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बाबा दरबार में श्रद्धालु नहीं कर सकेंगे शिव कचहरी के दर्शन
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श्री काशी विश्वनाथ दरबार में आने वाले श्रद्धालु अब कुछ दिनों तक शिव कचहरी के दर्शन नहीं कर सकेंगे। बाबा विश्वनाथ के मंदिर विस्तार के तहत कचहरी के सभी विग्रह को देव गैलरी में स्थापित किया गया है।
श्री काशी विश्वनाथ धाम का वास्तविक स्वरूप अब धीरे-धीरे साकार होने लगा है। मुख्य द्वार के साथ ही मंदिर परिसर का स्वरूप अब चुनार व उड़ीसा के गुलाबी पत्थरों की आभा से दमक उठा है। राजराजेश्वर स्वरूप में विराजने वाले बाबा विश्वनाथ की कचहरी को अब नया स्वरूप देने की तैयारी है। इसके लिए सभी विग्रह को उनके मूल स्थान से देव गैलरी में विधि-विधान से हटा दिया गया है। अगले कुछ दिनों तक बाबा का दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को शिव कचहरी के दर्शन का लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा श्रद्धालुओं को अक्षयवट हनुमान, पांच विनायक, पांच पांडव, धर्मराज भगवान सहित काशी खंडोक्त द्रोपादित्य के भी दर्शन नहीं मिल सकेंगे।
पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता संजय गोरे ने बताया कि मंदिर विस्तार के तहत शिव कचहरी को हटाया गया है। जल्द ही भक्तों को बाबा विश्वनाथ मंदिर और शिव कचहरी के एक साथ दर्शन हो सकेंगे।
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मुकदमे में जीत दिलाती है शिव कचहरी
शिव कचहरी के महंत परिवार ने बताया कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित शिव कचहरी की मान्यता है कि जो लोग मुकदमे में फंस जाते हैं वो लोग यहां पर अपनी फरियाद करते हैं। जिससे उनके पक्ष में मुकदमे का फैसला आता है। इस शिव कचहरी में अनगिनत शिवलिंग के अलावा सभी देवताओं की प्रतिमा भी है। यहां पूजन पाठ भी किया जाता है।
हटाए गए विग्रह
अक्षयवट हनुमान, शिव कचहरी, पांच विनायक, धर्मराज भगवान, कपिलमुनि, महामृत्यंजय, सूक्तेश्वर महादेव, कल्कि भगवान, ललिता गौरी, काशी खंडोक्त द्रौपदादित्य, श्रीकृष्ण और श्रीराम दरबार के विग्रह को मंदिर प्रशासन द्वारा विधि-विधान से निकालकर देव गैलरी में सुरक्षित रखा गया है।
दोबारा प्राण प्रतिष्ठित होंगे देव विग्रह
शिव कचहरी के महंत परिवार ने बताया कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन के अनुरोध पर सुंदरीकरण और जीर्णोद्धार की अनुमति दी है। मंदिर प्रशासन द्वारा यह आश्वासन और भरोसा दिया गया है कि काम पूरे होने के बाद सभी देव विग्रह को पुन: उसी स्थान पर प्राण प्रतिष्ठित कराया जाएगा।
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श्री काशी विश्वनाथ धाम का वास्तविक स्वरूप अब धीरे-धीरे साकार होने लगा है। मुख्य द्वार के साथ ही मंदिर परिसर का स्वरूप अब चुनार व उड़ीसा के गुलाबी पत्थरों की आभा से दमक उठा है। राजराजेश्वर स्वरूप में विराजने वाले बाबा विश्वनाथ की कचहरी को अब नया स्वरूप देने की तैयारी है। इसके लिए सभी विग्रह को उनके मूल स्थान से देव गैलरी में विधि-विधान से हटा दिया गया है। अगले कुछ दिनों तक बाबा का दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को शिव कचहरी के दर्शन का लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा श्रद्धालुओं को अक्षयवट हनुमान, पांच विनायक, पांच पांडव, धर्मराज भगवान सहित काशी खंडोक्त द्रोपादित्य के भी दर्शन नहीं मिल सकेंगे।
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पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता संजय गोरे ने बताया कि मंदिर विस्तार के तहत शिव कचहरी को हटाया गया है। जल्द ही भक्तों को बाबा विश्वनाथ मंदिर और शिव कचहरी के एक साथ दर्शन हो सकेंगे।
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मुकदमे में जीत दिलाती है शिव कचहरी
शिव कचहरी के महंत परिवार ने बताया कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित शिव कचहरी की मान्यता है कि जो लोग मुकदमे में फंस जाते हैं वो लोग यहां पर अपनी फरियाद करते हैं। जिससे उनके पक्ष में मुकदमे का फैसला आता है। इस शिव कचहरी में अनगिनत शिवलिंग के अलावा सभी देवताओं की प्रतिमा भी है। यहां पूजन पाठ भी किया जाता है।
हटाए गए विग्रह
अक्षयवट हनुमान, शिव कचहरी, पांच विनायक, धर्मराज भगवान, कपिलमुनि, महामृत्यंजय, सूक्तेश्वर महादेव, कल्कि भगवान, ललिता गौरी, काशी खंडोक्त द्रौपदादित्य, श्रीकृष्ण और श्रीराम दरबार के विग्रह को मंदिर प्रशासन द्वारा विधि-विधान से निकालकर देव गैलरी में सुरक्षित रखा गया है।
दोबारा प्राण प्रतिष्ठित होंगे देव विग्रह
शिव कचहरी के महंत परिवार ने बताया कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन के अनुरोध पर सुंदरीकरण और जीर्णोद्धार की अनुमति दी है। मंदिर प्रशासन द्वारा यह आश्वासन और भरोसा दिया गया है कि काम पूरे होने के बाद सभी देव विग्रह को पुन: उसी स्थान पर प्राण प्रतिष्ठित कराया जाएगा।