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काशी के इस अनोखे बैंक ने पूरे किए 91 साल, यहां जमा की जाती है राम नाम की 'करेंसी'
टीम डिजिटल,वाराणसी
Updated Mon, 26 Mar 2018 10:20 AM IST
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भक्तों द्वारा जमा किया राम नाम काफी सहेज कर रखा जाता है।
- फोटो : अमर उजाला
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दुनिया भर में धर्मनगरी के नाम से प्रसिद्ध और भारत के प्रचीनतम शहर काशी के गंगा तट पर आस्था की भी गंगा बहती है, जिसमे देश-विदेश के भक्त न सिर्फ डुबकी लगाने आते हैं, बल्कि अपनी आस्था को सहेज कर भी रखते हैं। बाबा विश्वनाथ की नगरी में एक अनूठा बैंक है, जो पैसे से नहीं बल्कि राम नाम से चलता है।
इस बैंक से कर्ज के रूप में पैसे नहीं, बल्कि राम नाम का लोन मिलता है। इस बैंक की कार्य प्रणाली और बैंकों की ही तरह है। अंतर है तो बस यह कि यहां पैसे की जगह जमा होता है राम का नाम। धर्म और अध्यात्म में आस्था रखने वाले इस बैंक के ग्राहक पुण्य कमाते हैं।
इस अनोखे बैंक का नाम है राम रमापति बैंक। इसने इस रामनवमी को अपने 91 साल पूरे कर लिए। रविवार को काशी विश्वनाथ गली के त्रिपुरा भैरवी स्थित राम रमापति बैंक का 91 वां वार्षिकोत्सव धूम-धाम से मनाया गया। श्रीराम राम नाम और शिवनाम की अपूर्व झांकी और परिक्रमा के साथ ही दस दिवसीय आयोजन रविवार से आरंभ हुआ।
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देश विदेश के लाखों भक्तों के हाथों से लिखे 19 अरब 28 करोड़ 81 लाख 50 हजार राम नाम और सवा करोड़ शिव नाम की अपूर्व झांकी का दर्शन कर लोग निहाल हो उठे। सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। रामनाम की परिक्रमा कर पुण्य बटोरने के लिए शहर के अलावा कई प्रदेशों के दर्शनार्थी भी पहुंचे।
ऐसा मानना है कि इस बैंक से कर्ज लेकर पूरा भरने वाले भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। भक्त यहां से सवा लाख राम नाम का कर्ज राम नवमी के अवसर पर लेते हैं फिर अगले रामनवमी पर सवा लाख राम नाम लिख कर यहां जमा कर देते हैं।
इसके लिए राम बैंक का मोहर लगा कागज, लकड़ी की कलम और लाल स्याही बैंक की तरफ से मुफ्त में दिया जाता है। बैंक के मैनेजर दास कृष्णचंद्र बताते हैं कि यह एक ऐसा बैंक है जहां जमा होता है राम का नाम।
इसे जमा करने का उद्देश्य भी आर्थिक नहीं आध्यात्मिक लाभ कमाना है। वो भी कई गुना ज्यादा। इस बैंक में स्त्री हो या पुरुष, सभी लाभ उठाते हैं। इस बैंक में कोई भी आकर अपने दुख दूर करने के लिए 'राम नाम' का कर्ज ले सकता है।
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इस बैंक से कर्ज के रूप में पैसे नहीं, बल्कि राम नाम का लोन मिलता है। इस बैंक की कार्य प्रणाली और बैंकों की ही तरह है। अंतर है तो बस यह कि यहां पैसे की जगह जमा होता है राम का नाम। धर्म और अध्यात्म में आस्था रखने वाले इस बैंक के ग्राहक पुण्य कमाते हैं।
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इस अनोखे बैंक का नाम है राम रमापति बैंक। इसने इस रामनवमी को अपने 91 साल पूरे कर लिए। रविवार को काशी विश्वनाथ गली के त्रिपुरा भैरवी स्थित राम रमापति बैंक का 91 वां वार्षिकोत्सव धूम-धाम से मनाया गया। श्रीराम राम नाम और शिवनाम की अपूर्व झांकी और परिक्रमा के साथ ही दस दिवसीय आयोजन रविवार से आरंभ हुआ।
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देश विदेश के लाखों भक्तों के हाथों से लिखे 19 अरब 28 करोड़ 81 लाख 50 हजार राम नाम और सवा करोड़ शिव नाम की अपूर्व झांकी का दर्शन कर लोग निहाल हो उठे। सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। रामनाम की परिक्रमा कर पुण्य बटोरने के लिए शहर के अलावा कई प्रदेशों के दर्शनार्थी भी पहुंचे।
ऐसा मानना है कि इस बैंक से कर्ज लेकर पूरा भरने वाले भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। भक्त यहां से सवा लाख राम नाम का कर्ज राम नवमी के अवसर पर लेते हैं फिर अगले रामनवमी पर सवा लाख राम नाम लिख कर यहां जमा कर देते हैं।
इसके लिए राम बैंक का मोहर लगा कागज, लकड़ी की कलम और लाल स्याही बैंक की तरफ से मुफ्त में दिया जाता है। बैंक के मैनेजर दास कृष्णचंद्र बताते हैं कि यह एक ऐसा बैंक है जहां जमा होता है राम का नाम।
