वाराणसी में प्रियंका गांधी: दादी के बाद पोती ने 44 साल बाद मां कूष्मांडा के दरबार में टेका मत्था
माता कूष्मांडा का यह सिद्ध मंदिर काशी के प्राचीनतम मंदिरों में से एक माना जाता है। इस मंदिर में काशी वाले तमाम राजनीतिक हस्तियों ने शीश नवाया है।
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किसान न्याय यात्रा को संबोधित करने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी रविवार को वाराणसी दौर पर रहीं। रैली से पहले उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर और दुर्गाकुंड स्थित देवी कूष्मांडा के मंदिर में दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया। माता कूष्मांडा का यह सिद्ध मंदिर काशी के प्राचीनतम मंदिरों में से एक माना जाता है।
इस मंदिर में काशी वाले तमाम राजनीतिक हस्तियों ने शीश नवाया है। जानकारी के मुताबिक, मां के दरबार मे तकरीबन 44 साल पहले लोकसभा चुनाव हारने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी दर्शन-पूजन करने पहुंचीं थीं। इससे पहले बतौर प्रधानमंत्री भी इंदिरा गांधी ने दर्शन पूजन किया था।
स्थानीय लोगों के साथ पुराने कांग्रेसियों ने भी खुशी जताई कि दादी के बाद अब पोती प्रियंका परंपरा का निर्वहन किया। शहर के पुराने कांग्रेसी बताते हैं कि इंदिरा गांधी को धर्म-कर्म में रुचि थी।
मंदिरों में जाने के लिए उन्हें किसी विशेष प्रोटोकॉल की जरूरत नहीं पड़ती थी। आम दर्शनार्थी के तौर पर दर्शन करती थीं। शक्ति पीठ मां कूष्मांडा के दरबार मे कई दिग्गज नेताओं ने हाजिरी लगाई है। 22 सितंबर 2017 नवरात्र के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी ने भी मां के दरबार मे मत्था टेका था। करीब 24 मिनट देवी मंदिर में रहने के दौरान विशेष पूजन-अर्चन किया था।
हजारों साल पुराना है मंदिर
भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी विश्व की तीन लोक से न्यारी काशी में मां आद्य शक्ति अदृश्य रूप में दुर्गाकुंड मंदिर में विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि शुंभ और निशुंभ राक्षसों का वध करने के बाद मां दुर्गा ने यहां विश्राम किया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार काशीराज सुदर्शन के पक्ष में एक बार देवी कूष्मांडा ने स्वयं शेर पर सवार होकर युद्ध किया था। इसके बाद राजा सुदर्शन ने मां से काशी में विराजमान होने की प्रार्थना की थी। मंदिर का जीर्णोद्धार 1760 ई0 में रानी भवानी ने कराया था।