वाराणसी। क्राफ्ट पेपर इकाइयों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं रह गई है। बंदी के कारण इकाइयों में उत्पादन लगभग 90 फीसदी तक ठप है। ऑर्डर महीने भर से नहीं है तो उद्यमी क्राफ्ट पेपर के बढ़ते दाम से भी चिंतित हैं। छह माह पहले जो क्राफ्ट पेपर 25 से 26 रुपये किलो में उद्यमियों को मिलता था, अब वह 45 से 46 रुपये किलो तक पहुंच गया है। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों को लेकर उद्यमी हैरान व परेशान हैं। अब भी दाम कम होने की संभावनाएं नहीं दिख रही हैं।
उत्तर प्रदेश कारूगेटेड मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश भाटिया ने बताया कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने इकाइयों का भट्ठा बैठा दिया है। पिछले छह माह से लगभग 60 फीसदी दाम क्राफ्ट पेपर का बढ़ा है। जिले में बॉक्स पैकेजिंग उद्योग की 200 इकाइयां है, जिनमें 50 बड़ी और 150 छोटी है। 90 फीसदी इकाइयों में उत्पादन कार्य ठप है। बनारस से पूर्वांचल और बिहार तक पैकेजिंग बॉक्स की सप्लाई होती है। लॉकडाउन के कारण बाजार बंद है तो मांग भी नहीं है। ऑर्डर एक माह पूर्व मिले थे, अब तो कुछ भी नहीं है। इंतजार किया जा रहा है कि सब कुछ सामान्य हो। सरकार से मांग है कि क्राफ्ट मूल्य का दाम कम किया जाए। पैकेजिंग उद्यमी महिपाल गुप्ता ने बताया कि क्राफ्ट पेपर का निर्यात कुछ समय के सरकार को रोक देना चाहिए, ताकि घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता बढ़ सके और दामों को काबू किया जा सके। ऐसा हो जाए तो पैकेजिंग उद्योग इकाइयां को ऑक्सीजन मिल सकेगा।