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नेशनल खिलाड़ी के घर अन्न का अकाल, सरकारी राशन से भी वंचित
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वाराणसी। लॉकडाउन में काशी के एक नेशनल खिलाड़ी के घर का चूल्हा बड़ी मुश्किल से जल रहा है। बच्छाव गांव की रहने वाली कबड्डी खिलाड़ी (रेडर) के घर में दो जून की रोटी पास-पड़ोस के सहयोग से मिल रही है। गांव के प्रधान की लापरवाही के चलते इस परिवार का राशन कार्ड तक नहीं बन सका है। इससे आठ सदस्यों के परिवार को सरकारी सहायता भी नहीं मिल पा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी होने का सपना संजोए खेलो इंडिया में रेडर की भूमिका में कांस्य पदक पर कब्जा जमाने वाली कबड्डी खिलाड़ी सोनाली कनौजिया के घर का चूल्हा लॉकडाउन में बड़ी मुश्किल से जल पा रहा है। धोबी का काम करने वाले पिता श्यामू कनौजिया लॉकडाउन में बेरोजगार हो गए, जो बीएचयू हॉस्टल के छात्रों का कपड़ा धोने और स्त्री करके घर के आठ सदस्यों का खर्च चला रहे थे। तीन चरणों में जारी लॉकडाउन में कुछ दिन उधारी और कुछ दिन पास पड़ोस के लोगों की मदद मिली। मगर अब लॉकडाउन के चौथे चरण में घर चलाना मुश्किल हो गया है। श्यामू ने बताया कि घर में सोनाली सहित मेरी तीन बेटी, एक बेटा, पत्नी और बूढ़े माता-पिता हैं। राशन कार्ड न होने से आठ सदस्यों के परिवार के लिए सरकारी राशन भी नहीं मिलता। राशन कार्ड बनवाने के लिए गांव के प्रधान को कई बार आवेदन दिया और ऑनलाइन आवेदन भी किया मगर प्रधान की लापरवाही के कारण मेरा राशन कार्ड भी नहीं बना। वहीं सोनाली के कोच और डॉ जितेंद कुमार ने सोनाली के घर स्थिति के बारे में जाना तो आर्थिक मदद की पेशकश की।
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अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी होने का सपना संजोए खेलो इंडिया में रेडर की भूमिका में कांस्य पदक पर कब्जा जमाने वाली कबड्डी खिलाड़ी सोनाली कनौजिया के घर का चूल्हा लॉकडाउन में बड़ी मुश्किल से जल पा रहा है। धोबी का काम करने वाले पिता श्यामू कनौजिया लॉकडाउन में बेरोजगार हो गए, जो बीएचयू हॉस्टल के छात्रों का कपड़ा धोने और स्त्री करके घर के आठ सदस्यों का खर्च चला रहे थे। तीन चरणों में जारी लॉकडाउन में कुछ दिन उधारी और कुछ दिन पास पड़ोस के लोगों की मदद मिली। मगर अब लॉकडाउन के चौथे चरण में घर चलाना मुश्किल हो गया है। श्यामू ने बताया कि घर में सोनाली सहित मेरी तीन बेटी, एक बेटा, पत्नी और बूढ़े माता-पिता हैं। राशन कार्ड न होने से आठ सदस्यों के परिवार के लिए सरकारी राशन भी नहीं मिलता। राशन कार्ड बनवाने के लिए गांव के प्रधान को कई बार आवेदन दिया और ऑनलाइन आवेदन भी किया मगर प्रधान की लापरवाही के कारण मेरा राशन कार्ड भी नहीं बना। वहीं सोनाली के कोच और डॉ जितेंद कुमार ने सोनाली के घर स्थिति के बारे में जाना तो आर्थिक मदद की पेशकश की।
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