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काशी में नहाकर बीमार पड़े भगवान जगन्नाथ
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 21 Jun 2016 02:02 AM IST
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अस्सी स्थित मंदिर में भगवान जगन्नाथ को जलाभिषेक करते भक्त।
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काशी में भगवान जगन्नाथ सोमवार को मंदिर की छत पर भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भक्तों के प्रेम में इतना नहाए कि बीमार पड़ गए। दोपहर बाद इंद्रदेव ने भी बाबा का जलाभिषेक किया। अस्सी स्थित जगन्नाथपुरी में सुबह से देर रात तक स्नान के बाद भगवान के बीमार पड़ने के बाद पखवारे भर के लिए मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। इस अवधि में पूजा-आरती भी नहीं होगी।
मंगलवार को मेवा, मिश्री, तुलसी, लौंग, जायफर के औषधीय काढ़े का भोग भगवान को अर्पित किया जाएगा। औषधीय काढ़े के भोग से भगवान को स्वस्थ करने के जतन किए जाएंगे। भगवान के स्वस्थ होते ही तीन दिवसीय काशी का प्रसिद्ध रथयात्रा मेला आरंभ हो जाएगा।
सुबह 5:13 बजे मंगला आरती के बाद भगवान जगन्नाथ की विशेष पूजा की गई। इसी के साथ जलाभिषेक शुरू हो गया। सबसे पहले शैलेश शापुरी, संजय शापुरी ने जलाभिषेक किया। इसके बाद भक्तों में भगवान को स्नान कराने की होड़ मच गई। स्नान कराने के साथ ही भगवान को लंगड़ा आम, पूरी, मालपूआ का भोग भी अर्पित किया जा रहा था।
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दिन के 12 बजे तक स्नान चला। इसके बाद कपाट बंद कर दिए गए। दोपहर बाद तीन बजे फिर गंगा जल के अभिषेक के साथ बाबा के कपाट खुले। रात 10 बजे के बाद तक भगवान जगन्नाथ को भक्त स्नान कराते रहे। इसके बाद भगवान बीमार पड़ गए। रात को बाबा जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विग्रहों को छत से लाकर मंदिर में विराजमान कराया गया। इसके बाद कपाट बंद कर दिए गए। मंदिर के पुजारी राधेश्याम पांडेय ने बताया कि मंगलवार को औषधीय काढ़े का भोग भगवान को अर्पित किया जाएगा।
सैर-सपाटे के लिए पांच जुलाई को रथयात्रा पहुंचेंगे भगवान, लगेगा मेला
बीमार पड़े भगवान जगन्नाथ चार जुलाई को परवल के काढ़े का भोग लगने के बाद स्वस्थ होंगे। इसके बाद मंदिर में आरती -पूजा भी आरंभ हो जाएगा। पांच जुलाई की शाम चार बजे बाबा की पालकी सजेगी। पालकी पर सवार होकर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथयात्रा पहुंचेंगे। कंधे पर भगवान की पालकी भक्त उठाएंगे। रथयात्रा में बेनी राम के बगीचे में भगवान की पालकी उतारी जाएगी।
रात को ही रथ सजेगा और भगवान रथारूढ़ हो जाएंगे। इसी के साथ छह जुलाई से काशी का प्रसिद्ध रथयात्रा मेला आरंभ हो जाएगा। आठ जुलाई तक रथयात्रा के मेले का लोग लुत्फ उठाएंगे। मानसूनी मौसम में वर्ष का यह पहला लक्खी मेला है, जिसमें काशीवासी भगवान का रथ खींचकर निहाल होंगे।
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मंगलवार को मेवा, मिश्री, तुलसी, लौंग, जायफर के औषधीय काढ़े का भोग भगवान को अर्पित किया जाएगा। औषधीय काढ़े के भोग से भगवान को स्वस्थ करने के जतन किए जाएंगे। भगवान के स्वस्थ होते ही तीन दिवसीय काशी का प्रसिद्ध रथयात्रा मेला आरंभ हो जाएगा।
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सुबह 5:13 बजे मंगला आरती के बाद भगवान जगन्नाथ की विशेष पूजा की गई। इसी के साथ जलाभिषेक शुरू हो गया। सबसे पहले शैलेश शापुरी, संजय शापुरी ने जलाभिषेक किया। इसके बाद भक्तों में भगवान को स्नान कराने की होड़ मच गई। स्नान कराने के साथ ही भगवान को लंगड़ा आम, पूरी, मालपूआ का भोग भी अर्पित किया जा रहा था।
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दिन के 12 बजे तक स्नान चला। इसके बाद कपाट बंद कर दिए गए। दोपहर बाद तीन बजे फिर गंगा जल के अभिषेक के साथ बाबा के कपाट खुले। रात 10 बजे के बाद तक भगवान जगन्नाथ को भक्त स्नान कराते रहे। इसके बाद भगवान बीमार पड़ गए। रात को बाबा जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विग्रहों को छत से लाकर मंदिर में विराजमान कराया गया। इसके बाद कपाट बंद कर दिए गए। मंदिर के पुजारी राधेश्याम पांडेय ने बताया कि मंगलवार को औषधीय काढ़े का भोग भगवान को अर्पित किया जाएगा।
सैर-सपाटे के लिए पांच जुलाई को रथयात्रा पहुंचेंगे भगवान, लगेगा मेला
बीमार पड़े भगवान जगन्नाथ चार जुलाई को परवल के काढ़े का भोग लगने के बाद स्वस्थ होंगे। इसके बाद मंदिर में आरती -पूजा भी आरंभ हो जाएगा। पांच जुलाई की शाम चार बजे बाबा की पालकी सजेगी। पालकी पर सवार होकर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथयात्रा पहुंचेंगे। कंधे पर भगवान की पालकी भक्त उठाएंगे। रथयात्रा में बेनी राम के बगीचे में भगवान की पालकी उतारी जाएगी।
रात को ही रथ सजेगा और भगवान रथारूढ़ हो जाएंगे। इसी के साथ छह जुलाई से काशी का प्रसिद्ध रथयात्रा मेला आरंभ हो जाएगा। आठ जुलाई तक रथयात्रा के मेले का लोग लुत्फ उठाएंगे। मानसूनी मौसम में वर्ष का यह पहला लक्खी मेला है, जिसमें काशीवासी भगवान का रथ खींचकर निहाल होंगे।