अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: परिवार के साथ निभातीं समाज की जिम्मेदारी
वाराणसी में पुलिस महकमे में चौकी और थाना प्रभारी के तौर पर तैनात महिलाएं अपने परिवार के साथ ही समाज की जिम्मेदारी भी संभालती हैं। अनियमित दिनचर्या के साथ ही उन्हें बच्चों, पति और परिवार को देखना पड़ता है। इसके बावजूद वह अपने काम और व्यवहार से हमेशा यही संदेश देती हैं कि नारी के लिए नामुमकिन कुछ भी नहीं है। वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी के साथ ही जिले में सोमवार को स्थापित होने वाली लंका व बड़ागांव महिला रिपोर्टिंग चौकी की प्रभारी से ‘अमर उजाला’ ने बात की तो उनका कहना था कि आखिरकार हमें हमारा काम ही तो सबसे अलग कर विशिष्ट पहचान दिलाता है।
महिला चौकी लंका प्रभारी मालती प्रजापति ने बताया कि एक साल का बच्चा है और परिवार भी है। हालांकि पुलिस में भर्ती होने के साथ ही हमें इस बात का प्रशिक्षण दिया जाता है कि हम प्रत्येक परिस्थिति के अनुरूप खुद को ढालकर समाज के लिए सदैव अच्छा करते रहें। मैं हरसंभव यह प्रयास करूंगी कि जो जिम्मेदारी दी गई है उसका ईमानदारी, मेहनत और लगन के साथ अच्छे से निर्वहन करते हुए अच्छा परिणाम दूं।
महिला चौकी (बड़ागांव) प्रभारी अंजू यादव ने कहा कि कामकाजी महिला को घर और बाहर दोनों जगह जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। सबसे बड़ी बात इच्छाशक्ति की होती है। अब तो बेटियां देश की रक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक परचम फहरा रही हैं। फिर भला हम क्यों पीछे रहें। मेरा अभी छह माह का बच्चा है, लेकिन परिवार और काम में सामंजस्य बनाकर चलती हूं। जो नई जिम्मेदारी दी गई है उसका अच्छे से निर्वहन करूंगी।
प्रभारी वन स्टॉप सेंटर प्रमिला यादव ने बताया कि ड्यूटी से खाली होकर घर पहुंचने में देर हो जाती है और बच्चे इंतजार करते रहते हैं। यह अच्छा तो नहीं लगता मगर हम अपनी ड्यूटी और सामाजिक जिम्मेदारी से कैसे भाग सकते हैं। हमारा रोजाना यही प्रयास रहता है कि जो भी अपनी व्यथा लेकर आए वह निराश होकर न जाए। जिम्मेदारियां बेशक दोहरी हैं लेकिन इसी में हमें रोजाना अच्छा करके समाज में अच्छा संदेश देना है।