इसे जमा करने का उद्देश्य भी आर्थिक नहीं आध्यात्मिक लाभ कमाना है। वो भी कई गुना ज्यादा। इस बैंक में स्त्री हो या पुरुष, सभी लाभ उठाते हैं। इस बैंक में कोई भी आकर अपने दुख दूर करने के लिए 'राम नाम' का कर्ज ले सकता है।
रामनवमी को राम बैंक का सम्पूर्ण दर्शन
राम रमापति बैंक का 90 वां वार्षिकोत्सव मनाया गया।
- फोटो : अमर उजाला
कहते हैं राम का नाम सारे बिगड़े काम बना देता है। राम का नाम स्मरण करने मात्र से सारे कष्ट मिट जाते हैं। देश के इकलौते आस्था के इस बैंक में अब तक दुनिया भर के भक्तों के लिखे 19 अरब, 22 करोड़, 62 लाख 75 हजार राम नाम जमा हैं और इसके खाताधारकों की संख्या लाखों में है।
रामनवमी को राम बैंक का सम्पूर्ण दर्शन होता है। यहां चैत महीने की रामनवमी को हर साल 'राम नाम' की परिक्रमा करने वालों की भीड़ होती है।
इस बैंक में हर किसी के लिखे राम नाम को नहीं रखा जाता, बल्कि इसके लिए बाकायदा खाता खुलवाया जाता है।
इसके लिए राम रामा पति बैंक का फ़ार्म भरना होता है। इस फ़ार्म में उनके नाम पते के साथ उनके मनोरथ को भी लिखा जाता है, जिसे पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है।
यहां खाता खुलवाना आसान नहीं है, क्योंकि इसके लिए अचार विचार और इनके अपने नियम है। जिसे पूरा करने का वचन देने वाले को ही यहां से राम नाम लिखने का कागज़ मिलता है और उसी पर इन्हें लिखना होता है।
यहां से कर्ज उन्हीं भक्तों को दिया जाता है जो बहुत दुखी, दीन, अभिमान रहित होकर श्री रामलला जी के शरण में आते हैं।
रामनवमी को राम बैंक का सम्पूर्ण दर्शन होता है। यहां चैत महीने की रामनवमी को हर साल 'राम नाम' की परिक्रमा करने वालों की भीड़ होती है।
इस बैंक में हर किसी के लिखे राम नाम को नहीं रखा जाता, बल्कि इसके लिए बाकायदा खाता खुलवाया जाता है।
इसके लिए राम रामा पति बैंक का फ़ार्म भरना होता है। इस फ़ार्म में उनके नाम पते के साथ उनके मनोरथ को भी लिखा जाता है, जिसे पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है।
यहां खाता खुलवाना आसान नहीं है, क्योंकि इसके लिए अचार विचार और इनके अपने नियम है। जिसे पूरा करने का वचन देने वाले को ही यहां से राम नाम लिखने का कागज़ मिलता है और उसी पर इन्हें लिखना होता है।
यहां से कर्ज उन्हीं भक्तों को दिया जाता है जो बहुत दुखी, दीन, अभिमान रहित होकर श्री रामलला जी के शरण में आते हैं।
लोन लेने के लिए बने हैं खास नियम
भक्तों द्वारा जमा किया राम नाम काफी सहेज कर रखा जाता है
- फोटो : अमर उजाला
यहां खाता खुलवाना आसान नहीं है, क्योंकि इसके लिए अचार विचार और इनके अपने नियम है। जिसे पूरा करने का वचन देने वाले को ही यहां से राम नाम लिखने का कागज़ मिलता है और उसी पर इन्हें लिखना होता है। यहां से कर्ज उन्हीं भक्तों को दिया जाता है जो बहुत दुखी, दीन, अभिमान रहित होकर श्री रामलला जी के शरण में आते हैं।
राम रमापति बैंक से राम नाम का कर्ज़ लेने वालों के लिए कुछ नियम हैं, जिसमें शराब, मांस, मछली,प्याज, लहसुन इत्यादि चीजों को नहीं खाना है। बैंक के मैनेजर ने कहा कि राम रमापति बैंक का उद्देश्य लोगों में राम के प्रति आस्था जगाना और उन्हें सांसारिक समस्याओं से मुक्ति दिलाना है।
यहां के मैनेजर से पूछने पर कि क्या आज के आधुनिक और वैज्ञानिक जमाने में इस तरह की आस्था रूढ़िवादिता नहीं कही जानी चाहिए।
तब वो गहरी सांस लेकर आत्मविश्वास के साथ कहते हैं कि इस बैंक के सदस्य डॉक्टर, इंजीनियर, आला-अफसर और यहां तक कि बॉलीवुड के सितारे भी हैं। बैंक में हर सदस्य का नाम गोपनीय रखता है।
इस बैंक में आस्था रखने वाले सभी लोग यहां की महिमा बखान करने से नहीं चुकते। सभी की कोई न कोई समस्या यहां आने के हल हो गई।
राम रमापति बैंक से राम नाम का कर्ज़ लेने वालों के लिए कुछ नियम हैं, जिसमें शराब, मांस, मछली,प्याज, लहसुन इत्यादि चीजों को नहीं खाना है। बैंक के मैनेजर ने कहा कि राम रमापति बैंक का उद्देश्य लोगों में राम के प्रति आस्था जगाना और उन्हें सांसारिक समस्याओं से मुक्ति दिलाना है।
यहां के मैनेजर से पूछने पर कि क्या आज के आधुनिक और वैज्ञानिक जमाने में इस तरह की आस्था रूढ़िवादिता नहीं कही जानी चाहिए।
तब वो गहरी सांस लेकर आत्मविश्वास के साथ कहते हैं कि इस बैंक के सदस्य डॉक्टर, इंजीनियर, आला-अफसर और यहां तक कि बॉलीवुड के सितारे भी हैं। बैंक में हर सदस्य का नाम गोपनीय रखता है।
इस बैंक में आस्था रखने वाले सभी लोग यहां की महिमा बखान करने से नहीं चुकते। सभी की कोई न कोई समस्या यहां आने के हल हो गई।