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तीर्थंकरों की हुई पूजा, सद्गुणों को अपनाने का लिया संकल्प
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दिगंबर जैन के दसलक्षण महापर्व पर बृहस्पतिवार को तीर्थंकरों की विशेष पूजा संपन्न हुई। इस दौरान जैन समाज के लोगों ने अपने दुर्गुणों को दूर करने तथा सद्गुणों को अपनाने का संकल्प ग्रहण किया। बृहस्पतिवार की शाम को पांचवें दिन फेसबुक पर लाइव व्याख्यान करते हुए पंडित सिद्धांत शास्त्री सांगानेर ने उत्तम सत्य धर्म पर प्रवचन दिया।
उन्होंने कहा कि हमें वाणी मिली है सत्य और मधुर बोलने के लिए। जिनवाणी की आराधना करने के लिए। अत: हमें इसका दुरुपयोग कठोर अपशब्द बोलकर नहीं करना चाहिए। सत्यधर्म आत्मा का धर्म है। पंडित शास्त्री ने कहा सत्य ही ईश्वर है। जो सत्य का पालन करता है वह निर्भीक होता है। जगत में उसका नाम होता है। सत्य का साथ देने वाला हमेशा विजयी होता है और उसकी गाथा युगों-युगों तक गाई जाती है। सत्य तो सिर्फ एक है आत्मा और सभी धोखा है। धन, दौलत, जमीन, जायदाद, परिवार, समाज, पद एवं अपना खुद का शरीर सब धरा रह जाएगा। यह आत्मा ही निकल कर तेरे कर्मों के साथ जाएगी। जो स्वयं को तपा-तपा कर मिले वह सत्य है।
श्री दिगंबर जैन समाज काशी द्वारा चल रहे महापर्व पर जैन मंदिरों में कई धार्मिक आयोजनों के साथ प्रात: तीर्थंकर पार्श्वनाथ, सुपार्श्वनाथ, चंदा प्रभु एवं श्रेयांसनाथ का अभिषेक और पूजन किया गया। सायं काल महामंत्र का जाप, जिनवाणी एवं शास्त्र पूजन व भगवंतों की आरती की गई। सभी आयोजनों को भक्तों ने ऑनलाइन माध्यमों से अपने-अपने घरों पर देखा।
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उन्होंने कहा कि हमें वाणी मिली है सत्य और मधुर बोलने के लिए। जिनवाणी की आराधना करने के लिए। अत: हमें इसका दुरुपयोग कठोर अपशब्द बोलकर नहीं करना चाहिए। सत्यधर्म आत्मा का धर्म है। पंडित शास्त्री ने कहा सत्य ही ईश्वर है। जो सत्य का पालन करता है वह निर्भीक होता है। जगत में उसका नाम होता है। सत्य का साथ देने वाला हमेशा विजयी होता है और उसकी गाथा युगों-युगों तक गाई जाती है। सत्य तो सिर्फ एक है आत्मा और सभी धोखा है। धन, दौलत, जमीन, जायदाद, परिवार, समाज, पद एवं अपना खुद का शरीर सब धरा रह जाएगा। यह आत्मा ही निकल कर तेरे कर्मों के साथ जाएगी। जो स्वयं को तपा-तपा कर मिले वह सत्य है।
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श्री दिगंबर जैन समाज काशी द्वारा चल रहे महापर्व पर जैन मंदिरों में कई धार्मिक आयोजनों के साथ प्रात: तीर्थंकर पार्श्वनाथ, सुपार्श्वनाथ, चंदा प्रभु एवं श्रेयांसनाथ का अभिषेक और पूजन किया गया। सायं काल महामंत्र का जाप, जिनवाणी एवं शास्त्र पूजन व भगवंतों की आरती की गई। सभी आयोजनों को भक्तों ने ऑनलाइन माध्यमों से अपने-अपने घरों पर देखा।
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