वाराणसी में जज बोले: दुष्कर्म के मामले में 90 की जगह 96 दिन में दाखिल किया आरोप पत्र,आरोपी को पहुंचा लाभ
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की तरफ से लिखे गए पत्र में कहा गया कि रैसीपट्टी बड़ागांव निवासी हिमांशु पांडेय के खिलाफ कैंट थाने में मुकदमा दर्ज है। नियमानुसार 90 दिन में आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया जाता है, लेकिन विवेचक ने ऐसा नहीं किया।
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दुष्कर्म के आरोपी के खिलाफ निर्धारित अवधि 90 दिन में आरोपपत्र न दाखिल किए जाने पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी कुमार की अदालत ने पुलिस आयुक्त को पत्र लिखा और कहा कि कैंट थाना प्रभारी/विवेचक ने जानबूझकर 96 दिन बाद आरोपपत्र दाखिल किया है। इससे आरोपी को लाभ पहुंचा है। इस लापरवाही की जांच और कार्रवाई करके 15 दिन में रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की तरफ से लिखे गए पत्र में कहा गया कि रैसीपट्टी बड़ागांव निवासी हिमांशु पांडेय के खिलाफ कैंट थाने में मुकदमा दर्ज है। नियमानुसार 90 दिन में आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया जाता है, लेकिन विवेचक ने ऐसा नहीं किया। छह दिन की देरी यानी 96 दिन बाद आरोपपत्र दाखिल किया। इसी आधार पर आरोपी के अधिवक्ता ने आरोपी को जमानत दिए जाने का अनुरोध किया है। राजातालाब थाना क्षेत्र की रहने वाली एक युवती की ओर से पुलिस कमिश्नर वाराणसी को दिए प्रार्थनापत्र के आधार पर 14 दिसंबर 2022 को कैंट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।