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बड़ी खुशखबरीः बनारस को अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान की सौगात
amarujala.com, written by उत्पल कांत
Updated Thu, 13 Jul 2017 10:47 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान को केंद्र ने दी हरी झंडी
- फोटो : twitter
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र की जनता के लिए बड़ी खुशखबरी है। वाराणसी को अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र(IRRI) की सौगात मिली है। देश में उन्नत चावल की पैदावार के लिए यह पहल की गई है।
राष्ट्रीय बीज अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र,वाराणसी के परिसर में यह खुलेगा। साउथ एशिया रीजनल सेंटर का यह चावल अनुसंधान केंद्र पूर्वी भारत का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय संस्थान होगा। बुधवार को केंद्र सरकार ने इसके लिए हरी झंडी दे दी है।
यहां चावल की पैदावार और उसकी गुणवत्ता बेहतर करने के लिए शोध होगा। पूर्वी भारत के राज्यों में धान की खेती वर्षा पर निर्भर करती है। कभी बाढ़ तो कभी सुखाड़ के कारण दक्षिण भारत की तरह पूर्वी भारत में धान की खेती अच्छी नहीं हो पाती। जो धान होती भी है उसके चावल उन्नत किस्म के नहीं होते।
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वाराणसी में खुलने वाला अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र इन्हीं समस्याओं पर काम करेगा। केंद्र सरकार का मकसद चावल निर्यात में अव्वल होना है। वर्तमान में भारत चावल का बड़ा आयातक है। केंद्र सरकार कृषि को बढ़ावा देने का काम कर रही है।
साउथ एशिया रीजनल सेंटर का हेड क्वार्टर फिलिपिंस की राजधानी मनीला में है। मनीला से हीं वाराणसी का अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र संचालित होगा।
चावल अनुसंधान संस्थान फसल सुधार और संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में बुनियादी, प्रायोगिक और अनुकूलित शोध कार्य करता है ताकि विभिन्न मौसमों में भी चावल की उत्पादकता बढ़ाई और स्थिर रखी जा सके।
उम्मीद है कि इस संस्थान से पूर्वी भारत सहित दक्षिण एशिया के देशों में फूड प्रोडेक्शन और स्किल डेवलपमेंट में बढ़ोतरी होगी।
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राष्ट्रीय बीज अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र,वाराणसी के परिसर में यह खुलेगा। साउथ एशिया रीजनल सेंटर का यह चावल अनुसंधान केंद्र पूर्वी भारत का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय संस्थान होगा। बुधवार को केंद्र सरकार ने इसके लिए हरी झंडी दे दी है।
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यहां चावल की पैदावार और उसकी गुणवत्ता बेहतर करने के लिए शोध होगा। पूर्वी भारत के राज्यों में धान की खेती वर्षा पर निर्भर करती है। कभी बाढ़ तो कभी सुखाड़ के कारण दक्षिण भारत की तरह पूर्वी भारत में धान की खेती अच्छी नहीं हो पाती। जो धान होती भी है उसके चावल उन्नत किस्म के नहीं होते।
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वाराणसी में खुलने वाला अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र इन्हीं समस्याओं पर काम करेगा। केंद्र सरकार का मकसद चावल निर्यात में अव्वल होना है। वर्तमान में भारत चावल का बड़ा आयातक है। केंद्र सरकार कृषि को बढ़ावा देने का काम कर रही है।
साउथ एशिया रीजनल सेंटर का हेड क्वार्टर फिलिपिंस की राजधानी मनीला में है। मनीला से हीं वाराणसी का अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र संचालित होगा।
चावल अनुसंधान संस्थान फसल सुधार और संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में बुनियादी, प्रायोगिक और अनुकूलित शोध कार्य करता है ताकि विभिन्न मौसमों में भी चावल की उत्पादकता बढ़ाई और स्थिर रखी जा सके।
उम्मीद है कि इस संस्थान से पूर्वी भारत सहित दक्षिण एशिया के देशों में फूड प्रोडेक्शन और स्किल डेवलपमेंट में बढ़ोतरी होगी।
#Cabinet approves establishment of South Asia Regional Center (ISARC) of International Rice Research Institute (IRRI) Manila in Varanasi, UP pic.twitter.com/hVhd7VFEJr
— Radha Mohan Singh (@RadhamohanBJP) July 12, 2017