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गंगा पार रेती पर पतंगबाजी का अभ्यास
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वाराणसी। पतंगबाजी महोत्सव में शामिल होने के बनारस के पतंगबाज पूरी तरह तैयार हैं। आठ मार्च को लखनऊ में आयोजित ऑल इंडिया पतंग प्रतियोगिता में वाराणसी की तीन टीमों ने क्वालीफाई किया है। प्रतिभागियों ने रविवार दोपहर डोमरी गंगा तट पर अभ्यास किया।
प्रतियोगिता में शामिल होने वाले घातक काइट क्लब के कप्तान अजय शंकर तिवारी ने बताया कि यह समूचा खेल तेजी का है। तेजी से पतंग को छोड़ना ओर लपेटना पड़ता है। एक पेंच लड़ाने का 15 मिनट का समय होता है। इसमें मिलावटी धागे का इस्तेमाल नहीं कर सकते। कमेटी की जांच के बाद ही उड़ा सकते हैं। प्रतियोगिता में दीप काइट क्लब, फ्रीडम काइट क्लब और घातक काइट क्लब के खिलाड़ी शामिल होंगे। एक टीम में चार खिलाड़ी होते हैं। तीन पेच लड़ाते हैं जबकि एक खिलाड़ी स्टैंड बाइ पर रहता है। नौ प्वाइंट का गेम होता है। पतंग की लंबाई 23.5 और 26.5 इंच होती है। चार सौ से पांच सौ गज दूरी पर पेच लड़ाया जाता है।
खिलाड़ी अनिल ने बताया कि पतंगबाजी का जुनून है। प्रतिदिन चार से पांच घंटे अभ्यास कर रहा हूं। लखनऊ ऑल इंडिया प्रतियोगिता में अपनी टीम का प्रतिनिधित्व करूंगा। खिलाड़ी राजेश ने बताया कि यह खेल तेजी पर निर्भर है। तेजी से पतंग को छोड़ने और लपेटने में जिसने महारत है वह आसानी से जीत सकता है।
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प्रतियोगिता में शामिल होने वाले घातक काइट क्लब के कप्तान अजय शंकर तिवारी ने बताया कि यह समूचा खेल तेजी का है। तेजी से पतंग को छोड़ना ओर लपेटना पड़ता है। एक पेंच लड़ाने का 15 मिनट का समय होता है। इसमें मिलावटी धागे का इस्तेमाल नहीं कर सकते। कमेटी की जांच के बाद ही उड़ा सकते हैं। प्रतियोगिता में दीप काइट क्लब, फ्रीडम काइट क्लब और घातक काइट क्लब के खिलाड़ी शामिल होंगे। एक टीम में चार खिलाड़ी होते हैं। तीन पेच लड़ाते हैं जबकि एक खिलाड़ी स्टैंड बाइ पर रहता है। नौ प्वाइंट का गेम होता है। पतंग की लंबाई 23.5 और 26.5 इंच होती है। चार सौ से पांच सौ गज दूरी पर पेच लड़ाया जाता है।
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खिलाड़ी अनिल ने बताया कि पतंगबाजी का जुनून है। प्रतिदिन चार से पांच घंटे अभ्यास कर रहा हूं। लखनऊ ऑल इंडिया प्रतियोगिता में अपनी टीम का प्रतिनिधित्व करूंगा। खिलाड़ी राजेश ने बताया कि यह खेल तेजी पर निर्भर है। तेजी से पतंग को छोड़ने और लपेटने में जिसने महारत है वह आसानी से जीत सकता है।
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