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नए रिश्ते की डोर में बंधीं बेटियां
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 14 Jul 2016 01:45 AM IST
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नए रिश्ते की डोर में बंधी जैतपुरा संवासिनी गृह की दस बेटियां जिंदगी के नए सफर पर चल पड़ीं। बुधवार को पूरा संवासिनी गृह फूलों से सजा था। खूब रौनक थी और घर खुशियों से दमक रहा था। घर की बेटी की शादी की तरह ही हर कोई इन बेटियों के विवाह की हर रस्मोरिवाज में शामिल हुआ। सखी-सहेलियों और बहनों की चुहलबाजी हुई। सहेलियों ने जूते भी चुराए, नाच गाना हुआ और जब उनकी विदाई का वक्त आया तो एक दूसरे के गले लग खूब रोईं।
संवासिनी गृह की दस संवासिनियां बुधवार को परिणय सूत्र में बंध गई जो कि उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा ही था। तीन दिन से संवासिनी गृह में तैयारियां चल रही थीं। बुधवार को धूमधाम से बारात आई। द्वारपूजा के बाद दुलहन के जोड़े में सजी शरमाई, सकुचाई संवासिनियों का जयमाल हुआ। पियरी में जीवनसाथी संग सात फेरे लिए और सात जन्मों के बंधन में बंध गईं। रस्म के दौरान शहनाई की धुन और मंगल गीत गूंजते रहे।
मंडल में दूल्हों के जूते चुराने की रस्म भी बहनों की तरह ही दूसरी संवासिनियों ने बखूबी निभाई। कन्यादान करने वालों ने खूब आशीर्वाद दिया। कन्यादान की रस्म एडीएम सिटी विंध्यवासिनी राय, एसपी सिटी सुधाकर यादव, प्रोबेशन अधिकारी आरपी यादव, पूर्णिमा सिंह, रेखा, प्रीति श्रीवास्तव, वीएम चतुर्वेदी, प्रेम मिश्रा, एएस पांडेय और ममता द्विवेदी ने किया। संचालन अमरेंद्र पौत्सायन ने किया। अधीक्षिका गीता पांडेय ने सबको आशीर्वचन दिया।
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संवासिनी गृह की दस संवासिनियां बुधवार को परिणय सूत्र में बंध गई जो कि उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा ही था। तीन दिन से संवासिनी गृह में तैयारियां चल रही थीं। बुधवार को धूमधाम से बारात आई। द्वारपूजा के बाद दुलहन के जोड़े में सजी शरमाई, सकुचाई संवासिनियों का जयमाल हुआ। पियरी में जीवनसाथी संग सात फेरे लिए और सात जन्मों के बंधन में बंध गईं। रस्म के दौरान शहनाई की धुन और मंगल गीत गूंजते रहे।
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मंडल में दूल्हों के जूते चुराने की रस्म भी बहनों की तरह ही दूसरी संवासिनियों ने बखूबी निभाई। कन्यादान करने वालों ने खूब आशीर्वाद दिया। कन्यादान की रस्म एडीएम सिटी विंध्यवासिनी राय, एसपी सिटी सुधाकर यादव, प्रोबेशन अधिकारी आरपी यादव, पूर्णिमा सिंह, रेखा, प्रीति श्रीवास्तव, वीएम चतुर्वेदी, प्रेम मिश्रा, एएस पांडेय और ममता द्विवेदी ने किया। संचालन अमरेंद्र पौत्सायन ने किया। अधीक्षिका गीता पांडेय ने सबको आशीर्वचन दिया।
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