काशी में चारों तरफ गूंजा 'हर-हर महादेव', अजब-गजब अंदाज में बाबा दरबार पहुंच रहे श्रद्धालु
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भूतभावन शिव की नगरी का स्वरूप सावन में निखर उठा है। मंगला आरती के बाद जलाभिषेक का जो सिलसिला शुरू होता है कि रात भर चलता रहता है। ओम नम: शिवाय का जप करते हुए भक्त धीरे-धीरे बाबा दरबार में हाजिरी लगाने के लिए बढ़ते हैं। डमरू की धुन पर नाचते हुए कांवरियों के दल के अलावा शिव का स्वांग रचाए भक्त बोल-बम के जयकारे के साथ अपने आराध्य के चरणों में श्रद्धा अर्पित करने के लिए शिव की शरण में पहुंचता है।
काशी में भक्तों की भीड़ का आलम यह था कि पहली बार जिगजैग की व्यवस्था के बाद भी कई किलोमीटर क्षेत्र में भक्तों की कतार लगी रहती है। गंगा के तट से लेकर मंदिर परिक्षेत्र का इलाका केसरिया मय हो गया है। कांवरियों का दल दूर दराज से बाबा की चौखट पर हाजिरी लगाकर मन्नत मांगते हैं। बाबा दरबार में भीड़ के कारण स्थानीय लोगों ने शहर के शिवमंदिरों की ओर रुख करते हैं।
शहर से लेकर गांव तक शिव मंदिरों में सुबह से देर रात तक दर्शन के लिए भक्तों के आने का सिलसिला जारी रहता है। शूलटंकेश्वर, तिलभांडेश्वर, सारंग नाथ, जागेश्वर, महामृत्यंजय, गौतमेश्वर सहित सभी शिवालयों में भक्तों की भीड़ रही। आस्थावानों की सुरक्षा के लिए चाक चौबंद व्यवस्था की गई है। गंगा घाट पर जल पुलिस से लेकर गर्भ गृह तक सुरक्षाकर्मी कांवरियों की और बाबा के भक्तों के मार्ग दर्शन और सुरक्षा के लिए लगे रहते हैं।
काशी में द्वादश ज्योर्तिलिंग यात्रा 28 जुलाई से
काशी खंडोक्त द्वादश ज्योर्तिलिंग प्रदक्षिण दर्शन-पूजन यात्रा 28 जुलाई को केदारघाट से शुरू होगी। केदारेश्वर महादेव के दर्शन-पूजन कर संकल्प यात्रा का शुभारंभ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कराएंगे।
इस यात्रा में भक्त हनुमानघाट, शिवाला, बैजनत्था, सिगरा, रामकुंड, हौजकटोरा, दारानगर, कोयला बाजार, पटनी टोला, नेपाली खपड़ा, मानमंदिर, विश्वनाथ गली में स्थित द्वादश ज्योर्तिलिंग के दर्शन के उपरांत ज्ञानवापी कूप के पास जितेंद्र नाथ व्यास के यहां संकल्प छोड़कर समाप्त होगी।
यह जानकारी यात्रा संचालक उमाशंकर गुप्ता ने दी। उन्होंने बताया कि काशी में यह यात्रा 1972 से अनवरत चल रही है। इस निशुल्क यात्रा में कोई भी भक्त हिस्सा लेकर पुण्य का भागी बन सकता है। वेदव्यास जी ने भी लिखा है कि जो भक्तजन काशी के बाहर जाकर द्वादश ज्यार्तिलिंग के दर्शन-पूजन करते हैं, उससे दस गुना अधिक लाभ काशी में दर्शन-पूजन करने से होता है।