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Varanasi News: बीएचयू में जांच, फीस भी जमा, रिपोर्ट में न डॉक्टर का नाम, न ही फीस का जिक्र

Mon, 21 Oct 2024 12:48 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 21 Oct 2024 12:48 AM IST
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Investigation in BHU, fees also deposited, neither doctor's name nor fees mentioned in report
अमर उजाला एक्सक्लूसिव
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सीसीआई लैब में मरीजों को मिलने वाली रिपोर्ट को देख डॉक्टर भी हैरान
हर दिन होती है आठ हजार से अधिक जांच, बिना फीस रसीद के नहीं जमा होता है सैंपल
माई सिटी रिपोर्टर/ रबीश श्रीवास्तव
वाराणसी। आईएमएस बीएचयू के सीसीआई लैब में होने वाली जांच की रिपोर्ट में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। बीएचयू अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टर द्वारा जांच लिखने पर मरीज सीसीआई लैब में जांच की फीस रसीद संग सैंपल जमा कर रहे हैं। उनको जो रिपोर्ट मिल रही है, उसमें डॉक्टर का नाम गायब रहता है। यहीं नहीं फीस रसीद की जगह भी एनए यानी नॉट अप्लीकेबल लिखा रहता है। इस तरह की रिपोर्ट एक दो नहीं बल्कि नेफ्रोलाॅजी, न्यूरोलॉजी, हृदय रोग विभाग, बाल रोग विभाग सहित अधिकांश विभागों में पहुंच रही है, जिसको देख डॉक्टर भी हैरान हैं। ऐसा इसलिए कि उनकी लिखी जांच, बीएचयू में ही हो रही है फिर रिपोर्ट में नाम क्यों नहीं रहता है।
बीएचयू सीसीआई लैब में वाराणसी सहित आसपास के जिलों, बिहार तक से आने वाले मरीजों की सामान्य दिनों में करीब 8 हजार से अधिक जांच होती है। अस्पताल में सीसीआई लैब में जो जांच की व्यवस्था है, उसके हिसाब से ओपीडी में डॉक्टर जो भी जांच लिखते हैं, वहां एक जांच का फाॅर्म भरा जाता है। उस पर मरीज का नाम, उम्र, एमआरडी नंबर के साथ ही कौन सी जांच करवानी है, इसको लिखा जाता है। इस पर जांच लिखने वाले डॉक्टर के नाम के साथ ही उनकी मुहर भी लगती है। इसके बाद मरीज सीसीआई लैब में बने काउंटर पर जांच की फीस जमा कर उसकी रसीद लेते हैं। खास बात यह है कि सैंपल निकालने और जमा करते समय लैब के काउंटर पर बैठे कर्मचारी भी मरीज से जांच की फीस जमा वाली रसीद देखकर ही आगे की कार्रवाई शुरू करते हैं। इसी पर घेरा लगाकर मरीजों को रिपोर्ट लेने आने के समय उसको लेकर आने को कहा जाता है। इस समय मरीजों को जो रिपोर्ट मिल रही है, उसमें डॉक्टर का नाम मेंशन नहीं रहता है।
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केस-1
नेफ्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने आईं गाजीपुर निवासी 27 वर्षीय मरीज माया मरीज को डॉक्टर ने सीबीसी, एलएफटी, आरएफएटी सहित अन्य जांच लिखी। 26 सितंबर को जो रिपोर्ट मिली, उस पर डॉक्टर का नाम नहीं लिखा था। यहीं शुल्क की रसीद के आगे भी एनए यानी नाट अप्लीकेबल लिखा। मरीज और उसके परिजन कुछ समझ नहीं पाए। बाद में डॉक्टर को दिखाने गए तो पता चला कि जितनी भी जांच रिपोर्ट है, सब पर यहीं लिखा है।
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केस-2
हृदय रोग विभाग में दिखाने आए जौनपुर निवासी मरीज शिवपाल ने डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने सीबीसी, एलएफटी, आरबीएस, आरएफटी, इलेक्टो आदि जांच लिखी। 03 अक्तूबर को मिली रिपोर्ट में डॉक्टर का नाम नहीं था। रिसिप्ट यानी फीस जमा करने की जगह एनए यानी नाट अप्लीकेबल लिखा था। मरीज के पास फीस जमा करने की रसीद भी थी।

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कोट
सीसीआई लैब में ज्यादातर मरीज जो जांच का फार्म लेकर आते हैं, उस पर अधिकांश पर डॉक्टर का नाम नहीं रहता है। केवल रेजिडेंट का हस्ताक्षर रहता है। नियमानुसार ओपीडी या वार्ड से जो फाॅर्म भरकर दिया जाता है, उस पर डॉक्टर का नाम होना चाहिए। जहां तक रिपोर्ट में रिसिप्ट के आगे एनए यानी नाट अप्लीकेबल लिखा आ रहा है, ऐसा क्यों हो रहा है, इसको दिखवाया जा रहा है। - प्रो. एसपी मिश्रा, प्रभारी, सीसीआई लैब, बीएचयू
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