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रंगभरी एकादशी: बनारस की गलियों में गौरा संग निकले काशीपुराधिपति, भक्तों के साथ खेली होली

Tue, 15 Mar 2022 12:14 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Tue, 15 Mar 2022 12:14 AM IST
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Kshi Vishwanath came out with Gaura in the streets of Kashi, people gathered to see the Shiv family
काशी विश्वनाथ धाम में उमड़ी भक्तों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला

धरती से आसमान तक गुलाल और गुलाब की चादर। हर-हर महादेव का जयघोष। हर आंख बाबा के राजसी स्वरूप को आंखों में बसाने को आतुर और हर हाथ पालकी को छू लेने के लिए बेचैन। काशीपुराधिपति को अपने बीच पाकर शिवभक्तों के उल्लास का कोई ओर-छोर नजर नहीं आ रहा था। चार घंटे के लंबे इंतजार के बाद जब राजराजेश्वर चांदी के सिंहासन पर गौरा और प्रथमेश को लेकर काशी की गलियों में निकले तो उनके स्वागत में गलियां गुलाल से लाल नजर आने लगीं।

Kshi Vishwanath came out with Gaura in the streets of Kashi, people gathered to see the Shiv family
गौना कराकर बाबा विश्वनाथ जब काशी की गलियों में निकले तो भक्तों ने अबीर गुलाल उड़ाकर बाबा का स्वागत किया - फोटो : अमर उजाला

सोमवार को हर-हर महादेव का जयकारा लगाते भक्तों की कतार बाबा के दर्शन को आतुर खड़ी थी। बाबा की पालकी जिस ओर से गुजरी होलियाना हुड़दंग नजर आई। शिवभक्तों ने बाबा के भाल गुलाल सजाकर होली खेलने की अनुमति मांगी। रंगभरी एकादशी पर देर शाम काशीपुराधिपति सपरिवार रजत पालकी पर सवार होकर निकले। बाबा के राजसी स्वरूप के दर्शन के लिए भक्तों का रेला ऐसा उमड़ा कि गलियों में जाम लग गया।

Kshi Vishwanath came out with Gaura in the streets of Kashi, people gathered to see the Shiv family
माता गौरा का गवना कराकर निकले बाबा विश्वनाथ। - फोटो : अमर उजाला

हर-हर महादेव के जयघोष से भक्तों ने त्रिपुरारी का स्वागत किया तो गुलाल अर्पित करके आशीर्वाद भी लिया। ब्रह्म मुहूर्त में बाबा की चल प्रतिमा के पूजन के उपरांत आरती के साथ ही रंगभरी के रंगारंग उत्सव का श्रीगणेश हो गया। राजसी ठाट में देवी पार्वती और गणेश के साथ चिनार और अखरोट की लकड़ी से बनी रजत जड़ित पालकी पर प्रतिष्ठित करके बाबा की चल प्रतिमा काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में ले जाई गई।

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Kshi Vishwanath came out with Gaura in the streets of Kashi, people gathered to see the Shiv family
होली खेलकर काशी विश्वनाथ धाम से निकलते लोग। - फोटो : अमर उजाला

पालकी यात्रा के दौरान इतना गुलाल और अबीर उड़ाया गया कि महंत आवास से मंदिर प्रांगण तक करीब 500 मीटर के बीच जमीन पर अबीर-गुलाल की परत जम गई। बाबा का सिंहासन रखने के लिए बिछाई गई हरी कालीन पहले गुलाल की बौछार से लाल हुई फिर भभूत से सफेद हो गई। शिव परिवार को मंदिर गर्भगृह में विराजमान कराकर लोकाचार निभाया गया। देर रात तक बाबा के राजसी स्वरूप के दर्शन के लिए मंदिर में भक्तों की कतार लगी रही।
 

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Kshi Vishwanath came out with Gaura in the streets of Kashi, people gathered to see the Shiv family
काशी विश्वनाथ महंत आवास पर हुआ शिवांजली का कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला

खादी के शाही कुर्ते में बाबा, माथे पर रेशमी पगड़ी
काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी और पं. वाचस्पति तिवारी ने बाबा की विधानपूर्वक आरती उतारी। खादी का शाही कुर्ता धोती धारण किए बाबा के मस्तक पर बनारस की गंगा जमुनी तहजीब रेशमी पगड़ी के रूप में इठला रही थी। बरसाने के लहंगे और आभूषणों में देवी पार्वती का शृंगार संजीव रत्न मिश्र ने किया। शृंगार और भोग आरती के बाद महंत आवास विशेष कक्ष में बाबा के शृंगार का दर्शन भक्तों के लिए खोला गया।

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