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Varanasi News: गंगा घाटों पर छठ की तरह देव दीपावली भी दलदल में मनेगी

Sat, 09 Nov 2024 02:26 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 09 Nov 2024 02:26 AM IST
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Like Chhath on the Ganga ghats, Dev Diwali will also be celebrated in the swamps.
झूठा साबित हुआ अस्सी घाट पर नगर निगम का दावा, धंसते-गिरते व्रतियों ने पूरा किया व्रत
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। गंगा घाटों पर छठ की तरह देव दीपावली भी दलदल में ही मनेगी। नगर निगम की ओर से तैयारियों को लेकर किया गया दावा अस्सी और राजघाट पर झूठा साबित हुआ। दलदल में धंसते, गिरते व्रतियों ने व्रत पूरा किया। शुक्र था कि कोई हादसा नहीं हुआ।
पिछले दिनों अभियान चलाकर साफ सफाई पूरा कराने वाला नगर निगम कच्चे घाटों से सिल्ट हटवाने में विफल रहा। अंतिम समय बालू और प्लाई डाली गई, लेकिन वह भी कारगर साबित नहीं हुई। निगम के पास तैयारियों को पूरा कराने के लिए मात्र 6 दिन बचे हैं। धूप भी कड़ी नहीं हो रही है। ऐसी स्थिति में कच्चे घाटों पर भीड़ हुई तो बड़े हादसे से इन्कार नहीं किया जा सकता है। सिल्ट के आसपास भीड़ होने से धंसने का खतरा बना हुआ है।
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शुक्रवार की सुबह अस्सी और राजघाट के कच्चे घाटों पर पहुंचे श्रद्धालुओं को काफी दिक्कत हुई। पानी में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए जैसे ही लोग गंगा में पहुंचे वैसे ही वे दलदली जमीन में धंस गए। कई लोगों को हाथ और पांव पकड़ कर बाहर निकाला गया। कुछ जगहों पर किनारे की मिट्टी खिसक गई। आसपास खड़े लोगाें ने धंसने और गिरने वाले श्रद्धालुओं को बाहर निकाला। इस दौरान सुरक्षा में लगी पुलिस भी नदारत रही। मोटरबोट के जरिये भीड़ और सुरक्षा करने वाली जल पुलिस का भी पता नहीं लगा। कई घाटों पर मरम्मत का कार्य भी पूरा नहीं हुआ है। इनमें अहिल्याबाई घाट, दशाश्वमेध, अस्सी और राजघाट हैं। जहां सीढि़यां टूटी फूटी हैं।
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एनजीटी की रोक के कारण नहीं निकल पा रहा सिल्ट
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार एनजीटी की रोक के कारण गंगा किनारे मिट्टी यानी सिल्ट को वहां से निकालने पर नियम का उल्लंघन होगा। इस नाते पानी के प्रेशर से गंगा में बहाया जाता है। इसके चलते सिल्ट हटाने में दिक्कत आ रही है।

कई महिला व्रतियों ने खुले आसमान के नीचे बिताई रात
पूजा के बाद कई महिलाएं अपने घरों को लौट गईं, जबकि कुछ महिलाएं घाट पर ही रात बिताने के लिए रुक गईं। खुले आसमान के नीचे ठहरने वाली ये महिलाएं अस्सी घाट पर किसी सुरक्षित जगह के अभाव में विभिन्न स्थानों पर सोने को मजबूर दिखीं। घाट पर महिलाओं के लिए किसी प्रकार की आवासीय या सुरक्षात्मक व्यवस्था न होने के कारण, कई महिलाएं घाट की सीढ़ियों पर, तो कुछ गंगा किनारे मिट्टी पर कपड़े बिछाकर सोती नजर आईं। यहां पर महिलाओं के ठहरने के लिए किसी सुरक्षित और घिरे हुए स्थान का प्रबंध नहीं किया गया, जिससे महिलाओं में नाराजगी है।

पानी का पंप न चलाते तो शायद न धंसते श्रद्धालु
छठ पूजा की तैयारियों के लिए आला अधिकारियों से निर्देश मिलने के बाद नगर निगम के सामान्य विभाग के अधिकारियों ने पंप चलाकर सिल्ट को गंगा में बहाने का काम शुरू कर दिया। जिसके चलते मिट्टी गीली हुई। जानकारों के अनुसार पंप न चलाते को मिट्टी सूखी रहती और दलदल जैसी स्थिति न होती। इसके लिए कुछ जगहों पर बालू और प्लाई डलवाई गई थी। बावजूद इसके अस्सी घाट पर दिक्कत आई। दलदल के चलते कई श्रद्धालु धंसे। जिन्हें आसपास खड़े लोगों ने निकाल लिया।

कोट्स
सभी पक्के घाटों से सिल्ट हटवाया गया है। अस्सी घाट के आगे कच्चे घाटों को समतल किया गया है। जैसे-जैसे गंगा का जलस्तर नीचे जा रहा है सिल्ट दिख रही है। जिसे हटवाया जा रहा है। इस बार तीन बार जलस्तर का घटाव और बढ़ाव से दिक्कत आई। देव दीपावली से पहले सभी तैयारियां मुकम्मल होंगी। - दुष्यंत कुमार मौर्या, अपर नगर आयुक्त


गंगा घाटों पर देव दीपावली की तैयारियों के लिए 10 नवंबर को बैठक बुलाई गई है। अब भी कई घाटों पर सिल्ट और सीवर की समस्या है। अस्सी के कच्चे घाट पर सिल्ट अधिक है। जिसे हटवाने की आवश्यकता है। इसके लिए बैठक में कहा जाएगा। बाकी नगर निगम के लोगों ने कुछ हद तक छठ पूजा पर लाइट, मरम्मत आदि का काम कराया है। - पंडित वागीश मिश्रा, अध्यक्ष केंद्रीय, देव दीपावली समिति
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