भुगतान की फाइलें पुलिस के कब्जे में, पत्नी को घंटों पति की आत्महत्या का नहीं लगा पता
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चीफ इंजीनियर के कमरे में एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने लगभग तीन घंटे तक विभागीय अभियंताओं से पूछताछ कर बयान दर्ज किए। इस दौरान चीफ इंजीनियर कार्यालय का मेन गेट पर पुलिस तैनात कर लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई थी।
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उधर, डीएम सुरेंद्र सिंह ने ठेकेदारों के भुगतान संबंधी फाइलों को डेढ़ घंटे तक खंगाला और अभियंताओं से पूछताछ की। प्रकरण की तफ्तीश कर रहे सीओ कैंट डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि ठेकेदार ने किन परिस्थितियों में आत्महत्या की, इसकी तह तक पहुंचने के लिए पीडब्ल्यूडी के लोगों से पूछताछ कर दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। ठेकेदारों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। ठेकेदार की आत्महत्या के लिए जो भी जिम्मेदार पाए जाएंगे, वह जेल जाएंगे।
आठ से 15 प्रतिशत कमीशन जमा कराते हैं बैंक खातों में :
पीडब्ल्यूडी कॉलोनी पहुंचे अवधेश के साथी ठेकेदारों ने अधिकारियों के सामने कहा कि काम कराने के बाद जो धनराशि मिलने वाली होती है, उसका आठ से 15 प्रतिशत तक कमीशन मांगा जाता है। बड़े ठेकेदार कम कमीशन देते हैं और छोटे ठेकेदारों को ज्यादा कमीशन देना पड़ता है।
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कमीशन का पैसा अभियंता सीधे नहीं लेते हैं, बल्कि अपने रिश्तेदारों और नौकरों के बैंक खाते में जमा कराते हैं। जो ठेकेदार कमीशन देने को तैयार नहीं होता है उसका भुगतान रोककर ब्लैक लिस्टेड करने की धमकी दी जाती है।
पत्नी को घंटों पति की आत्महत्या का नहीं लगा पता, बच्चे बेसुध :
ठेकेदार अवधेश की आत्महत्या के बारे में उनकी पत्नी प्रतिभा को घंटों जानकारी नहीं दी गई थी। परिजनों ने बताया कि प्रतिभा के खराब स्वास्थ्य के कारण उन्हें घटना की जानकारी नहीं दी गई। अवधेश का बड़ा बेटा सजल नोएडा में रहकर पढ़ाई करता है। छोटा बेटा आकाश बीएचयू से स्नातक की पढ़ाई कर रहा है और बेटी श्रेयश्री इंटर में है।
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अवधेश की आत्महत्या की सूचना पाकर परिजन दीनदयाल अस्पताल पहुंचे तो चौतरफा चीख पुकार मच गई। विधायक सौरभ श्रीवास्तव सहित अन्य लोग अवधेश के बच्चों और परिजनों को सांत्वना दे रहे थे। अवधेश के पड़ोसियों ने बताया कि वह मिलनसार थे, लेकिन एक साल से बहुत चिंतित रहते थे। अक्सर पीडब्ल्यूडी से बकाया भुगतान न होने की बात कहते थे। खुशहाल परिवार के ऊपर ऐसा कहर टूटेगा, ऐसा किसी ने नहीं सोचा था।