काशी विश्वनाथ धाम: सभी द्वारों का होगा नामकरण, नंदी द्वार से मिलेगा वीआईपी को प्रवेश
लोकार्पण के बाद से श्रीकाशी विश्वनाथ धाम की दिव्यता और भव्यता लोगों को आकर्षित कर रही है। धाम में लगे दरवाजों के नामकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नंदी द्वार से वीआइपी इंट्री मिलेगी।
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श्री काशी विश्वनाथ धाम की भव्यता और दिव्यता लोकार्पण के बाद से ही सुर्खियों में है। बाबा दरबार में आस्था का सागर रोजाना उमड़ रहा है। धाम के चारों प्रवेश द्वारों को खोलने की कवायद जारी है। तीन साल से बंद चल रहा सरस्वती फाटक शनिवार को खोला गया। धाम के चौथे प्रवेश द्वार का नाम नंदी द्वार होगा। इसे वीआईपी लोगों के लिए आरक्षित किया गया है। विशेष मौकों पर मंदिर प्रबंधन आवश्यकता अनुसार इस द्वार का प्रयोग करेगा।
वहीं परिसर में बने सभी सुरक्षा प्वाइंटों का नाम भी पास के भवन के नाम से जाना जाएगा। इसके लिए जल्द ही प्रशासन रिपोर्ट जारी करेगा। बाबा दरबार में बनने वाले सभी द्वारों के नाम भी प्रस्तावित कर दिए गए हैं। इसमें दो द्वार प्रमुख होगा, इन्हीं द्वार से होते हुए श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में पहुंचेंगे।
श्रद्धालुओं की गिनती के लिए लगेंगी स्वचालित मशीनें
काशी विश्वनाथ धाम में भक्तों का डाटा भी तैयार होगा। धाम के लोकार्पण के बाद भारी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। श्रद्धालुओं की गिनती के लिए स्वचालित मशीनें सप्ताह भर के अंदर मंदिर परिसर में मशीनों को लगा दिया जाएगा।
बाबा के दरबार में उमड़ी भीड़
इधर, बाबा के दरबार में रोजाना भीड़ उमड़ रही है। रविवार सुबह से भक्तों की लंबी कतार लगी है। पौष के महीने में सावन की तरह भक्तों की कतार उमड़ी तो मंदिर परिक्षेत्र की गलियं ठसाठस हो गईं। गोदौलिया से मैदागिन तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है। श्री काशी विश्वनाथ धाम में मंगला आरती के बाद से भक्तों की कतार लगी है।
मंदिर के मुख्य परिसर में चारों दरवाजों से भक्तों को प्रवेश दिया जा रहा है। दोपहर एक बजे तक करीब 60 हजार लोगों ने बाबा दरबार में हाजिरी लगाई। मंदिर प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार बिना मास्क के प्रवेश मंदिर में नहीं मिलेगा और सामाजिक दूरी का पालन करना अनिवार्य है।
बाबा धाम के दरवाजे भक्तों को कर रहे आकर्षित
काशी विश्वनाथ धाम में विशालकाय दरवाजे शिवभक्तों के बीच आकर्षण का केंद्र है। किसी विशाल किले के द्वार जैसी अनुभूति देने वाले दरवाजों का निर्माण राजस्थान में हुआ। विश्वनाथ धाम के मुख्य परिसर में लगे चारों दरवाजों का वजन करीब 13 टन है। इन दरवाजों का निर्माण राजस्थान के जालोर के रामसीन गांव में हुआ। जालोर से बनारस ट्रकों से लाया गया। सफाई और पॉलिश धाम में ही किया गया।
धाम में दूसरे चरण का काम शुरू
इधर, धाम के भवनों का संचालन शुरू नहीं होने से श्रद्धालु केवल बाबा का दर्शन करके ही लौट रहे हैं। धाम में बने इंपोरियम, वाराणसी गैलरी, सिटी म्यूजियम, मुमुक्षु भवन व आध्यात्मिक पुस्तक केंद्र के संचालन के लिए श्रीकाशी विश्वनाथ विशिष्ट विकास क्षेत्र परिषद की ओर से कंपनी के चयन की प्रक्रिया चल रही है।
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