धरती से आसमान तक गुलाल और गुलाब की चादर। हर-हर महादेव का जयघोष। हर आंख बाबा के राजसी स्वरूप को आंखों में बसाने को आतुर और हर हाथ पालकी को छू लेने के लिए बेचैन। काशीपुराधिपति को अपने बीच पाकर शिवभक्तों के उल्लास का कोई ओर-छोर नजर नहीं आ रहा था। चार घंटे के लंबे इंतजार के बाद जब राजराजेश्वर चांदी के सिंहासन पर गौरा और प्रथमेश को लेकर काशी की गलियों में निकले तो उनके स्वागत में गलियां गुलाल से लाल नजर आने लगीं।
रंगभरी एकादशी: बनारस की गलियों में गौरा संग निकले काशीपुराधिपति, भक्तों के साथ खेली होली
सोमवार को हर-हर महादेव का जयकारा लगाते भक्तों की कतार बाबा के दर्शन को आतुर खड़ी थी। बाबा की पालकी जिस ओर से गुजरी होलियाना हुड़दंग नजर आई। शिवभक्तों ने बाबा के भाल गुलाल सजाकर होली खेलने की अनुमति मांगी। रंगभरी एकादशी पर देर शाम काशीपुराधिपति सपरिवार रजत पालकी पर सवार होकर निकले। बाबा के राजसी स्वरूप के दर्शन के लिए भक्तों का रेला ऐसा उमड़ा कि गलियों में जाम लग गया।
हर-हर महादेव के जयघोष से भक्तों ने त्रिपुरारी का स्वागत किया तो गुलाल अर्पित करके आशीर्वाद भी लिया। ब्रह्म मुहूर्त में बाबा की चल प्रतिमा के पूजन के उपरांत आरती के साथ ही रंगभरी के रंगारंग उत्सव का श्रीगणेश हो गया। राजसी ठाट में देवी पार्वती और गणेश के साथ चिनार और अखरोट की लकड़ी से बनी रजत जड़ित पालकी पर प्रतिष्ठित करके बाबा की चल प्रतिमा काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में ले जाई गई।
पालकी यात्रा के दौरान इतना गुलाल और अबीर उड़ाया गया कि महंत आवास से मंदिर प्रांगण तक करीब 500 मीटर के बीच जमीन पर अबीर-गुलाल की परत जम गई। बाबा का सिंहासन रखने के लिए बिछाई गई हरी कालीन पहले गुलाल की बौछार से लाल हुई फिर भभूत से सफेद हो गई। शिव परिवार को मंदिर गर्भगृह में विराजमान कराकर लोकाचार निभाया गया। देर रात तक बाबा के राजसी स्वरूप के दर्शन के लिए मंदिर में भक्तों की कतार लगी रही।
खादी के शाही कुर्ते में बाबा, माथे पर रेशमी पगड़ी
काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी और पं. वाचस्पति तिवारी ने बाबा की विधानपूर्वक आरती उतारी। खादी का शाही कुर्ता धोती धारण किए बाबा के मस्तक पर बनारस की गंगा जमुनी तहजीब रेशमी पगड़ी के रूप में इठला रही थी। बरसाने के लहंगे और आभूषणों में देवी पार्वती का शृंगार संजीव रत्न मिश्र ने किया। शृंगार और भोग आरती के बाद महंत आवास विशेष कक्ष में बाबा के शृंगार का दर्शन भक्तों के लिए खोला गया।