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सारनाथ में इस साल शुरू नहीं हो पाएगा लाइट एंड साउंड शो
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 11 Jul 2017 05:44 PM IST
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सारनाथ
- फोटो : self
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उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से सारनाथ में प्रस्तावित लाइट एंड साउंड शो शुरू होने में और विलंब तय है। सोमवार को उच्चाधिकारियों की बैठक में इस मामले में कोई हल नहीं निकल सका।
पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक अविनाश चंद्र मिश्रा का कहना है कि नक्शे की स्वीकृति के लिए एएसआई के महानिदेशक को पत्र लिखा गया है। मौजूदा हालात में लाइट एंड साउंड शो इस साल भी शुरू होने की कोई संभावना नहीं है।
गुरुवार को एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद नीरज कुमार सिन्हा ने निरीक्षण के दौरान रोक लगा दी थी। उनका कहना था कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) की ओर से अनुमति तो लाइट एंड साउंड शो के लिए दी गई थी लेकिन पर्यटन विभाग मौके पर स्थायी निर्माण करा रहा था।
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प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं दी गई थी। विभाग ने पर्यटन विभाग से इस मामले में जवाब मांगा था। मामले की रिपोर्ट एएसआई के महानिदेशक दिल्ली को भी भेजी गई थी।
2017 में पूरा होना था निर्माण
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा 5 मार्च, 2014 को सारनाथ की खुदाई के अवशेषों पर लाइट एंड साउंड शो का प्रस्ताव दिया था। इसके लिए लगभग 733 करोड़ का बजट पास किया गया था। इसका निर्माण उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम लिमिटेड को करना है।
एएसआई महानिदेशक ने 3 अप्रैल, 2014 को प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। आईआईटी बीएचयू की रिपोर्ट के बाद 15 दिसंबर, 2014 को इसे अंतिम तौर पर अनुमोदित किया गया था।
इसे दिसंबर, 2016 में पूरा होना था। बाद में इसे मई, 2017 में किया जाना था लेकिन अब तक काम ढंग से शुरू ही नहीं हो सका है।
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पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक अविनाश चंद्र मिश्रा का कहना है कि नक्शे की स्वीकृति के लिए एएसआई के महानिदेशक को पत्र लिखा गया है। मौजूदा हालात में लाइट एंड साउंड शो इस साल भी शुरू होने की कोई संभावना नहीं है।
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गुरुवार को एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद नीरज कुमार सिन्हा ने निरीक्षण के दौरान रोक लगा दी थी। उनका कहना था कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) की ओर से अनुमति तो लाइट एंड साउंड शो के लिए दी गई थी लेकिन पर्यटन विभाग मौके पर स्थायी निर्माण करा रहा था।
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प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं दी गई थी। विभाग ने पर्यटन विभाग से इस मामले में जवाब मांगा था। मामले की रिपोर्ट एएसआई के महानिदेशक दिल्ली को भी भेजी गई थी।
2017 में पूरा होना था निर्माण
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा 5 मार्च, 2014 को सारनाथ की खुदाई के अवशेषों पर लाइट एंड साउंड शो का प्रस्ताव दिया था। इसके लिए लगभग 733 करोड़ का बजट पास किया गया था। इसका निर्माण उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम लिमिटेड को करना है।
एएसआई महानिदेशक ने 3 अप्रैल, 2014 को प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। आईआईटी बीएचयू की रिपोर्ट के बाद 15 दिसंबर, 2014 को इसे अंतिम तौर पर अनुमोदित किया गया था।
इसे दिसंबर, 2016 में पूरा होना था। बाद में इसे मई, 2017 में किया जाना था लेकिन अब तक काम ढंग से शुरू ही नहीं हो सका है।
गुप्तकालीन चौखंडी स्तूप पर छाया संकट
गुप्तकालीन चौखंडी स्तूप के पश्चिमी व दक्षिणी छोर पर लंबी-लंबी घास उग आई है। अपनी विशिष्ट संरचना के लिए विख्यात इस स्तूप से देश-दुनिया के करोड़ों बौद्ध अनुयायियों की आस्था जुड़ी है। बावजूद इसके उसके संरक्षण के प्रति उदासीनता बरती जा रही है।
धरोहर के संरक्षण की योजनाएं बनाई तो गईं पर वे अब तक परवान न चढ़ सकीं। नतीजतन, एक अनमोल विरासत उपेक्षा का दंश झेल रही है।
करीब 93 फीट ऊंचाई वाले चौखंडी स्तूप की पूरी संरचना ईंट निर्मित है।
सन् 1835 और 1904-05 में कराए गए पुरातात्विक उत्खनन में यह पूरी संरचना सामने आई। हर साल बड़ी तादाद में बौद्ध अनुयायी स्तूप की परिक्रमा व पूजा-पाठ के लिए पहुंचते हैं।
इस संदर्भ में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वरिष्ठ संरक्षण सहायक पीके त्रिपाठी ने बताया कि जो संरक्षण के समय चौखंडी स्तूप की मूल संरचना की जांच करने के लिए पश्चिमी छोर पर गड्ढे खोदे गए थे। इनको जल्द बंद किया जाएगा और घास साफ कराई जाएगी।
धरोहर के संरक्षण की योजनाएं बनाई तो गईं पर वे अब तक परवान न चढ़ सकीं। नतीजतन, एक अनमोल विरासत उपेक्षा का दंश झेल रही है।
करीब 93 फीट ऊंचाई वाले चौखंडी स्तूप की पूरी संरचना ईंट निर्मित है।
सन् 1835 और 1904-05 में कराए गए पुरातात्विक उत्खनन में यह पूरी संरचना सामने आई। हर साल बड़ी तादाद में बौद्ध अनुयायी स्तूप की परिक्रमा व पूजा-पाठ के लिए पहुंचते हैं।
इस संदर्भ में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वरिष्ठ संरक्षण सहायक पीके त्रिपाठी ने बताया कि जो संरक्षण के समय चौखंडी स्तूप की मूल संरचना की जांच करने के लिए पश्चिमी छोर पर गड्ढे खोदे गए थे। इनको जल्द बंद किया जाएगा और घास साफ कराई जाएगी।