कुंभाभिषेक: काशी में मां अन्नपूर्णा और शंकराचार्य की अगुवाई, निकली भव्य शोभायात्रा; गूंजे वैदिक मंत्र
अन्नपूर्णा मंदिर का 48 साल बाद कुंभाभिषेक 31 जनवरी को शृंगेरी पीठ के शंकराचार्य विधुशेखर भारती की अगुवाई में निकलने वाली शोभायात्रा के साथ शुरू हुआ। महमूरगंज स्थित शृंगेरी मठ से रथयात्रा चाैराहे तक शोभायात्रा गुजरेगी। इसके साथ ही नौ दिवसीय अनुष्ठान भी शुरू हो गया।
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मां अन्नपूर्णा मंदिर के कुंभाभिषेक के लिए शुक्रवार को पहली बार काशी आए शृंगेरी शारदा पीठ के शंकराचार्य विधुशेखर भारती महाराज की अगुवाई में शोभायात्रा निकाली गई।
शहनाई, शंखनाद व डमरुओं के निनाद और वेदमंत्रों के अनुगूंज के बीच रथयात्रा चौराहे से रथारूढ़ मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा विराजमान थी। विशेष वाहन पर शंकराचार्य काशीवासियों को आशीष दे रहे थे। मार्ग में पुष्पवर्षा हो रही थी और आरती उतारी गई।
रथयात्रा चौराहे पर मां अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी, शृंगेरी मठ के प्रबंधक चल्ला अन्नपूर्णा प्रसाद, चल्ला सुब्बा राव आदि ने शंकराचार्य का माल्यार्पण किया। बटुकों और वैदिक ब्राह्मणों ने उनका वैदिक विधि से पूजन किया।
शंकराचार्य ने रथ पर विराजमान मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा पर पुष्पार्चन और माल्यार्पण कर नमन किया। फिर शोभायात्रा प्रवाहमान हुई। आगे वाद्ययंत्रों के साथ दक्षिण से आए नादस्वरम् का दल भी शामिल था। रथ पर मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा थी और उसके पीछे वाहन पर शंकराचार्य विराजमान थे। शोभायात्रा में वैदिक मंत्रोच्चार करते हुए वैदिक ब्राह्मण व बटुक चल रहे थे। मार्ग में संस्थाओं व आमजन पुष्पवर्षा कर स्वागत कर रहे थे।
मठ के गेट का लोकार्पण
शोभायात्रा के शृंगेरी मठ पहुंचने पर काशी नरेश अनंत नारायण सिंह ने माल्यार्पण कर शंकराचार्य का स्वागत किया। इसके बाद शंकराचार्य विधुशेखर भारती स्वामी ने शृंगेरी मठ के नवनिर्मित गेट का लोकार्पण किया।
शंकराचार्य ने मठ में स्थापित हनुमान मंदिर में दर्शन किया। फिर चंद्रमौलिश्वर भगवान की पूजा की। इसके बाद अनंत नारायण सिंह, शंकरपुरी, चल्ला सुब्बाराव आदि ने शंकराचार्य की पाद्य पूजा की।
आशीर्वचन में शंकराचार्य ने कहा कि हमारे सनातन धर्म के प्रचार के लिए चारों पीठों में दक्षिणाम्नाय पीठ का अलग महत्व है। 48 साल जब गुरुदेव शंकराचार्य भारती तीर्थ काशी आए थे तब भी महाकुंभ था। वो प्रयाग से काशी आए थे। उस वक्त उन्होंने मां अन्नपूर्णा की नई मूर्ति की स्थापना की थी। कहा कि कुंभाभिषेक के अनुष्ठान शृंगेरी शंकराचार्य की उपस्थिति में ही होते हैं।
पूजन में ये विद्वान रहे शामिल
पूजन में नीलकंठ महादेव मंदिर हरिद्वार के महंत सुभाषपुरी, मेयर अशोक कुमार तिवारी, प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय, बृजभूषण ओझा, प्रो. रामनारायण द्विवेदी, पं. विशेश्वर शास्त्री द्रविड़, प्रो. राजाराम शुक्ल, अनिल नारायण किंजवडेकर, चल्ला जगन्नाथ प्रसाद, के वेंकट रमण, वीएस मणि, केवी नारायणन, संतोष सोलापुरकर, षडानन पाठक, प्रदीप श्रीवास्तव, राकेश तोमर आदि शामिल रहे।
शंकराचार्य इन मंदिरों में दर्शन व अनुष्ठानों में लेंगे भाग
शंकराचार्य मां अन्नपूर्णा मंदिर के कुंभाभिषेक व शृंगेरी मठ में अनुष्ठान के अलावा भी अन्य मंदिरों में दर्शन पूजन व अनुष्ठानों में भाग लेंगे। एक फरवरी सुबह 10 बजे से विशालाक्षी मंदिर में दर्शन, बिंदु माधव पधारकर लक्ष तुलसी अर्चना एवं निरांजन, पंचगंगा घाट स्थित श्रृंगेरी शंकर मठ में दर्शन, सुबह 11 बजे हनुमान घाट में राजराजेश्वरी मंदिर में दर्शन, तीन को सुबह 10 बजे से शृंगेरी शंकर मठ केदारघाट में जिर्णोद्धार का कुंभाभिषेक, शाम को केदारघाट पर चंद्रमौलीश्वर पूजा। चार को सुबह आठ बजे से महारुद्र यज्ञ का संकल्प शृंगेरी मठ केदारघाट में, नौ बजे से गंगा स्नान, केदारेश्वर व चिंतामणि गणेश मंदिर में दर्शन, पांच को सुबह नौ बजे भैरव मंदिर में दर्शन, आठ को दिन में 12 बजे से केदारघाट के मठ में महारूद्र यज्ञ की पूर्णाहुति में शामिल होंगे।