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काशी का बनेगा धार्मिक और सांस्कृतिक नक्शा, इसमें इनको किया जाएगा शामिल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 03 Jun 2018 10:52 AM IST
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काशी
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काशी के धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप के गौरवशाली इतिहास को संजोने के लिए मंदिर बचाओ आंदोलनम की ओर से 11 विद्वानों की कमेटी जल्दी ही काम शुरू करेगी। इसमें काशी के समस्त पौराणिक प्राचीन मंदिर, तीर्थ और जलाशयों को शामिल किया जाएगा। पंचक्रोशी यात्रा मार्ग से जुड़े मंदिर, तालाब, धर्मशाला और देवविग्रहों को इसमें प्रमुखता से स्थान दिया जाएगा।
आंदोलनम के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि काशी के इतिहास को आने वाली पीढ़ी को बताने के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक नक्शा बनाने की तैयारी की जा रही है। इसमें काशी खंडोक्त और स्कंद पुराण में वर्णित देव विग्रहों को चिह्नित किया जाएगा।
इसकी कमेटी में भूगोलविद्, इतिहासविद्, पुराणविद्, ज्योतिषविद्, शास्त्रों के ज्ञाता, संस्कृति के ज्ञाता विद्वानों को शामिल किया जाएगा। दो से तीन दिनों में कमेटी की घोषणा की जाएगी।
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उन्होंने बताया कि पंचक्रोशी यात्रा के दौरान देखा गया कि कई साल पहले जो देव विग्रह थे वह गायब हो चुके हैं। कई मंदिरों, जलाशयों का अस्तित्व तक समाप्त हो चुका है।
भगवान शिव की नगरी में होने वाली पंचक्रोशी तीर्थ यात्रा बहुत ही पुण्यदायी है। मानचित्र तैयार हो जाने पर सभी स्थानों के संरक्षण, संवर्धन और पूजा की भी व्यवस्था की जाएगी।
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आंदोलनम के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि काशी के इतिहास को आने वाली पीढ़ी को बताने के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक नक्शा बनाने की तैयारी की जा रही है। इसमें काशी खंडोक्त और स्कंद पुराण में वर्णित देव विग्रहों को चिह्नित किया जाएगा।
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इसकी कमेटी में भूगोलविद्, इतिहासविद्, पुराणविद्, ज्योतिषविद्, शास्त्रों के ज्ञाता, संस्कृति के ज्ञाता विद्वानों को शामिल किया जाएगा। दो से तीन दिनों में कमेटी की घोषणा की जाएगी।
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उन्होंने बताया कि पंचक्रोशी यात्रा के दौरान देखा गया कि कई साल पहले जो देव विग्रह थे वह गायब हो चुके हैं। कई मंदिरों, जलाशयों का अस्तित्व तक समाप्त हो चुका है।
भगवान शिव की नगरी में होने वाली पंचक्रोशी तीर्थ यात्रा बहुत ही पुण्यदायी है। मानचित्र तैयार हो जाने पर सभी स्थानों के संरक्षण, संवर्धन और पूजा की भी व्यवस्था की जाएगी।
काशी के प्रमुख तीर्थ
ज्योतिर्लिंग
-द्वादश ज्योर्तिलिंग
-56 विनायक
-नौ दुर्गा
-नौ गौरी
-अष्ट भैरव
-द्वादश आदित्य
-56 विनायक
-नौ दुर्गा
-नौ गौरी
-अष्ट भैरव
-द्वादश आदित्य