पीडब्लूडी के चीफ इंजीनियर के ऑफिस में ठेकेदार ने खुद को गोली मारकर की खुदकुशी, जांच में जुटी पुलिस
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वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र में पीडब्लूडी के ठेकेदार ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली। सूचना के बाद मौके पर पुलिस पहुंच गई है। जिसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
ठेकेदार अवधेश का फाइल फोटो
वाराणसी के नदेसर स्थित पीडब्लूडी के चीफ इंजीनियर अंबिका सिंह के दफ्तर में बुधवार को ठेकेदार अवधेश श्रीवास्तव(45) ने लाइसेंसी असलहे से खुद को गोली मार ली। ठेकेदार निर्माण कार्य के लाखों का बकाया और विभागीय उत्पीड़न का आरोप लगा रहा था।
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जानकारी के मुताबिक ठेकेदार अवधेश चंद्र श्रीवास्तव की पीडब्ल्यूडी पर लंबे समय से काफी रकम बकाया थी। विभाग की लापरवाही के कारण अवेधश का भुगतान नहीं हो पा रहा था। बुधवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे अवधेश नदेसर स्थित चीफ इंजीनियर अंबिका सिंह के कार्यालय में पहुंचे तो बकाया भुगतान करने को कहा था।
इस पर चीफ इंजीनियर ने उनको बुरी तरह डांट दिया। इसी दौरान ठेकेदार ने मुख्य अभियंता अंबिका सिंह के सामने ही बंदूक निकालकर खुद को गोली मार ली। इस दौरान मौके पर हड़कंप मच गया। जब तक दफ्तर के लोग पहुंचे, तब तक ठेकेदार की मौत हो चुकी थी। सूत्रों के मुताबिक ठेकेदार अवधेश की शिवप्रसाद गुप्ता महिला चिकित्सालय के भवन निर्माण से संबधित पीडब्लूडी पर लगभग चार करोड़ रुपये बकाया थे।

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डीएम सुरेंद्र सिंह के अनुसार पीडब्लूडी पर 48 लाख बकाया था। मेजरमेंट रिपोर्ट न होने के कारण एक्सईएन ने जेई को बुलाया था। इसके पहले 10 करोड़ 17 लाख का भुगतान हुआ था। दो करोड़ का इलेक्ट्रिकल विंग से भुगतान हुआ था। बिजली विभाग ने एक करोड़ की आरसी जारी की थी। विधायक सौरभ के कहने पर डीएम ने एसडीएम को कह कर आरसी रुकवाई थी। इसके बाद डीएम ने बकाया भुगतान की रिपोर्ट मंगाई है।
अवधेश ने सुसाइड नोट पर लिखा वर्ष 2014-15 में कबीरचौरा महिला अस्पताल में 100 बैड के मैटरनिटी वार्ड के निर्माण का ठेका ई-टेंडरिंग के माध्यम से उसे दिया गया था। विभागीय अधिकारियों ने अनुबंध को मूल दर से 20 फीसदी ज्यादा पर तय कर दिया।
धीरे-धीरे विभागीय अधिकरियों पर कुल बकाया 14 करोड़ 50 लाख रुपये से ऊपर हो गया। मगर भुगतान की जगह विभागीय अधिकारियों ने कभी मशीनरी एडवांस तो कभी सिक्योरिटी एडवांस के नाम पर अवधेश को भुगतान किया। नोट में लिखा कि हर बार बिल फार्म पर दस्तखत कराए गए। इसके बाद साढ़े चौदह में से केवल दस करोड़ का ही भुगतान किया गया।
सुसाइड नोट में अवधेश ने अपर इंजीनियर मनोज कुमार सिंह के अलावा सहायक इंजीनियर पर गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा कि उन्होंने मुझ पर लगातार दबाव बनाया है। साथ ही कमीशन कोरी का भी आरोप लगाया है। आरोप है कि विभागीय काम में कई बार ड्राइंगो को बदलकर, तोड़-फोड़ करके फिर से बनाया जाता रहा है। जिसके भुगतान के लिए हमेशा प्रताड़ित किया जाता रहा है। साथ ही लिखा कि उसका काम मुख्यमंत्री ड्रफ्ट सॉफ्टवेयर पर डाला गया।