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Kashi Vishwanath Mandir: विश्वनाथ धाम में अब षष्ठी तक दर्शन देंगे लड्डू गोपाल, पहली बार रातभर खुला मंदिर
Wed, 28 Aug 2024 02:16 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Wed, 28 Aug 2024 02:16 PM IST
सार
Kashi Vishwanath Mandir : काशी विश्वनाथ धाम में अब षष्ठी तक लड्डू गोपाल दर्शन देंगे। धाम में बालरूप में विराजे लड्डू गोपाल की 31 को विदाई होगी।
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काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष आराधना।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पहली बार लड्डू गोपाल और बाबा विश्वनाथ एक साथ भक्तों को दर्शन दिए। ये सिलसिला अब षष्ठी तक अनवरत चलेगा। मंगलवार को भी उनका शृंगार, भोग, आरती, पूजन और आराधना हुई।
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श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के नवाचारों के अंतर्गत धाम में पहली बार आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर सोमवार को रातभर मंदिर के गर्भगृह दर्शन-पूजन के लिए खुला रहा। सोमवार से ही बाबा धाम में लड्डू गोपाल के राग, भोग, शृंगार आदि के साथ दर्शन-पूजन हुआ। शयन आरती के बाद लड्डू गोपाल की विदाई की जानी थी, लेकिन मंदिर के अर्चकों ने लड्डू गोपाल के बाल स्वरूप में विदाई कराना शास्त्र संमत नहीं माना। इसके बाद निर्णय हुआ कि षष्ठी तक लड्डू गोपाल धाम में ही विराजेंगे।
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न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्र ने बताया कि न्यास के अर्चकों के परामर्श पर अब छह दिनों तक श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का पर्व मनाया जाएगा। मंगलवार को श्रीविश्वेश्वर की शयन आरती के पूर्व सत्यनारायण मंदिर में लड्डू गोपाल की आराधना विष्णु सहस्रनाम के साथ हुई। सनातन परंपरा का अनुपालन करते हुए षष्ठी तिथि के बाद लड्डू गोपाल का पूजन अर्चन और प्रार्थना के साथ पुनः विष्णु स्वरूप धारण करने के अनुष्ठान के साथ समापन होगा।
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लड्डू गोपाल के रूप में पूजे गए भगवान श्रीहरि
सनातन परंपरा में भगवान श्रीहरि विष्णु के षोडश कलाओं से युक्त अवतार हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल के रूप में भगवान श्रीहरि के कृष्ण जन्मोत्सव के अनुष्ठान होते हैं। पूजित विग्रह में देवता के वास होने होने पर उनकी विदाई की जाती है।