काशी के विद्वानों ने नोटबंदी के फैसले को किया खारिज
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काशी विद्वत परिषद् ने अपनी शास्त्रार्थ एवं पांडित्य परम्परा का निर्वाह करते हुए मंगलवार को नोटबंदी पर अपनी राय दी। सर्वसम्मति से कहा गया कि नोटबंदी या विमुद्रीकरण देश हित में नहीं है। विद्वानों ने शास्त्रों में वर्णित धन के तीन प्रकारों सित, असित एवं सबल पर रोशनी डाली।
कहा कि गलत ढंग से जो धन उपार्जित किया जाता है वही असित धन कहलाता है । यही काला धन है और ऐसे धन का उपार्जन शास्त्रों में निंदनीय है । ऐसे धन का उपार्जन पहले से ही अपराध की कोटि में है।
उसके लिये दंड का विधान है तो इस प्रकार के धन का नोटबंदी से सफाया करने का कोई औचित्य नहीं बनता। नोटबंदी विषय पर शास्त्रार्थ की रीति से चर्चा की गई जिसमें प्रश्न पक्ष और उत्तर पक्ष को आधार बनाया गया था।
पूर्व पक्ष के विद्वानों का यह कहना था कि नोटबंदी देश के लिए हितकारी है। क्योंकि 1000 और 500 के नोट के कारण देश की बड़ी हानि हो रही है। आतंकवाद बढ़ रहा है। एक तो पाकिस्तान की ओर से और दूसरा माओवादियों की ओर से ।
दूसरा कारण बहुत सी नकली मुद्रा का बाजार में उतार दिया जाना है। इसे रोकने के लिए यह कदम जरूरी था। उत्तर पक्ष के विद्वानों ने नोटबंदी को देश के लिए अहितकारी बताया ।विद्वानों ने इस बात पर जोर दिया कि नोटबंदी से अच्छे दिन आने वाले नहीं है।
शाष्त्रार्थ में ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द, अग्नि अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर ब्रह्मचारी रामकृष्णानंद, स्वामी अविमुक्तेश्रानंद सरस्वती, स्वामी सदानंद सरस्वती, सदाशिव ब्रह्मेंद्रानंद सरस्वती, स्वामी ईश्वरानंद तीर्थ, काशी विद्वत्परिषद के अध्यक्ष आचार्य पं राम यत्न शुक्ल, शेष नारायण मिश्र, साहित्य के आचार्य पं शिव जी उपाध्याय ने अपने विचार व्यक्त किए ।