बनारस में जापान की मियावाकी तकनीक से सुधरेगी हवा की गुणवत्ता, इस तरह बनेंगे जंगल
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अब जापान की मियावाकी पद्धति बनारस की हवा सुधारेगी। शहर में हरियाली और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वन विभाग ने इसे लागू करने की रणनीति तैयार की है। पहले चरण में डोमरी, जयनारायण इंटर कॉलेज, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, जीटीसी और रामनगर पीएसी ग्राउंड को इसमें शामिल किया गया है।
नेशनल क्लीन एयर मिशन के तहत बनारस का चयन किया गया है। इसके तहत पहली बार वन विभाग ने मियावाकी पद्धति से जंगल बनाने का काम शुरू किया है। जिला वन अधिकारी महाबीर कौजालगी ने बताया कि योजना के अनुसार शहर के हर हिस्से में छोटे-छोटे प्राकृतिक जंगल तैयार होंगे।
इसके लिए जगह का चयन किया जा रहा है। पहले चरण में पीएम के गोद लिए हुए गांव डोमरी में रेलवे की एक हेक्टेअर जमीन पर, शहर के अंदर जीटीसी कैंपस, राजकीय कन्या इंटर कॉलेज और जयनारायण इंटर कॉलेज में एक-एक बीघेा में जंगल तैयार किए जाएंगे।
पहले चरण में एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। डोमरी में काम शुरू हो चुका है। उधर, इसमें नगर निगम ने भी रुचि दिखाई है। नगर आयुक्त ने वन विभाग से शहर के पार्कों में इस तरह के जंगल तैयार करने के लिए प्रोजेक्ट मांगा है।
एक हेक्टेअर में होंगे 30 हजार पौधे
आमतौर पर एक हेक्टेयर में 1100 पौधे लगते हैं, वहीं मियावाकी पद्धति से एक हेक्टेअर में 30 हजार पौधे लगाए जा सकते हैं। हाई डेंसिटी प्लांटेशन से बहुत कम समय में प्राकृतिक जंगल लहलहा उठेगा। यह बनारस की बिगड़ती हवा को सुधारने में बेहद मददगार होंगे। साथ ही जल, मृदा संरक्षण और पक्षियों के वास स्थल के संरक्षण में भी मददगार होंगे।
ये है मियावाकी पद्धति
जापानी वनस्पति विज्ञानी डॉ. मियावाकी ने पौधरोपण की इस पद्धति को विकसित किया है। इस विधि से कम जगह और कम समय में अधिक घनत्व वाले जंगल तैयार किए जा सकते हैं। पद्धति के अनुसार, पहले स्थानीय पौधों की सूची तैयार की जाती है।
रोपण में प्रजाति का चयन इस तरह किया जाता है कि कम रोशनी में तैयार होने वाली कम ऊंचाई की प्रजाति, मध्यम रोशनी में बढ़ने वाली मध्यम ऊंचाई की प्रजाति और ज्यादा रोशनी में जीने वाले ऊंची प्रजाति के पौधे रोपे जात हैं।
आप भी वन विभाग से जान सकते हैं तकनीक
डीएफओ ने बताया कि सब कुछ ठीक रहा तो साल भर में यह जंगल तैयार हो जाएंगे। अगर कोई व्यक्ति अपनी जमीन पर प्राकृतिक जंगल तैयार करवाना चाहता है तो वह वन विभाग से संपर्क कर सकता है। उसे भी पूरी तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। एक हेक्टेअर में जंगल तैयार करने में 26 लाख रुपये का खर्च आएगा।