाना है, उसके नीचे छुपाया गया एक कुआं भी है। उसमें शिवलिंग है, अरघा है या कुछ और है, यह सब एएसआई के विस्तृत सर्वे से ही पता चल सकता है।
इसके अलावा जहां भी सर्वे नहीं हुआ है, उन सभी स्थानों का सर्वे किया जाना चाहिए। वाद मित्र ने कहा कि जहां शिवलिंग जैसी आकृति मिली है उस स्थल को सुप्रीमकोर्ट ने सुरक्षित रखने को कहा है। ऐसे में उस स्थान को क्षति पहुंचाए बगैर जांच किया जाना आवश्यक है। ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वहां शिवलिंग है या फव्वारा है। काशी विश्वेश्वर को मालिकाना हक मिलने के साथ धार्मिक स्वरूप का निर्धारण हो सकेगा।
वाद मित्र रस्तोगी ने कहा कि इस अति प्राचीन वाद में आराजी नंबर 9130 पर स्थित विवादित ढांचा को ढहाना है और काशी विश्वेश्वर का मालिकाना हक घोषित होना है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे छह माह में निर्णीत करने का आदेश स्थानीय अदालत को दिया है।