फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   juloos of moharram and duldul has been cancelled

नहीं उठा दुलदुल का जुलूस, अजादारों में मायूसी

Thu, 27 Aug 2020 12:51 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2020 12:51 AM IST
विज्ञापन
juloos of moharram and duldul has been cancelled
काशी से उठने वाला दुलदुल का ऐतिहासिक जुलूस कोरोना संक्रमण के कारण नहीं निकला। 42 घंटों तक चलने वाले ऐतिहासिक जुलूस के नहीं निकलने से अजादारों में मायूसी छाई रही। हालांकि रवायत को निभाने केलिए मजलिसों का आयोजन किया गया। बुधवार को शहर के चौक थानाक्षेत्र के दालमंडी इलाके के कच्ची सराय इमामबाड़े से उठने वाला प्रसिद्ध दुलदुल का जुलूस कोरोना गाइडलाइन के अनुपालन में नहीं उठाया गया।
विज्ञापन

इस जुलूस के मुतवल्ली एडवोकेट इकबाल हुसैन ने जुलूस को मुल्तवी रखा। कच्ची सराय स्थित इमामबाड़े पर सन्नाटा पसरा रहा और दरवाजा बंद रहा। जुलूस के मुतवल्ली एडवोकेट इकबाल हुसैन ने बताया कि 400 साल से उठ रहा यह जुलूस लगातार 42 घंटे चलता है और शहर के कई थानाक्षेत्रों से गुजरता हुआ वापस दालमंडी स्थित कच्ची सराय के इमामबाड़े में समाप्त होता है।
विज्ञापन

लाडले साहब ने बताया कि इस जुलूस को उठाने की जगह केवल मजलिस हुई जिसको मौलाना अली इमाम जाफरी ने खिताब किया और अंजुमन जव्वादिया ने नौहा मातम किया। इस मौके पर इकबाल हुसैन, अधिवक्ताए शकील जैदी और कैफी आदि ने इस रवायत को कायम रखा। वहीं अंजुमन अबिदिया का जुलूस भी स्थगित रहा जो कि चौहट्टा लाल खान से उठाया जाता है। यहां भी मजलिस हुई जिसमें शामिल रिजवी, दानिश हसन, गुलाम अब्बास पप्पू, वजीर हसन आदि ने नौहा ख्वानी की। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि 6 मोहर्रम के दिन कर्बला के 72 शहीदों में से इमाम हुसैन के बेटे जनाब अली अकबर का गम मनाया जाता है। इमाम हुसैन ने कर्बला की जमीं पर अपना खेमा लगाने से पहले इसी बेटे के नाम से कर्बला की जमीन खरीदी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

शिया जमा मस्जिद के प्रवक्ता ने बताया की अजादारी की शुरुआत जैनब ने की थी जो कि इमाम हुसैन की बहन भी थी। शायद इसीलिए ये अजादारी की परंपरा आज तक पुरुषों से ज्यादा महिलाओं के द्वारा निभाई जाती है। कोरोना जैसी वबा ने भी महिलाओं का हौसला नहीं तोड़ा है और वो अपने घरों के इमामबाड़े में या हुसैन और या अब्बास की सदा बुलंद रखे हैं। ये गम ए हुसैन का अलग मोजिजा है के पहले जहां हर मोहल्ले में 5 या 10 मजलिसें होती थीं जिसमें सैकड़ो हजारों लोग आते थे आज वहीं शहर के हजारों इमामबाड़ों में 5 लोग दिन भर नौहा ओ सीनाजनी कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed